Image Slider

नई दिल्ली. महेंद्र सिंह धोनी जब क्रिकेट को पूरी तरह से अलविदा कहेंगे तो पूरी दुनिया में उनके फैंस का दिल टूट जाएगा. इसमें एक नाम ऐसा है जिसने अपनी जिंदगी ही माही सर के नाम कर दी. चाहे बीमार रहो या जेब खाली हो वो हर हाल में धोनी को स्पोर्ट करने स्टेडियम में मौजूद रहे. धर्मशाला की एक ठंडी रात में 11:37 बजे राम बाबू पहली बार अपने “भगवान” से मिले. इस पल के लिए उन्होंने सात साल तक मैच देखे. इंडियन एक्सप्रेस ने धोनी के इस सबसे बड़े फैन की जिंदगी से जुड़े हर पहलू से फैंस को अवगत कराया.

राम बाबू के लिए ये पल कभी ना भूलने वाला था, “मैंने उनके पैर छुए, उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और गले लगाया. उस रात मैं बिल्कुल नहीं सो पाया. मन कर रहा था बार-बार धोनी सर से मिलूं.”

उस रात के बाद से एमएस धोनी ने उनके लिए मैच के टिकट का इंतजाम करना शुरू कर दिया. बाकी सीएसके फैंस की तरह राम बाबू ये नहीं जानते कि वो अपने हीरो को फिर कभी पीली जर्सी में खेलते देख पाएंगे या नहीं. चोट और टीम की जीत की लय बनाए रखने के लिए धोनी ने इस सीजन में सीएसके के सभी मैचों से बाहर रहना पड़ा. राम बाबू ने शुक्रवार को कहा, “बहुत साल से तपस्या है हमारा…बहुत दुख होगा अगर वो अब नहीं खेलेंगे.”

मोहाली के राम बाबू का धोनी के लिए प्यार

राम बाबू मोहाली के रहने वाले हैं. उन्होंने पहली बार धोनी को 2004 में देखा था. इसके बाद तीन साल तीन आईसीसी ट्रॉफी और एक नाम कैप्टन कूल लग गया. राम बाबू ने कहा, “वो भारतीय टीम के लिए बहुत लकी थे. उन्होंने भारत के लिए तीन आईसीसी ट्रॉफी जीती हैं. मैं उन्हें दिल से चाहता हूं.”

राम बीस साल से ज्यादा वक्त से मैच देखने जा रहे हैं. हर साल ग्यारह महीने घर से बाहर रहते हैं. नौकरी नहीं करते कि कोई मैच मिस ना हो जाए. “कई बार रिश्तेदारों की मौत भी मिस कर देता हूं. मैं बेरोजगार हूं. अब नौकरी नहीं कर सकता. अगर नौकरी करूंगा तो मैच नहीं देख पाऊंगा. बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है. मां हमेशा पूछती थीं, “बेटा, ये कौन सी नौकरी है? ये कोई नौकरी नहीं है. तुम बस झंडा लेकर घूमते रहते हो. मुझे इस पर बहुत गर्व है. पूरी इंडिया मुझे एमएस धोनी के नाम से जानती है.”

बिना टिकट ट्रेन में चढ़ जाते थे.

“कई बार टीटीई ने पकड़ लिया. मैं अपनी हालत बता देता था. अगर जेल में डालना है तो डाल दो. अगर कोई दिल से और ईमानदारी से कुछ कहे, तो सामने वाला भी मान लेता है.”

धोनी ने बचाई राम बाबू की जान

बांग्लादेश में 2014 का टी20 वर्ल्ड कप हुआ था. टूर्नामेंट के दौरान राम बाबू बीमार पड़ गए. बुखार, प्लेटलेट्स कम हो गए लेकिन मैच देखने जाते रहे. कई बार स्टैंड में गिर भी गए. टीम के फिजियो नितिन पटेल ने दवा दी. लेकिन वो काफी नहीं था. धोनी ने राम बाबू को साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले प्रैक्टिस में बुलाया, रिपोर्ट देखी और कहा: “तुम्हारी हालत बहुत खराब है.”

धोनी ने पहले समझाया. “तुम्हारे पास खड़े होने की ताकत नहीं है. तो मैच कैसे देखोगे? छह मीटर का झंडा कैसे लहराओगे?” राम बाबू ने कहा कि वो संभाल लेंगे. फिर धोनी ने पासपोर्ट दिखाने को कहा. राम बाबू ने पासपोर्ट दे दिया. धोनी ने उसे अपनी जेब में रख लिया और राम बाबू से कहा कि अब घर जाओ. सुबह चार बजे फोन आया. “अपना पासपोर्ट ले लो और निकल जाओ. तुम्हारी फ्लाइट बुक है. सुबह 8 बजे, जेट एयरवेज. सीधे ढाका से चंडीगढ़.”

View this post on Instagram

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||