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Kuldeep Sengar Rape Case: नाबालिग से रेप के आरोप में फंसे कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं. क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा निलंबित की गई थी.

कुलदीप सेंगर जेल में ही रहेगा...CJI सूर्यकांत ने रद्द किया HC का फैसलाZoom

कुलदीप सिंह सेंगर मामले की सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई.

लखनऊः कुलदीप सिंह सेंगर मामले में सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सेंगर की सजा निलंबित की गई थी. यानी कि कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बरकरार रहेगी और वह जेल में ही रहेगा. कोर्ट ने हाईकोर्ट से मुख्य अपील पर 2 महीने के भीतर फैसला करने का प्रयास करने को कहा है. सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि CBI की अपील दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है. वहीं, वरिष्ठ वकील एन. हरिहरन ने दलील दी कि पीड़िता नाबालिग नहीं थी.

‘जज साहब सभी रिपोर्ट सेंगर के पक्ष में हैं’
उन्होंने कहा कि AIIMS बोर्ड की रिपोर्ट भी यही कहती है और सभी रिपोर्ट सेंगर के पक्ष में हैं, फिर भी वह जेल में हैं. इस पर SG ने कहा कि मुख्य सजा IPC की धारा 376(1) के तहत उम्रकैद की है. इस दलील पर CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि फिलहाल मुद्दा सिर्फ सजा निलंबित करने का था. लेकिन मामले में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर विचार जरूरी है.

हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने को लेकर क्या बोले CJI
सुनवाई के दौरान यह भी बहस हुई कि क्या MLA को POCSO कानून के तहत “पब्लिक सर्वेंट” माना जा सकता है. जस्टिस बागची ने कहा कि हाईकोर्ट का अत्यधिक तकनीकी निष्कर्ष स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि POCSO बच्चों को यौन शोषण से बचाने वाला कानून है. एसजी ने कहा कि एमएलए प्रभावशाली स्थिति में होता है. सीजेआई ने कहा कि हाईकोर्ट ने सजा निलंबित की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया था. अब सवाल यह है कि आदेश गलत था या नहीं. ऐसे में हाईकोर्ट मुख्य अपील सुनने में असहज हो सकता है.

‘मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई करे हाईकोर्ट’
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट मुख्य अपील पर जल्द सुनवाई करे. अगर अपील पर जल्द सुनवाई संभव न हो, तो सजा निलंबन की अर्जी पर नया आदेश पारित किया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसने मामले के मेरिट पर कोई राय नहीं दी है और हाईकोर्ट भी सजा निलंबन की अर्जी पर फैसला लेते समय सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से प्रभावित न हो.

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Prashant RaiChief Sub Editor

Prashant Rai am currently working as Chief Sub Editor at News18 Hindi Digital, where he lead the creation of hyper-local news stories focusing on politics, crime, and viral developments that directly impact loc…और पढ़ें

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