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नोएडा के एक इंजीनियर विकास झा ने बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी स्थापित की है. जहां फ्री में बच्चे अपने भविष्य की तैयारी कर सकते हैं और आराम से बैठकर ज्ञान अर्जित कर सकते हैं. सबसे बड़ी और खास बात ये है कि नोएडा का ये पर्थला खंजरपुर कंपोजिट पहला ऐसा विद्यालय है. जिसमें ये कोई लाइब्रेरी बच्चो के लिए बनाई गई है. हालांकि अगर प्राइवेट स्कूल के आपको हर जगह मिल जाएगी और ये पहल विकास झां की उन छात्रों के लिए है जिन्हें संसाधन नहीं मिल पाते हैं.

नोएडा: नोएडा के एक इंजीनियर विकास झा ने बच्चों के लिए एक लाइब्रेरी स्थापित की है. जहां फ्री में बच्चे अपने भविष्य की तैयारी कर सकते हैं और आराम से बैठकर ज्ञान अर्जित कर सकते हैं. सबसे बड़ी और खास बात ये है कि नोएडा का ये पर्थला खंजरपुर कंपोजिट पहला ऐसा विद्यालय है. जिसमें ये कोई लाइब्रेरी बच्चो के लिए बनाई गई है. हालांकि अगर प्राइवेट स्कूल के आपको हर जगह मिल जाएगी और ये पहल विकास झां की उन छात्रों के लिए है जिन्हें संसाधन नहीं मिल पाते हैं.

सोशल मीडिया पर समय बिताने से अच्छा बुक पढ़ें

विकास झा ने बताया कि इस लाइब्रेरी का कॉन्सेप्ट कुछ ऐसा है कि आजकल बच्चे ज्यादातर मोबाइल और टीवी के माध्यम से सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं. जो ज्ञान बुक्स पढ़ने से होगा वो दो-मिनट का वीडियो देखकर नहीं होगा. जो भी बच्चे इस स्कूल में आते है या आस पास रहते है वो इस लाइब्रेरी का फ्री में लाभ उठा सकते हैं. इन्होंने बताया कि इसकी कोई फीस चार्ज नहीं है समाज सेवा के हित में किया गया ये एक छोटा सा प्रयास है.

इन्होंने नोएडा वासियों से भी अपील करी है कि आपके घर में अगर कोई ऐसी बुक रखी जा जिन्हें कोई पढ़ता नहीं है. वो आप यहां रख सकते है वो किसी के काम आएगी. ये प्राइमरी स्कूल है और यहां छोटे बच्चे ज्यादा आते है उस वजह से हमने यहां ऐसी प्रेरित करने वाली कहानियों वाली किताबों को ज्यादा रखा है. मोरल स्टोरी की सबसे ज्यादा किताब आपको मिलेगी कंप्यूटर, टेक्निकल और एआई से रिलेटेड की किताबें हमने यहां रखी है. विकास झां ने बताया कि लाइब्रेरी के बारे में हम विचार कर रहे हैं की जल्द ही डिजिटल भी साथ में किया जाए.

गरीब असहाय बच्चे लेते हैं शिक्षा

विकास जाने बताया कि वह नोएडा में कई सालों से भविष्य एनजीओ के नाम से एक संस्था भी चलाते हैं. जिसमें गरीब और असहाय बच्चे शिक्षा लेते हैं. इस लाइब्रेरी के पीछे की वजह उन्होंने एक और बताई कि उनकी उनसे छोटी एक बहन सिंगापुर में किसी कारण गुजर गई. उसके बाद उन्होंने उनके नाम से कई सालों से दिमाग में था. कुछ अलग करेगें लेकिन बजट कम होने के चलते संभव नहीं हो पाया था. अब फाइनली उन्होंने अपनी बहन शिखा की याद में इसे स्थापित करके उन बच्चों को खास तोहफा दिया है. जो बच्चे संसाधनों की कमी के चलते आगे नहीं बढ़ पाते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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