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Work From Home News Update: वेस्ट एशिया में बढ़ते युद्ध संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार बड़े आर्थिक फैसलों की तैयारी में नजर आ रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लगातार दो दिनों की आर्थिक संयम बरतने वाली अपील के बाद बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक ने देश में संभावित ऑस्टेरिटी मेजर्स यानी खर्च में कटौती से जुड़े कदमों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं.

सरकार की ओर से होने वाली ब्रीफिंग पर पूरे देश की नजर है. माना जा रहा है कि ईंधन बचत, सरकारी खर्चों में कमी, विदेशी मुद्रा संरक्षण और वर्क फ्रॉम होम जैसे उपायों पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

PM मोदी ने क्यों की संयम की अपील?

प्रधानमंत्री मोदी ने 10 और 11 मई को अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में लोगों से आर्थिक राष्ट्रभक्ति दिखाने की अपील की थी. उन्होंने कहा था कि वैश्विक संकट के इस दौर में हर नागरिक को संसाधनों की बचत में योगदान देना चाहिए. प्रधानमंत्री ने लोगों से एक साल तक सोना खरीदने से बचने, पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने और विदेशी यात्राओं को टालने की सलाह दी थी. उन्होंने ऑनलाइन मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की भी बात कही थी.

क्या फिर लौट सकता है वर्क फ्रॉम होम?

सरकार और उद्योग जगत के बीच इस बात पर चर्चा तेज हो गई है कि ईंधन बचत के लिए कोविड काल की तरह वर्क फ्रॉम होम मॉडल को फिर से बढ़ावा दिया जाए. आईटी उद्योग संगठन NASSCOM ने इस दिशा में समर्थन जताया है. वहीं कुछ कर्मचारी संगठनों ने श्रम मंत्रालय से वर्क फ्रॉम होम को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी करने की मांग की है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़ी कंपनियां दोबारा हाइब्रिड या वर्क फ्रॉम होम मॉडल अपनाती हैं, तो इससे ईंधन की खपत और ट्रैफिक दोनों में कमी आ सकती है.

सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए?

सरकारी काफिलों में कटौती
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने आधिकारिक काफिले को 50 फीसदी तक घटा दिया है. कई मंत्रालयों और भाजपा शासित राज्यों ने भी सरकारी वाहनों के उपयोग में कमी शुरू कर दी है. गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित तमाम मंत्रियों ने अपने काफिले में कमी की है. महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने सरकारी विमानों के इस्तेमाल को केवल जरूरी कार्यों तक सीमित कर दिया है.

सोने-चांदी पर बढ़ा आयात शुल्क
सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है. इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और गैर-जरूरी आयात रोकना माना जा रहा है.

ईंधन बचत पर जोर
सरकार मेट्रो, कारपूलिंग और रेलवे आधारित ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. कई विभागों को इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल की दिशा में आगे बढ़ने के निर्देश दिए गए हैं.

वेस्ट एशिया संकट चिंता का कारण?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतें बढ़ने से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है.

कैबिनेट बैठक के बाद क्या हो सकते हैं बड़े फैसले?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार आने वाले दिनों में कई अहम फैसले ले सकती है.

संभावित फैसले:

  • पेट्रोल-डीजल की कीमतों में चरणबद्ध बढ़ोतरी
  • विदेश यात्राओं पर सख्ती
  • सरकारी विभागों में नई भर्तियों पर रोक
  • सरकारी विदेश दौरों में कमी
  • वर्चुअल मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा
  • लक्जरी खरीद पर नियंत्रण
  • विदेशी मुद्रा भंडार पर भी नजर

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार फिलहाल लगभग 680-690 अरब डॉलर के स्तर पर है, लेकिन लंबे समय तक संकट जारी रहने पर सरकार दबाव महसूस कर सकती है.

भारत के आयात बिल में तेल की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी, सोने की 9 फीसदी और उर्वरकों की 2 फीसदी है. यही वजह है कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बनाए रखते हुए गैर-जरूरी खर्चों को कम करने की रणनीति पर काम कर रही है.

90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी चुनौती

वेस्ट एशिया में करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं. यदि हालात और बिगड़ते हैं तो भारत सरकार को बड़े स्तर पर निकासी अभियान चलाना पड़ सकता है. सूत्रों के मुताबिक, संबंधित मंत्रालयों को आपातकालीन योजनाएं तैयार रखने को कहा गया है.

क्या देश फिर संकट काल जैसी रणनीति की ओर बढ़ रहा है?

सरकार ने अभी किसी बड़े प्रतिबंध की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील और कैबिनेट स्तर पर हो रही बैठकों से साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में देश को संसाधन बचाने और खर्चों में संयम रखने की सलाह दी जा सकती है. अगर वेस्ट एशिया संकट लंबा चलता है, तो भारत कोविड काल जैसी बचत-आधारित आर्थिक रणनीति की ओर बढ़ सकता है.

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