भारतीय सिनेमा में कुछ ऐसी कहानियां भी रहीं, जिन्हें पर्दे तक पहुंचने के लिए 14 से 16 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा. इन फिल्मों के बनने का सफर बेहद मुश्किलों भरा रहा, मेकर्स के सामने कई तरह चुनौतियां सामने आईं. हद तो तब हो गई, जब इनमें से एक फिल्म की लीड हीरोइन का रिलीज होने के महज कुछ ही दिनों बाद निधन हो गया. तमाम दुश्वारियों के बावजूद जब ये फिल्में आखिरकार सिनेमाघरों में आईं, तो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गईं.
नई दिल्ली. कुछ बॉलीवुड फिल्में सिर्फ अपनी कहानियों के लिए ही नहीं, बल्कि सिनेमाघरों तक पहुंचने के अपने लंबे और कड़े संघर्ष के लिए भी हमेशा याद की जाती हैं. रिलीज से पहले ये 9 फिल्में सालों की देरी, प्रोडक्शन के दौरान हुए भारी नुकसान, आपसी विवादों और कई तरह की अनहोनी जैसी बड़ी मुसीबतों से गुजरी हैं. तमाम रुकावटों और मुश्किलों का सामना करते हुए जब आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हुईं, तो इन्होंने न सिर्फ इतिहास रचा बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो गईं.
रॉकेट्री- द नंबी इफेक्ट: आर. माधवन ने साल 2012 में इस फिल्म का ऐलान किया था. इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन की जिंदगी पर आधारित इस बायोग्राफिकल ड्रामा के लिए सालों की रिसर्च और इंटरनेशनल शूटिंग शेड्यूल्स की जरूरत थी. माधवन ने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को निखारने में करीब एक दशक का समय लगा दिया. आखिरकार साल 2022 में जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो इसे क्रिटिक्स और दर्शकों से जबरदस्त सराहना मिली.
पाकीजा: फिल्ममेकर कमाल अमरोही का ड्रीम प्रोजेक्ट ‘पाकीजा’ बनने में करीब 16 साल का लंबा वक्त लगा था. 1950 के दशक के अंत में इसकी शूटिंग ब्लैक-एंड-व्हाइट में शुरू हुई थी, जिसे बाद में मीना कुमारी के कहने पर कलर में दोबारा शूट किया गया. कमाल अमरोही और मीना कुमारी के निजी रिश्ते, पैसों की तंगी और एक्ट्रेस की बिगड़ती तबीयत के कारण फिल्म बार-बार टलती रही. आखिरकार यह 1971 में पूरी हुई और मीना कुमारी के निधन से कुछ हफ्ते पहले 1972 में रिलीज हुई.
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मुगल-ए-आजम: भारतीय सिनेमा की सबसे मशहूर मूवी मुगल-ए-आजम को बनने में 14 साल से ज्यादा का समय लगा था. डायरेक्टर के. आसिफ ने 1940 के दशक में इस ऐतिहासिक ड्रामा पर काम शुरू किया था, लेकिन 1947 में भारत के विभाजन और बार-बार स्टारकास्ट बदलने से काम रुक गया. आलीशान महल, भारी-भरकम कॉस्ट्यूम्स और हजारों सैनिकों वाले सीन्स के कारण समय बढ़ता गया. आखिरकार 1960 में रिलीज होकर यह फिल्म हमेशा के लिए मील का पत्थर बन गई.
ब्रह्मास्त्र: पार्ट वन – शिवा: डायरेक्टर अयान मुखर्जी ने साल 2011 के आसपास ब्रह्मास्त्र की कल्पना की थी, लेकिन इस फैंटेसी-थ्रिलर को सिनेमाघरों तक पहुंचने में 2022 तक का वक्त लग गया. फिल्म को बड़े पैमाने पर बनाने के लिए जबरदस्त वीएफएक्स वर्क, वर्ल्ड-बिल्डिंग और बार-बार रीशूट की जरूरत पड़ी. रणबीर कपूर और आलिया भट्ट स्टारर यह फिल्म रिलीज से पहले करीब एक दशक तक प्रोडक्शन में रही और आखिरकार भारी बज के बीच सिनेमाघरों में रिलीज हुई.
गंगूबाई काठियावाड़ी: संजय लीला भंसाली की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ भी बड़े पर्दे पर आने से पहले कई सालों तक अधर में लटकी रही. भंसाली ने शुरुआत में प्रियंका चोपड़ा को ध्यान में रखकर इसकी प्लानिंग की थी, लेकिन बाद में आलिया भट्ट की एंट्री हुई. साल 2020 में कोरोना लॉकडाउन के कारण फिल्म की शूटिंग बुरी तरह प्रभावित हुई और रिलीज टलती गई. तमाम विवादों और देरी के बाद 2022 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की.
बाहुबली- द बिगनिंग: डायरेक्टर एसएस राजामौली ने साल 2011 में इस ऐतिहासिक फैंटेसी फिल्म की घोषणा की थी, जिसके प्री-प्रोडक्शन में ही एक साल से ज्यादा का समय लग गया. फिल्म के लिए करीब 15000 से ज्यादा स्टोरीबोर्ड स्कैच तैयार किए गए थे और विजुअल्स को दमदार बनाने के लिए हैवी वीएफएक्स का इस्तेमाल हुआ. अपनी इसी भव्यता के कारण फिल्म को बनने में लंबा वक्त लगा, लेकिन 2015 में रिलीज होते ही इसने भारतीय सिनेमा के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए.
बाजीराव मस्तानी: संजय लीला भंसाली ने इस फिल्म का ऐलान साल 2003 में किया था. शुरुआती खबरों के मुताबिक इसमें सलमान खान और ऐश्वर्या राय नजर आने वाले थे, लेकिन किन्हीं वजहों से यह प्रोजेक्ट सालों के लिए ठंडे बस्ते में चला गया. इसके बाद भंसाली ने 2014 में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा के साथ इसे दोबारा शुरू किया. एक दशक के लंबे इंतजार के बाद यह पीरियड ड्रामा आखिरकार 2015 में रिलीज हो सका.
आरआरआर: एसएस राजामौली ने साल 2017 में पहली बार इस फिल्म का हिंट दिया था, जिसके बाद यह भारत की सबसे चर्चित फिल्म बन गई. राम चरण और जूनियर एनटीआर स्टारर इस फिल्म की रिलीज में भारी-भरकम एक्शन सीन्स और कोरोना महामारी के लॉकडाउन की वजह से काफी देरी हुई. हालांकि फिल्म 2021 में ही बनकर तैयार थी, लेकिन कई बार टलने के बाद यह आखिरकार 2022 में सिनेमाघरों में आई और ग्लोबल ब्लॉकबस्टर साबित हुई.
तुम्बाड़: एक्टर-प्रोड्यूसर सोहम शाह के इस ड्रीम प्रोजेक्ट को पूरा होने में पूरे 6 साल का वक्त लगा था. इस फिल्म की डरावनी और रहस्यमयी दुनिया को रचने के लिए स्क्रीनप्ले पर सालों काम किया गया. महाराष्ट्र के सुदूर बारिश वाले इलाकों की तलाश की और सेट्स तैयार किए. यह अनोखी फैंटेसी-हॉरर फिल्म आखिरकार साल 2018 में रिलीज हुई और आगे चलकर सिनेमा प्रेमियों के बीच कल्ट क्लासिक बन गई.
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