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-देशव्यापी आह्वान पर गाजियाबाद में मेडिकल स्टोर बंद, सरकार तक पहुंचाई केमिस्ट समुदाय की आवाज
-अध्यक्ष राजदेव त्यागी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन, मरीज सुरक्षा को बताया सबसे बड़ा मुद्दा
-ऑनलाइन दवा कारोबार पर नियंत्रण की मांग तेज, छोटे केमिस्टों के अस्तित्व बचाने को एकजुट हुआ व्यापार जगत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। अवैध एवं अनियंत्रित ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को जनपद गाजियाबाद में अभूतपूर्व बंद देखने को मिला। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर जिले भर के केमिस्ट एवं दवा विक्रेताओं ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करते हुए अपने प्रतिष्ठान पूर्णत: बंद रखे। गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजदेव त्यागी के नेतृत्व में आयोजित इस आंदोलन को जिले के सभी व्यापारिक क्षेत्रों, कस्बों एवं नगरों में व्यापक समर्थन मिला। हड़ताल के दौरान गाजियाबाद केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों एवं दवा व्यापारियों ने स्थानीय प्रशासन के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार का ध्यान उन गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित किया गया, जो सीधे तौर पर जन स्वास्थ्य, मरीजों की सुरक्षा तथा लाखों छोटे लाइसेंसधारी केमिस्टों के अस्तित्व से जुड़े हुए हैं। अध्यक्ष राजदेव त्यागी ने कहा कि दवाएं सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि जीवन रक्षक उत्पाद हैं, जिनकी बिक्री सख्त नियमों और चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर ही होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में कई ऑनलाइन मंचों द्वारा बिना सत्यापित चिकित्सकीय पर्चे के दवाओं की बिक्री और घर-घर आपूर्ति की जा रही है, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इस पर तत्काल नियंत्रण नहीं लगाया गया तो दवा वितरण प्रणाली पूरी तरह अव्यवस्थित हो सकती है।

उन्होंने बताया कि ऑनलाइन दवा मंचों द्वारा अत्यधिक छूट की नीति अपनाई जा रही है, जिससे छोटे और पंजीकृत दवा विक्रेता आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। यह प्रतिस्पर्धा असमान है क्योंकि स्थानीय केमिस्टों को सरकारी नियमों का पूर्ण पालन करना पड़ता है, जबकि कई ऑनलाइन कंपनियां नियमों की अनदेखी कर रही हैं। इससे न केवल व्यापार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों को भी बिना उचित मार्गदर्शन के दवाएं मिल रही हैं। ज्ञापन में यह भी मांग उठाई गई कि शासन द्वारा जारी अधिसूचनाएं जीएसआर 817 (ई) और जीएसआर 220 (ई) को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए, क्योंकि इन प्रावधानों का दुरुपयोग करते हुए ऑनलाइन और त्वरित वितरण कंपनियां दवाओं की अनियंत्रित आपूर्ति कर रही हैं। केमिस्ट एसोसिएशन का कहना है कि यह व्यवस्था औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के तहत स्थापित नियंत्रण प्रणाली को कमजोर कर रही है। राजदेव त्यागी ने कहा कि कोविड महामारी के दौरान देशभर के केमिस्टों ने अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य सहयोगियों की भूमिका निभाते हुए दिन-रात कार्य किया और जनता तक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की।

उस कठिन समय में दवा विक्रेताओं ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना समाज सेवा की, लेकिन आज वही केमिस्ट अवैध ऑनलाइन गतिविधियों के कारण अस्तित्व संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार संबंधित अधिकारियों को प्रमाण और ज्ञापन दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हड़ताल के बावजूद केमिस्ट समुदाय ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों के लिए आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि आंदोलन का उद्देश्य जनता को असुविधा पहुंचाना नहीं बल्कि जन स्वास्थ्य की सुरक्षा और दवा व्यवस्था को व्यवस्थित करना है। जिले में आयोजित यह हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण रही और दवा व्यापारियों की अभूतपूर्व एकजुटता देखने को मिली। गाजियाबाद, लोनी, मुरादनगर, मोदीनगर और खोड़ा क्षेत्र की सभी केमिस्ट एसोसिएशनों ने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं दवा व्यापारी उपस्थित रहे और सामूहिक रूप से सरकार से ठोस नीति बनाने की मांग की। अध्यक्ष राजदेव त्यागी ने कहा कि यदि सरकार शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाती है तो आने वाले समय में केमिस्ट समुदाय व्यापक स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि दवा व्यापार केवल व्यवसाय नहीं बल्कि स्वास्थ्य सेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है। उन्होंने अंत में सरकार से आग्रह किया कि जन स्वास्थ्य की रक्षा, मरीजों की सुरक्षा और लाखों छोटे लाइसेंसधारी केमिस्टों एवं उनके कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन दवा बिक्री पर कड़े नियामकीय प्रावधान लागू किए जाएं। जनपद में हुई इस ऐतिहासिक बंदी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि केमिस्ट समुदाय अब अपने अधिकारों और जनहित के मुद्दों पर निर्णायक संघर्ष के लिए तैयार है।

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