‘इंस्पेक्टर अविनाश’ एक क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज है, जिसका दूसरा सीजन आज यानी 15 मई 2026 को जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम हुआ है. इसे नीरज पाठक ने लिखा और निर्देशित किया है. लेकिन, क्या आप भी ये सोच रहे हैं कि ये क्राइम थ्रिलर रियल पुलिसिंग पर है या कोई सिनेमाई ड्रामा है. रणदीप हुड्डा ने कैसेइंस्पेक्टर अविनाश का किरदार
निभाया. चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ उन क्राइम-ड्रामा सीरीज में शामिल है, जिसने रिलीज के बाद दर्शकों के बीच काफी चर्चा बटोरी. पहले सीजन को काफी पसंद किया गया. अब मेकर्स दूसरा सीजन लेकर आ गए है. जियो हॉटस्टार पर आज ही दूसरा सीजन स्ट्रीम हुआ हैं. सीरीज में रणदीप हुड्डा ने यूपी के एक तेजतर्रार पुलिस अफसर का किरदार निभाया है, जो अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ लगातार एनकाउंटर ऑपरेशन चलाता नजर आता है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि क्या यह कहानी सच पर आधारित है या सिर्फ सिनेमाई कल्पना है?
आपके मन में भी ये सवाल है तो आपको बता देते हैं कि सीरीज सच्ची घटनाओं और यूपी पुलिस के रियल इंस्पेक्टर अविनाश मिश्रा की जिंदगी पर आधारित है. 1997 के आसपास की घटनाओं को केंद्र में रखकर बनाई गई यह सीरीज अविनाश मिश्रा की STF टीम की गैंगस्टरों के खिलाफ जंग दिखाती है. डायरेक्टर नीरज पाठक ने अविनाश मिश्रा से सीधे मिलकर उनकी बायोपिक अधिकार हासिल किए थे. सीरीज में हथियारों के सिंडिकेट को खत्म करने की मुहिम, एनकाउंटर और सिस्टम के दबाव को दर्शाया गया है. हालांकि, सीरीज में दिखाई गई कई घटनाओं को ड्रामेटिक बनाने के लिए काल्पनिक तरीके से भी पेश किया गया है.
सीरीज में पुलिस ऑपरेशन, मुखबिर नेटवर्क, छापेमारी और गैंगस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई को काफी रॉ और हिंसक अंदाज में दिखाया गया है. कई पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि 90 के दशक की यूपी पुलिस में ऐसी कार्यशैली आम थी, खासकर उन इलाकों में जहां अपराध चरम पर था. हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी मानते हैं कि सीरीज में कुछ चीजों को सिनेमाई प्रभाव बढ़ाने के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है.
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रणदीप हुड्डा अपने किरदारों में गहराई से उतरने के लिए जाने जाते हैं. ‘इंस्पेक्टर अविनाश’ के लिए भी उन्होंने लंबी तैयारी की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने उत्तर प्रदेश के पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की, उनकी बॉडी लैंग्वेज और बोलचाल को समझा.
रणदीप ने इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने सिर्फ पुलिस अफसर की बाहरी छवि नहीं, बल्कि उसकी मानसिकता को समझने की कोशिश की. उन्होंने यह जानने का कोशिश की कि लगातार अपराध और हिंसा के बीच काम करने वाला अधिकारी किस तरह सोचता और प्रतिक्रिया देता है. सीरीज में उनका लुक, संवाद शैली और एक्शन सीक्वेंस इसी तैयारी का परिणाम माने गए. कई दर्शकों ने उनके प्रदर्शन को शो की सबसे बड़ी ताकत बताया.
90s के यूपी में बढ़ते अपराध, माफिया और हथियार तस्करी ने आम जनता में सुरक्षा की चिंता पैदा की. ऐसे में अविनाश मिश्रा जैसे एंकाउंटर स्पेशलिस्ट्स को ‘महाकाल’ या हीरो की छवि मिली. मुंबई में प्रदीप शर्मा जैसे ऑफिसर्स भी इसी दौर में चर्चा में रहे. लोग अपराध पर सख्त एक्शन चाहते थे, जब कानूनी सिस्टम धीमा पड़ जाता था. सीरीज इसी सोशल कॉन्टेक्स्ट को कैप्चर करती है जहां एक अधिकारी सिस्टम के अंदर और बाहर दोनों तरफ लड़ता है.
सीरीज की लोकप्रियता की सबसे बड़ी वजह इसका रियलिस्टिक ट्रीटमेंट, रणदीप हुड्डा की परफॉर्मेंस और सच्ची घटनाओं से जुड़ी कहानी मानी जाती है. यही कारण है कि रिलीज के बाद भी यह शो लगातार चर्चा में बना हुआ है. सीजीज को अच्छे रिव्यूज मिल रहे है और फैंस रणदीप हुड्डा की भी तारीफ कर रहे हैं.
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