कानपुर में तैयार हुआ एक खास स्मार्ट चश्मा अब सिर्फ आंखों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह लोगों को सुनने में भी मदद करेगा. आईआईटी कानपुर जुड़े एक स्टार्टअप ने ऐसा स्मार्ट ग्लास तैयार किया है, जो खासतौर पर कंडक्टिव हियरिंग लॉस यानी सुनने की समस्या से परेशान लोगों के लिए बनाया गया है. आसान भाषा में कहें तो यह चश्मा कानों तक आवाज पहुंचाने का काम करेगा.
इस अनोखे स्मार्ट ग्लास को आईआईटी के इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर से जुड़े स्टार्टअप केशम इनोवेशन ने तैयार किया है. स्टार्टअप के संस्थापक प्रतीक रघुवंशी बताते हैं कि दुनिया भर में करोड़ों लोग सुनने की समस्या से जूझ रहे हैं. भारत में भी ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. इसी जरूरत को देखते हुए उन्होंने ऐसा उपकरण बनाने की सोचा, जो लोगों के लिए सुविधाजनक होने के साथ सस्ता भी हो.
हल्का चश्मा, लेकिन फीचर्स बेहद हाईटेक
यह स्मार्ट ग्लास देखने में बिल्कुल सामान्य चश्मे जैसा है, लेकिन इसके अंदर कई आधुनिक तकनीकें लगाई गई हैं. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऑडियो सिस्टम लगाया गया है, जो आवाज को बेहतर तरीके से उपयोगकर्ता तक पहुंचाने में मदद करता है.चश्मे में ब्लूटूथ 5.0 तकनीक भी दी गई है, जिसकी मदद से इसे मोबाइल फोन, लैपटॉप या दूसरे स्मार्ट डिवाइस से आसानी से जोड़ा जा सकता है.सबसे खास बात यह है कि इसका वजन काफी हल्का रखा गया है, ताकि लंबे समय तक पहनने पर भी परेशानी न हो.एक बार चार्ज करने पर यह करीब 12 घंटे तक लगातार काम कर सकता है.इसे सामान्य मोबाइल चार्जर की तरह ही आसानी से चार्ज किया जा सकता है.
विदेशों में लाखों का, भारत में होगा सस्ता
प्रतीक रघुवंशी के मुताबिक विदेशों में इसी तरह के स्मार्ट ग्लास की कीमत दो से ढाई लाख रुपये तक होती है.यही वजह है कि आम लोग उन्हें खरीद नहीं पाते। लेकिन आईआईटी कानपुर के इस स्टार्टअप ने इसे बेहद कम कीमत में तैयार किया है. भारतीय बाजार में इसकी संभावित कीमत 20 से 25 हजार रुपये के बीच रखी जाएगी.स्टार्टअप का कहना है कि यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित उत्पाद होगा.इसे अलग-अलग जगहों और कई मरीजों पर टेस्ट भी किया गया है.आईआईटी कानपुर की लैब में हुए परीक्षणों में भी इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं.
अगले छह महीने में बाजार में आने की तैयारी
स्टार्टअप के फाउंडर प्रतीक रघुवंशी ने बताया कि हमारी टीम अब इस स्मार्ट ग्लास को बड़े स्तर पर बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है.उम्मीद है कि अगले छह महीने के भीतर यह लोगों के लिए उपलब्ध हो जाएगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो सुनने की समस्या से परेशान हजारों लोगों की जिंदगी काफी आसान हो सकती है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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