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    <strong>Nautapa causes and symptoms:</strong> नौतपा भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान की एक ऐसी अवधारणा है, जो गर्मी के भीषणतम दिनों को परिभाषित करती है। जब सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं और तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है, तो उस अवधि को &#039;नौतपा&#039; कहा जाता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में रहने के शुरुआती 9 दिन जो सबसे अधिक गर्म माने जाते हैं, जिन्हें &#039;नौतपा&#039; कहा जाता है। इस वर्ष यह 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक जारी रहेगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-2026-rohini-nakshatra-kab-se-kab-tak-rahega-date-timing-126050400019_1.html" target="_blank">नौतपा 2026: रोहिणी नक्षत्र कब से शुरू होगा और कितने दिन तक रहेगा? जानिए पूरी जानकारी</a></strong>

     
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    आइए इसके वैज्ञानिक कारण, ज्योतिषीय आधार और शरीर पर दिखने वाले लक्षणों को विस्तार से समझते हैं। </h3>

     

    1. नौतपा क्या है?

    2. नौतपा के लक्षण

    3. नौतपा के खगोलीय एवं वैज्ञानिक कारण

    4. ज्योतिषीय कारण

    5. सावधानी की सलाह
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    1. नौतपा क्या है?</h3>

    नौतपा का शाब्दिक अर्थ है &#039;नौ दिनों का ताप&#039;। हिंदी कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उस समय के शुरुआती 9 दिनों को &#039;नौतपा&#039; कहा जाता है। यह आमतौर पर मई के अंत या जून की शुरुआत में आता है। मान्यता है कि यदि इन 9 दिनों में खूब गर्मी पड़े, तो मानसून के दौरान बारिश बहुत अच्छी होती है।

     
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    2. नौतपा के लक्षण</h3>

    जब नौतपा शुरू होता है, तो वातावरण में निम्नलिखित बदलाव और लक्षण दिखाई देते हैं:

     

    <strong>भीषण गर्मी और लू: </strong>तापमान अपने सामान्य स्तर से 2 से 5 डिग्री तक ऊपर चला जाता है। गर्म हवाएं (लू) तेज हो जाती हैं।

     

    <strong>नमी की कमी: </strong>हवा में रूखापन बढ़ जाता है, जिससे त्वचा में खिंचाव और होंठ सूखने जैसी समस्याएं होती हैं।

     

    <strong>जल स्रोतों का सूखना: </strong>तालाबों और नदियों का जलस्तर तेजी से गिरता है।

     

    <strong>अचानक आंधी-तूफान: </strong>शाम के समय धूल भरी आंधी या गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी होना भी इसका एक लक्षण है, जो बढ़ती गर्मी के कारण बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Zone) की वजह से होता है।
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    3. नौतपा के कारण</h3>

    नौतपा के पीछे वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दोनों कारण महत्वपूर्ण हैं:

     
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    खगोलीय एवं वैज्ञानिक कारण</h3>

    इस दौरान पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere) पर सूर्य की किरणें लंबवत (Vertical) पड़ती हैं।

     

    सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम महसूस होती है।

     

    वायुमंडल में नमी कम हो जाती है और शुष्क हवाएं (लू) चलने लगती हैं, जिससे धरती का तापमान तेजी से बढ़ता है।

     
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    4. ज्योतिषीय कारण</h3>

    सूर्य को &#039;अग्नि&#039; का कारक और चंद्रमा को &#039;शीतलता&#039; का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब सूर्य (अग्नि तत्व) रोहिणी नक्षत्र में आता है, तो वह चंद्रमा की शीतलता को सोख लेता है। शीतलता के अभाव में पृथ्वी पर ताप अत्यधिक बढ़ जाता है।
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    5. सावधानी की सलाह</h3>

    नौतपा के दौरान निर्जलीकरण/डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान अधिक से अधिक पानी पिएं, सूती कपड़े पहनें और दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें।

     

    अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong>

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