Image Slider

Last Updated:

नैनी बाजार में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. एक मां ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं और मां की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं. यह हादसा 12 मई की रात यमुनानगर जोन के नैनी बाजार स्थित चैंपियन गली में हुआ.

जलते घर में बच्चों को बचाती रही मां, खुद जिंदगी की जंग हार गई अर्चनाZoom

प्रयागराज अग्नि कांड

प्रयागराजः नैनी बाजार में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. एक मां ने अपने बच्चों की जान बचाने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग भावुक हो रहे हैं और मां की बहादुरी को सलाम कर रहे हैं. यह हादसा 12 मई की रात यमुनानगर जोन के नैनी बाजार स्थित चैंपियन गली में हुआ.

यहां क्रॉकरी कारोबारी राम लाल केसरवानी के परिवार के तीन भाई एक ही मकान में रहते थे. मकान के ग्राउंड फ्लोर पर दुकान और गोदाम था, जबकि महिलाएं और बच्चे ऊपर की मंजिल पर मौजूद थे. रात करीब 9 बजे अचानक गोदाम में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई. देखते ही देखते आग ने पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया और चारों तरफ धुएं का गुबार फैल गया.

आग फैलने से रास्ता हुआ बंद

आग इतनी तेजी से फैली कि नीचे से निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया. जान बचाने के लिए परिवार के लोग छत पर पहुंच गए. संकरी गली होने की वजह से फायर ब्रिगेड को मौके तक पहुंचने में भी काफी परेशानी हुई. इसी बीच संजीव केसरवानी की पत्नी अर्चना ने जो किया, उसने हर किसी की आंखें नम कर दीं.
अर्चना ने सबसे पहले अपने एक साल के बेटे को चादर में लपेटा और करीब 12 फीट दूर पड़ोसी की छत की ओर उछाल दिया. वहां मौजूद लोगों ने बच्चे को सुरक्षित पकड़ लिया. इसके बाद उसने सीढ़ी की मदद से अपनी 13 साल और 10 साल की दोनों बेटियों को भी सुरक्षित पड़ोसी की छत तक पहुंचाया. इतना ही नहीं, अर्चना ने अपने भतीजे की जान भी बचाई.

बच्चों को बचाने के चक्कर में मां की गई जान

बच्चों और परिवार को सुरक्षित निकालते-निकालते अर्चना खुद आग और धुएं की चपेट में आ गई. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. हादसे में उनकी 13 साल की बेटी भी झुलस गई, जिसका इलाज आईसीयू में चल रहा है. वहीं छत से कूदने के दौरान अर्चना की भाभी सरिता के पैर में फ्रैक्चर हो गया. आग इतनी भयावह थी कि उसे बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की 12 गाड़ियों को कई घंटों तक मशक्कत करनी पड़ी. देर रात करीब 4 बजे आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका. अर्चना की बहादुरी और मां के त्याग की यह कहानी अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है.

About the Author

authorimg

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||