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यमुना बाजार घाट को खाली करने का जब से सरकारी नोटिस आया है तभी से यहां के निवासियों के चेहरे की रौनक ही गायब हो गई है। शुक्रवार को जब उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर की तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। सरकारी तलवार लटकने के बाद से यहां के स्थानीय निवासी दुख, दर्द, पीड़ा और अवसाद से भर गए हैं। इतने कम समय में दशकों तक सहेज कर रखी गई, विरासत को छोड़ना और पलायन पर आमादा होना आसान नहीं है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अपने पुरखों का आशियाना छोड़ कर चले जाएंगे, तो हम जिंदा लाश बन जाएंगे। इसलिए उन्होंने सरकारी फरमान के खिलाफ अदालत की ओर रुख करने की बात कही हैं। यमुना घाट पंडा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि वह लोग यहां कई पीढ़ियों से रह रहे हैं। उनके बुजुर्गों ने भी इसी घाट पर पूजा-पाठ और धार्मिक कार्य की हैं।

दावा है कि अगर यह पूरा इलाका ओ-जोन है तो फिर मजनू का टीला से अक्षरधाम तक सभी जगहों पर एक जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। आरोप लगाया कि सिर्फ घाट पर रहने वाले पंडा परिवारों को हटाना भेदभावपूर्ण लगता है। उन्होंने अपील की है कि सरकार पहले उनके रहने और रोजगार की व्यवस्था करे, उसके बाद कोई फैसला ले। बिना पुनर्वास के लोगों को बेघर करना सरकार की गलत मंशा को दर्शाती है।

पहले यमुना के जल से खाना बनाते से थे निवासी

स्थानीय निवासियों ने बताया कि पहले यमुना बिल्कुल साफ और स्वच्छ थी। उनकी पुरानी पीढ़ी यमुना के जल से ही खाना बनाते थे। यमुना का जल पीने के लिए भी इस्तेमाल करते थे। लेकिन दिल्ली में विकास का पहिया घुमा, उसने यमुना को कुचल दिया और मैला कर दिया। उन्होंने दावा किया कि अब यमुना में सीवर का पानी और फैक्ट्रियों का केमिकल मिल रहा है, जिसकी वजह से यमुना प्रदूषित हो रही है। न कि यमुना के आसपास रहने वाले लोग इसे गंदा कर रहे हैं। दावा है कि वह लोग यमुना को साफ करने में सरकार की मदद करते हैं।

मदद की बात

स्थानीय निवासियों ने बताया कि बहुत सारे सैलानी यमुना का सैर करने भी आते हैं। वह उनकी नाव में बैठकर यमुना का भ्रमण करते हैं। कई बार पूजा-पाठ के दौरान जब कोई श्रद्धालु यमुना में गिर जाते हैं, तो स्थानीय लोग उनकी मदद करते हैं। उनकी जान बचाते हैं।

लोगों से बातचीत…

मैं जब 13 साल की थी तब शादी होकर यहां यमुना बाजार आई थी। आज मेरी उम्र 70 साल हो गई है। हमने पूरी जिंदगी यहीं बिताई है। अब सरकार हमें यहां से हटाने की बात कह रही है, जो हमारे साथ गलत है।

-सरला

हम लोग कई दशकों से यहां रह रहे हैं। अचानक नोटिस देकर जगह खाली करने को कहना हमारे लिए बहुत बड़ी परेशानी है। सरकार को पहले रहने की दूसरी व्यवस्था करनी चाहिए।

-विनय कुमार

हमारे बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा की जिंदगी सब यहीं से जुड़ी हुई है। अगर हमें यहां से हटाया गया तो पूरा परिवार मुश्किल में आ जाएगा। हम कोर्ट में अपनी बात रखेंगे। कोर्ट ही हमें न्याय देंगे।

-विकास

सरकार अगर जगह खाली करवाना चाहती है तो पहले पुनर्वास की व्यवस्था कराए। लोगों के सिर से छत छीन लेना समाधान नहीं है। हम चाहते हैं कि हमारी आवाज सुनी जाए।

-राकेश शर्मा

हम गरीब लोग हैं। मेहनत-मजदूरी करके परिवार चलाते हैं। इतने साल से यहां रह रहे लोगों को बिना तैयारी के हटाना ठीक नहीं है। प्रशासन को मानवीय तरीके से फैसला लेना चाहिए।

-जामुन मलाकार

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