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कानपुर में स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और एचबीटीयू ने मिलकर एआई आधारित स्मार्ट मेडिकल उपकरण विकसित करने का समझौता किया है. इस साझेदारी के तहत डॉक्टर और इंजीनियर मिलकर ऐसे तकनीकी समाधान तैयार करेंगे, जो मरीजों की बीमारियों का तेजी से पता लगाने और बेहतर इलाज में मदद करेंगे. एलएलआर अस्पताल में आने वाले हजारों मरीजों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही बर्न मरीजों के लिए ऐसे विशेष ‘स्मार्ट पैच’ भी विकसित किए जा रहे हैं, जो बिना बार-बार बदले खुद ही धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे, जिससे दर्द और संक्रमण का खतरा कम होगा और इलाज अधिक सुरक्षित व आधुनिक बनेगा.

कानपुर. कानपुर शहर में इलाज की दुनिया अब तेजी से बदलने जा रही है. गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) और हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू) ने मिलकर एक बड़ा कदम उठाया है. अब डॉक्टर और इंजीनियर एक साथ काम करेंगे और मरीजों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर आधारित स्मार्ट उपकरण तैयार करेंगे. इस करार का सीधा फायदा एलएलआर अस्पताल में इलाज कराने आने वाले हजारों मरीजों को मिलेगा. यहां रोजाना कानपुर ही नहीं, आसपास के 10 से ज्यादा जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. ऐसे में नई तकनीक से इलाज और भी आसान और तेज हो जाएगा.

इलाज होगा स्मार्ट, समय भी बचेगा
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के मुताबिक, अब इलाज में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. इससे बीमारी को जल्दी पकड़ना और सही इलाज देना आसान हो जाता है. एचबीटीयू के छात्र और प्रोफेसर मिलकर ऐसे उपकरण तैयार करेंगे, जो डॉक्टरों की मदद करेंगे और मरीजों को बेहतर इलाज देंगे. इस समझौते के तहत दोनों संस्थानों के फैकल्टी मेंबर्स और छात्र एक-दूसरे के यहां जाकर काम करेंगे. इससे नई तकनीक सीखने और उसे मरीजों तक पहुंचाने में तेजी आएगी. साथ ही फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम और रिसर्च प्रोजेक्ट भी चलाए जाएंगे.

बर्न मरीजों के लिए खास ‘स्मार्ट पैच’
एचबीटीयू के डीन बायोलॉजिकल साइंसेस प्रो. ललित कुमार सिंह ने बताया कि उनकी टीम खास तरह के मेडिकल पैच तैयार कर रही है. ये पैच खास तौर पर बर्न यूनिट के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होंगे. उन्होंने बताया कि अभी जो पैच इस्तेमाल होते हैं, उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है, जिससे मरीज को दर्द और संक्रमण का खतरा रहता है. लेकिन नए पैच ऐसे होंगे, जो स्किन पर लगने के बाद खुद ही धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. इन्हें हटाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और संक्रमण का खतरा भी कम होगा. इस पहल से मरीजों को कम दर्द, कम समय और बेहतर इलाज का फायदा मिलेगा. डॉक्टरों को भी सही फैसले लेने में मदद मिलेगी. कुल मिलाकर कानपुर में अब इलाज का तरीका पहले से ज्यादा आधुनिक और असरदार होने वाला है.

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Monali Paulनमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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