राजधानी में बढ़ते कचरे और लैंडफिल संकट के बीच एमसीडी ने ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर बड़ा एक्शन प्लान लागू करना शुरू किया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के तहत एमसीडी मुख्यालय ने सभी जोनों को 680 जीरो वेस्ट कॉलोनियों की दोबारा ग्राउंड जांच, बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान और बंद पड़ी कम्पोस्टिंग व प्रोसेसिंग यूनिट्स को दोबारा चालू करने के आदेश दिए हैं। खास बात यह है कि यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, एमसीडी ने सभी जोनों को तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, राजधानी की 680 जीरो वेस्ट कॉलोनियों में कचरे के इन-सीटू प्रोसेसिंग सिस्टम का दोबारा मूल्यांकन होगा। संबंधित जोनों को दो सप्ताह की समय सीमा दी गई है। इस प्रक्रिया में एनजीओ, कंसल्टेंट और स्वच्छता विभाग की संयुक्त टीमों को शामिल किया जाएगा। एमसीडी जांच करेगा कि कॉलोनियों में स्रोत स्तर पर गीले और सूखे कचरे को अलग किया जा रहा है या नहीं, कंपोस्टिंग व्यवस्था काम कर रही है या नहीं।
एमसीडी ने पहली बार सभी जोनों को बड़े स्तर पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों की व्यापक पहचान करने के निर्देश भी दिए हैं। इसके तहत होटल, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल, अस्पताल, मॉल, बड़े आवासीय समूह, बाजार और व्यावसायिक परिसरों को चिह्नित किया जाएगा। एक महीने के भीतर यह प्रक्रिया पूरी की जाए और 31 मई 2026 तक सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के पालन के लिए नोटिस जारी कर दिए जाए।
एक टन क्षमता वाली प्रोसेसिंग यूनिट्स दोबारा चलेंगी
एमसीडी ने प्रतिदिन एक टन क्षमता वाली मौजूदा प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी दोबारा चालू करने का फैसला लिया है। इसके लिए एनजीओ की भागीदारी लेने या कम्पोस्ट पिट मॉडल अपनाने को कहा गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि वार्ड और कॉलोनी स्तर पर कचरे का निस्तारण शुरू हो जाता है तो लैंडफिल साइटों पर जाने वाले कचरे की मात्रा में बड़ी कमी लाई जा सकती है।
इसके अलावा, सभी सीटीयू और जीवीपी स्थलों के रखरखाव को लेकर भी अलग से निर्देश जारी किए गए हैं। एमसीडी ने सभी जोनल उपायुक्तों को साफ तौर पर कहा है कि यह सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग से जुड़ा मामला है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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