Shagufta Rafique Movies : ये दास्ता उस कॉलगर्ल की है जिसने प्यार के दर्द को महसूस किया. बचपन गरीबी में बीता. मां को भीख मांगते देखा तो पैसे कमाने की ठानी. यहां तक कि जिस्मफरोशी का पेशा शुरू किया. दुबई-यूएई के होटलों में डांस किया. किसी तरह परिवार को पाला. फिर किस्मत ने पलटा खाया. प्यार-दर्द और धोखे के जाल में बुनी ऐसी कहानियां लिखीं कि पूरा बॉलीवुड उसका दीवाना हो गया. पूरे बॉलीवुड को प्यार का मतलब सिखाया. अपनी पर्सनल लाइफ की कहनी को पर्दे पर उतारा. आइये जानते हैं इस 7वीं फेल कॉलगर्ल की निजी जिंदगी के बारे में जिसने कई सुपरहिट फिल्में लिखीं…………
‘हम तेरे बिन कहीं रह नहीं पाते, तेरे बिना क्या वजूद मेरा’ और ‘सैया रे तू तो बदला नहीं है’ जैसे मेलोडियस गाने आपने भी जरूर सुने होंगे. ये गाने दर्द और प्यार का अहसास कराते हैं लेकिन इन फिल्मों को लिखने वाली स्क्रीन राइटर शगुफ्ता रफीक की पर्सनल लाइफ की कहानी कहीं ज्यादा दर्दनाक है. शगुफ्ता ने ‘वो लम्हे’, ‘आवारापन’, ‘धोखा’, राज 2, मर्डर 2, जन्नत 2, आशिकी 2 और सैयारा जैसी फिल्मों की कहानी लिखी है. इन फिल्मों की कहानी दर्शकों के दिल को छू गई. इन फिल्मों के गाने भी खूब पॉप्युलर हुए. हीरो-हीरोइन, डायरेक्टर-सिंगर का नाम सबको पता है लेकिन इन फिल्मों की कहानी लिखने वाली शगुफ्ता रफीक के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. शगुफ्ता कभी जिस्मफरोशी के धंधे में भी थीं.
राइटर शगुफ्ता रफीक को एक्ट्रेस अनवरी बेगम ने गोद लिया था. यानी वो एडॉप्टेड चाइल्ड थीं, इसलिए बचपन से ही घरवालों के ताने सुनने को मिले. उनके असली मां-बाप कौन है, किसी को जानकारी नहीं है. अनवरी बेगम की बेटी सईदा खान 60-70 के दशक की एक्ट्रेस रही हैं. उन्होंने बृज सदाना से शादी की थी. इस तरह से शगुफ्ता का संबंध बॉलीवुड एक्टर कमल सदाना से है. शुगफ्ता का बचपन बेहद गरीबी में बीता. अनवरी बेगम के पति की मौत चुकी थी. गरीबी के चलते वो भीग मांगकर गुजारा करती थीं. तन ढंकने के लिए पैसे नहीं थे.
ऐसे में होश संभालते ही श्गुफ्ता ने अपनी मां की मदद करने की ठानी. पढ़ाई में बहुत ज्यादा मन नहीं लगा. शगुफ्ता रफीक ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘जब मैं मुंबई की अंधेरी गलियों में थी, तकलीफ में थी, मेरी मां चाहती थी कि मैं एक्ट्रेस बनूं. फिर मैंने लिखना शुरू किया. ज्यादा पढ़ी-लिखी ना होने के बावजूद राइटर कैसे बन गईं? इस सवाल के जवाब में शगुफ्ता कहती हैं, ‘जब मैं छोटी थी तो झूठी कहानियां खूब बनाती थी. मां की डांट से बचने के लिए. मैंने सिर्फ सातवीं तक पढ़ाई की है. मुझे स्कूल से नफरत थी. मैंने 10वीं में 3 बार फेल हुई.’
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बचपन से लेकर जवानी तक शगुफ्ता ने सिर्फ संघर्ष देखा. शगुफ्ता ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘कई साल तक भुखमरी झेली. घर में रखा सामान बेच दिया. घर के हालात बहुत खराब थे. ऐसे में 17 साल की उम्र में मैं कॉल गर्ल बन गई. मैंने पेशा करना शुरू कर दिया. कई साल तक यही क्रम चलता रहा. तब मेरी एक दोस्त थी. वो डांस बार में काम करती थी. वो बोली कि वेश्यावृत्ति कब तक करोगी. इससे तो बेहतर है कि तुम डांस करो.’
