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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को देश की प्रमुख एयरलाइन इंडिगो को 458 करोड़ के जीएसटी डिमांड पर बलपूर्वक कार्रवाई करने से अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति अजय दिगपाल की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश दिया। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि विदेशी एयरक्राफ्ट इंजन सप्लायर से प्राप्त राशि मुआवजा प्रतीत होती है, जिसे सप्लाई नहीं माना जा सकता।

इंडिगो ने 2018-19 और 2019-20 के दौरान कुछ इंजनों के खराब होने के कारण एयरक्राफ्ट को ग्राउंड करना पड़ा था। इससे कंपनी को भारी नुकसान हुआ। विदेशी सप्लायर ने इस नुकसान की भरपाई के लिए लगभग 2,000 करोड़ के क्रेडिट नोट जारी किए। जीएसटी विभाग ने इस राशि को सेवा मानते हुए रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत जीएसटी वसूलने की मांग की। विभाग का तर्क था कि इंडिगो ने सप्लायर की खराबी को सहन किया, इसलिए यह टैक्सेबल सर्विस है। इंडिगो ने कोर्ट में दलील दी कि यह मुआवजा है, न कि कोई सेवा। कोर्ट ने टैक्स विभाग को नोटिस जारी किया और इंडिगो की याचिका पर सुनवाई के लिए हाईकोर्ट की छुट्टियों के बाद तारीख तय की। तब तक किसी भी प्रकार की बलात कार्रवाई (जैसे वसूली, पेनाल्टी आदि) न करने का आदेश दिया गया।

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