Agra Ancient Shivling near Taj Mahal: मोहब्बत की निशानी ताजमहल के साये में एक ऐसा प्राचीन मंदिर स्थित है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका अस्तित्व खुद ताजमहल से भी पुराना है. यमुना किनारे दशहरा घाट पर स्थित इस शिवलिंग के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था है. जहाँ एक तरफ दुनिया ताजमहल के दीदार के लिए आती है, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में शिव भक्त इस रहस्यमयी और प्राचीन शिवलिंग के आगे शीश नवाते हैं. हालांकि इतिहास के पन्नों में इसका कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन जनश्रुतियों और स्थानीय मान्यताओं ने इस स्थान को विशेष बना दिया है.
ताजमहल से पुरानी है यह शिवलिंग
आगरा के इतिहास विभाग में मास्टर करने वाले और इतिहास के होनहार छात्र सक्षम ने बताया कि ताजमहल के पास स्थित शिवलिंग काफ़ी प्राचीन है. उन्होंने कहा कि यह ताजमहल से भी अधिक पुरानी है इसका इतिहास के पन्नों में कोई जिक्र नहीं मिलता है. सक्षम ने बताया कि शिवलिंग प्राचीन होने का दावा वहां के पुजारी और स्थानीय लोगों के अनुसार किया जाता है. उन्होंने कहा कि इतिहास की किसी भी किताब में इस मंदिर का कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है. उन्होंने कहा की ताजमहल से जुडी किताबों में भी इस मंदिर के बारे में नहीं बताया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार ही यह कथन कहा जाता है कि यह शिवलिंग ताजमहल से पुरानी है वरना इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है.
यमुना नदी में राजा को मिली थी यह शिवलिंग
आगरा के ताजमहल के पास स्थित दशहरा घाट पर स्थापित शिवलिंग काफ़ी प्राचीन है. स्थानीय लोगों के अनुसार इसे लेकर एक कहानी बताई जाती है. लोग कहते है कि कई वर्षो पहले एक राजा यहां से गुज़र रहे थे विश्राम और पानी पीने के दौरान उन्हें यह शिवलिंग दिखाई दी. राजा ने यह शिवलिंग वहीं यमुना किनारे स्थापित कर दी जो वर्तमान में दशहरा घाट कहलाती है. हालांकि यह कहानी सच है या नहीं इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है, लेकिन वर्तमान में इस मंदिर की काफ़ी लोकप्रियता है और आस पास के लोग यहां पूजा पाठ करने आते है.
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