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टेलीकॉम मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं देखा.आफिस के दरवाजे शीशे के, खिडि़कियां शीशे की, दीवारें शीशे की, जहां मंत्री बैठक भी करते हैं तो टीम का हाल और मंत्री का मूड बाहर से भी नजर आ सकता है.
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पूरा आफिस कांच का बनवा दिया, जिससे पूरी पारदर्शिता बनी रहे.
नई दिल्ली. सरकार की पारदर्शिता तो पीएम मोदी सरकार की पहचान बन गयी है. लेकिन इसी पारदर्शिता का एक ऐसा उदाहरण है जो वाकई आम आदमी को अचरज में जरुर डाल देगा. इस पूरी तरह से पारदर्शी कमरे की तस्वीर को देखिए. शीशे के अंदर बैठा मंत्री क्या कर रहा है ये वहां से गुजरता हर कर्मचारी और मंत्री से मिलने पहुंचा हर व्यक्ति देख सकता है. अब कहा तो ये भी जा सकता है कि अंदर बैठा मंत्री बाहर चल रही हर हरकत पर नजर पर रख रहा है. आलम ये है कि अगर कोई मिलने वाला बाहर से इशारा भी कर दे तो मंत्री चाहे तो उसे अंदर बुलाकर दो बातें कर सकता है. जी हां, हम बात कर हैं संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संचार भवन के कार्यालय की. संचार मंत्री का पद संभालने के बाद सिंधिया ने अपने इस कार्यालय कुछ ऐसा कायाकल्प किया है कि कर्मचारी भी तारीफ करते नही थक रहे कि ऐसा खुला दरबार नहीं देखा.
संचार मंत्री का पद संभालने का बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया जब संचार मंत्रालय पहुंचे तो इसे चारों तरफ से बंद पाया. संचार मंत्रालय में मंत्री के कार्यालय स्थित कमरे का आलम ये था कि कहीं से हवा धूप पहुंच ही नहीं पाती थी. ऊपर से कमरे के अंदर ही एक कमरा रेस्ट रूम भी बनाया हुआ था जो दशको से चला आ रहा था. चारों तरफ इतने ज्यदा फर्नीचर लगे थे कि खाली स्थान नजर नहीं आता था. ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सबसे पहले ये फैसला लिया कि अब कमरा ऐसा बंद कोठरी जैसा नजर नहीं आना चाहिए, जहां न तो धूप आए और न ही हवा. सिंधिया को लगा कि ऐसे बंद वाले माहौल में सिर्फ दम ही घुटता है . इसलिए फैसला ये हुआ कि संचार भवन के पहले माले का पूरा का पूरा कायाकल्प जल्दी से जल्दी हो.
मिलने वाले लोग बाहर से देख सकते हैं कि मंत्री मीटिंग में व्यस्त हैं या अंदर जा सकते हैं.
जल्द ही मंत्री के कमरे का पूरा ढांचा बदल गया. सिंधिया के कमरे के सामने बना कांफ्रेंस रूम भी अब पूरी तरह से शीशे का बना दिया गया है. दरवाजे शीशे के, खिडि़कियां शीशे की, दीवारें शीशे की, वहां मंत्री बैठक भी करते हैं तो टीम का हाल और मंत्री का मूड बाहर से भी नजर आ सकता है. वहां उनसे मिलने आए लोगों को भी ये पता चल जाता है कि मंत्रीजी कितने व्यस्त हैं कि उनसे मिल सकें.
संचार भवन के कर्मचारी अब बाहर से ही देख सकते है की ज्योतिरादित्य सिंधिया क्या कर रहे हैं. स्टाफ के सदस्य अब नजर बचा कर इधर उधर भी नहीं जा सकते. ये पारदर्शिता सिर्फ काम मे ही नही अनुशासन में भी पारदर्शिता ला रही है.
इस कायाकल्प का फायदा ये हुआ कि पूरे दिन पूरे मंत्रालय में धूप खिली नजर आती है. इस बदलाव के बारे में सिंधिया से पूछा तो तपाक से जवाब आया कि वो पहले भी नागरिक उड्डयन मंत्रालय मे ये प्रयोग कर चुके थे, लेकिन संचार मंत्रालय में उससे बड़ा प्रयोग किया. ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर के महाराजा परिवार से आते हैं लेकिन जनता के बीच से चुन कर लोकसभा भी आते हैं.
उनकी कार्यशैली का आलम ये है कि अब कॉल ड्रॉप की शिकायतें कम होने लगीं हैं और साथ ही बीएसएनएल और कुछ टेलीकॉम कंपनियां भी मुनाफे मे जाने लगीं हैं. पोस्टल विभाग के कायाकल्प में भी सिंधिया लग गए हैं. इसलिए ये पारदर्शिता उनकी कार्यशैली पर ही असर नहीं डाल रही, बल्कि उनकी उनकी लोकप्रियता को भी खासा बढ़ा रही है
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
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