दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) के विशेष ऑडिट को लेकर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। इसमें सरकारी खजाने को पांच करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान पहुंचा है। ऑडिट विभाग ने एक दिसंबर 2019 से लेकर 10 फरवरी 2025 तक की अवधि के दौरान हुई वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को सौंप दी है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन रजिस्ट्रार अपने आधिकारिक दायित्वों के तहत डीएमसी में डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण के लिए कम शुल्क लेने के कारण सरकारी खजाने को 5.57 करोड़ रुपए से अधिक के नुकसान के लिए जिम्मेदार हैं। यह विशेष ऑडिट पूर्व पदाधिकारियों द्वारा गैर कानूनी रूप से प्राप्त वित्तीय लाभों की वसूली और सरकारी राजस्व को हुए नुकसान का आकलन के उद्देश्य से किया गया।
स्वास्थ्य विभाग वसूली की तैयारी में
डीएमसी अधिनियम और नियमों के तहत इस्तीफा देने के लिए जरूरी तीन महीने की अनिवार्य नोटिस पीरियड के बदले लगभग 13 लाख रुपये की अतिरिक्त वसूली की भी सिफारिश की गई है। स्वास्थ्य विभाग अभी विशेष ऑडिट रिपोर्ट में दिए नतीजों और सुझावों की बारीकी से जांच कर रहा है।
दस्तावेजों के रखरखाव में खामियों के संकेत
विशेष ऑडिट रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक, वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु के बाद सेवा को अनियमित रूप से जारी रखने और उसका विस्तार करने से संबंधित मामले, अनिवार्य स्वीकृतियों के बिना किए गए व्यय, सरकारी वित्तीय नियमों के अनुपालन में चूक, अनियमित भुगतान, आधिकारिक रिकॉर्ड व सेवा दस्तावेजों के रखरखाव में खामियों की ओर संकेत किया गया है। दिल्ली सरकार के मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी अनियमितता से सख्ती से निपटा जाएगा।
महंगे उपहारों की खरीद की
वेतन, भत्तों और संबंधित खर्चों के रूप में प्राप्त 3.23 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की वसूली की भी सिफारिश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार एमटीएस कर्मचारियों को एलडीसी पदों पर नियमित करने, काउंसिल सदस्यों के मेडिकल इंश्योरेंस पर अनियमित भुगतान और महंगे उपहारों की खरीद जैसे मामलों में 1.24 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितताओं के लिए भी जिम्मेदार हैं।
रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर नियमों का उल्लंघन
ऑडिट के अनुसार तत्कालीन रजिस्ट्रार के मामले में रिटायरमेंट की उम्र सीमा 60 साल से बढ़ाकर 65 वर्ष किया जाना भारत सरकार और दिल्ली सरकार की ओर से समय-समय पर जारी आदेशों और निर्देशों का उल्लंघन मिला। रिपोर्ट में वेतन एवं भत्तों, वाहन किराए, मेडिकल खर्चों की भरपाई, टेलीफोन खर्चों की भरपाई, कॉन्फ्रेंस में भाग लेने पर हुए व्यय से उत्पन्न होने वाले वित्तीय प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है।
वित्तीय अनियमितता की रिपोर्ट को तत्कालीन रजिस्ट्रार ने किया खारिज
दिल्ली मेडिकल काउंसिल (डीएमसी) में वित्तीय अनियमितता संबंधी ऑडिट रिपोर्ट को तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने खारिज कर दिया। उन्होंने 17 मई को होने वाले डीएमसी प्रतिनिधि चुनाव से पहले रिपोर्ट जारी करने पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि यह जानबूझकर भ्रष्टाचार की झूठी जन धारणा बनाने का प्रयास है। जबकि ऐसा भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ है। सेवा विस्तार का मुद्दा चुनिंदा और भ्रामक तरीके से उठाया गया है। रजिस्ट्रार के रूप में केवल काउंसिल का कर्मचारी था। एक कर्मचारी स्वयं को सेवा विस्तार नहीं दे सकता है। सेवा विस्तार को विधिवत गठित 25 सदस्यीय डीएमसी ने अपनी सक्षम निर्णय प्रक्रिया के माध्यम से अनुमोदित किया था। अब झूठे आरोप लगाने का प्रयास कर रहे कई व्यक्ति स्वयं उन निर्णयों में भागीदार थे।
डॉ. गिरीश त्यागी ने कहा कि डीएमसी में डीएमए प्रतिनिधि के चुनाव से ठीक 36 घंटे पहले रिपोर्ट जारी करना गंभीर प्रश्न उठाता है। इस स्तर पर ऑडिट टिप्पणियों का चुनिंदा सार्वजनिक प्रदर्शन राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है। मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। डॉ. गिरीश ने सवाल करते हुए पूछा कि आखिर ऑडिट रिपोर्ट सरकार को कब सौंपी।
अगर फैसले में कोई गड़बड़ी थी तो सरकार ने पांच-छह वर्षों तक इस पर आपत्ति क्यों नहीं जताई। नियुक्ति और सेवा समाप्ति का अधिकार काउंसिल के पास है। रजिस्ट्रार केवल परिषद के फैसले का पालन कर रहा था। चुनाव में डॉ. गिरीश त्यागी भी उम्मीदवार है। उन्होंने कहा कि नामांकन न करने को लेकर भी दबाव बनाया गया था।
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