शगुफ्ता बताती हैं कि जब से उन्होंने होश संभाला खुद को जिस्मफरोशी के धंधे में पाया लेकिन जिंदगी बदलने की चाहत में वो बार डांसर बनीं. और फिर सिंगर बनीं लेकिन डांस बार बंद होने से सालभर पहले एक शख्स ने जिंदगी बदल दी. जिंदगी बदलने की घटना ही आशिकी 2 फिल्म का बड़ा हिस्सा है. शगुफ्ता बताती हैं, ‘आशिकी 2 पिक्चर में मेरी जिंदगी का 30-40 प्रतिशत हिस्सा दिखाया गया है.’
कॉल गर्ल, दुबई में मुजरे और जिस्मफरोशी में रहने वाली शगुफ्ता इस दलदल से कैसे निकलीं? इसके जवाब में उन्होंने कहा, ‘मैंने तय कर लिया था कि पूरी जिंदगी यह काम नहीं करूंगी, मेरी जिंदगी का वो एक फेज था, जिसने सबकुछ करवाया. मैंने किया भी इसलिए क्योंकि मेरी जो मां थी, मैं एडॉप्टेड बच्ची थी, उन्होंने मुझे एक जिंदगी दी. मैं हमेशा सोचती थी कि अगर उन्होंने मुझे एडॉप्ट नहीं किया होता तो मेरा क्या होता. वो मां जिसके पास हीरे-जवाहरात थे, उनका एक समय ऐसा आया जब वो गरीबी में फंस गईं. मुझे अपनी मां को सबकुछ वापस करना था. मैंने मां को भीख मांगते देखा तो जिस्मफरोशी शुरू की. उन्होंने मुझे बहुत डांटा लेकिन मैंने नहीं सुनी. मैंने दुबई-यूएई में डांस शुरू किए. वहां के होटले में नाचने के लिए आउटलेट बने होते हैं. मैंने इससे बहुत पैसे कमाए.’
शगुफ्ता पर जिस शख्स ने बेशुमार पैसे लुटाए, उसी को वो दिल दे बैठी थीं. इस दिलचस्प लव स्टोरी के बारे में उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था. ‘सैयारा’ फिल्म की राइटर ने कहा था, ‘ मैं जब पहली बार दुबई गई तो मेरी उम्र 27 साल थी. मैं बहुत डरी हुई थी. ठीक से नाच भी नहीं पा रही थी. वहां पर मेरी मुलाकात एक पाकिस्तानी शख्स से हुई जिसकी उम्र करीब 45 साल थी. उसने मुझे बहुत पैसे दिए. होटल अथॉरिटी ने मुझे उससे मिलने की इजाजत दी. हमारी दोस्ती हो गई. एक हफ्ते में उसने मुझे शादी के लिए प्रपोज किया. हालांकि हमारे बीच 20 साल का फासला था, फिर मैं उससे शादी के लिए तैयार हो गई. ‘आशिकी 2 में आरोही की जिंदगी का किरदार मेरा ही है. राहुल जयकार का किरदार इस तरह के लोगों से इंस्पायर्ड है.’
साल 2002 में शगुफ्ता की मुलाकात महेश भट्ट से हुई. उन्हें शगुफ्त को किस्सागोई करने का मौका दिया. 2006 में मोहित सूरी की ‘कलयुग’ फिल्म के कुछ सीन्स शगुफ्ता ने लिखे थे. 2005 में डांस बार बंद होने के बाद शगुफ्ता की पहली फिल्म 2006 में आई. वो थी : वो लम्हे. शगुफ्ता बताती हैं, ‘जिस दिन मैंने पिक्चर साइन की, उसके दो दिन पहले मैं बार में डांस कर रही थी. मुझे भट्ट साहब का फोन आया. वो बोले कि मोहित सूरी तुमझे ‘वो लम्हे’ लिखवाना चाहता है. मैंने कहा कि मैं जॉब नहीं छोड़ सकती. ये सीन आशिकी 2 में भी है. भट्ट साहब ने मुझसे कहा था कि जब तुम्हें तसल्ली हो जाए, तब जॉब छोड़ देना.’
महेश भट्ट के साथ संबंधों पर शगुफ्ता रफीक ने कहा, ‘भट्ट साहब और मैं सोलमेट हैं. कोई भी हमारे रिश्ते को गलत समझ सकता है. उनकी और मेरी पिछली जिंदगी एक जैसी है. जन्मतिथि भी सेम है. मेरी मां की शादी मेरे पिता से नहीं हुई थी. उनकी मां की शादी भी उनके डैड से नहीं हुई थी. या हुई तो छिपाया गया. नाजायज संतान माना गया.’
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