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CBSE 12th Result 2026: सीबीएसई 12वीं रिजल्ट अब कभी भी घोषित किया जा सकता है. लाखों स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स सीबीएसई बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 का इंतजार कर रहे हैं. क्या इस बार भी लड़कियां बाजी मारेंगी? जानिए मूल्यांकन के बाद सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट कैसे तैयार हो रही है.

सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट कैसे तैयार होती है?Zoom

CBSE Board Marksheet: सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की कॉपी चेक होने के बाद कुछ नियम ध्यान में रखकर मार्कशीट तैयार की जाती है

नई दिल्ली (CBSE 12th Result 2026). सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 किसी भी वक्त जारी किया जा सकता है. परीक्षाओं के खत्म होने के बाद से हाथ में मार्कशीट आने तक की प्रक्रिया काफी दिलचस्प होती है. सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट को तैयार करने के पीछे बोर्ड का ‘चेक एंड बैलेंस’ सिस्टम काम करता है. मूल्यांकन केंद्रों पर कॉपियां जांचने का काम पूरा होने के बाद असली खेल डेटा प्रोसेसिंग और मॉडरेशन का होता है. यहां सुनिश्चित किया जाता है कि किसी भी स्टूडेंट के साथ नाइंसाफी न हो.

सीबीएसई की मार्कशीट तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है. जहां पहले हाथों से अंक चढ़ाए जाते थे, वहीं अब TET (Theory Evaluation Trend) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है. इसका मतलब है कि जैसे-जैसे टीचर आपकी कॉपी जांचता है, वैसे-वैसे अंक सीधे बोर्ड के सर्वर पर अपलोड होते जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके फाइनल मार्क्स सिर्फ वही नहीं होते जो टीचर ने दिए हैं? इसमें कई तरह के फिल्टर और एडजस्टमेंट भी शामिल होते हैं. सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 से पहले समझिए पूरी प्रक्रिया.

CBSE 12th Result 2026: मूल्यांकन के बाद मार्कशीट कैसे तैयार होती है?

सीबीएसई बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2026 मई में ही जारी होगा. लाखों स्टूडेंट्स अपने नतीजों का इंतजार कर रहे हैं. सभी अपनी मार्कशीट देखने के लिए बेचैन हैं. जानिए मूल्यांकन प्रक्रिया खत्म होने के बाद सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट कैसे तैयार होती है.

डिजिटली अपलोड होते हैं मार्क्स

मूल्यांकन केंद्रों पर कॉपियां चेक करने के बाद परीक्षक हर प्रश्न के अंक ओएमआर शीट या सीधे डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करते हैं. सीबीएसई ने अब ‘रीयल-टाइम डेटा एंट्री’ सिस्टम अपनाया है. इसका सबसे बड़ा फायदा है कि Human Error की गुंजाइश कम हो जाती है और रिजल्ट तैयार करने में लगने वाला समय भी घट जाता है.

मॉडरेशन पॉलिसी: समान लेवल सुनिश्चित करना

यह सीबीएसई बोर्ड की मार्कशीट तैयार करने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. मान लीजिए कि फिजिक्स का पेपर सेट-1 थोड़ा कठिन था और सेट-2 आसान. ऐसे में बोर्ड ‘मॉडरेशन पॉलिसी’ का इस्तेमाल करता है. इसके तहत अलग-अलग सेट्स के बीच कठिनाई का स्तर बैलेंस करने के लिए अंकों में थोड़ा बदलाव किया जाता है, जिससे कठिन सेट वाले स्टूडेंट्स को नुकसान न हो.

ग्रेस मार्क्स और वेरिफिकेशन

सीबीएसई बोर्ड मार्कशीट को अंतिम रूप देने से पहले बोर्ड उन स्टूडेंट्स पर भी ध्यान देता है जो महज 1 या 2 नंबर से फेल हो रहे होते हैं, बोर्ड की इंटरनल पॉलिसी के तहत ‘ग्रेस मार्क्स’ दिए जाते हैं जिससे स्टूडेंट्स का साल बर्बाद न हो. इसके साथ ही, रैंडम आधार पर कुछ कॉपियों की दोबारा जांच की जाती है जिससे यह देखा जा सके कि मूल्यांकन के मानकों का सही पालन हुआ है या नहीं.

इंटरनल और प्रैक्टिकल का तालमेल

सीबीएसई बोर्ड की फाइनल मार्कशीट में सिर्फ थ्योरी के नंबर नहीं होते. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड स्कूलों की तरफ से भेजे गए इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल के अंकों को थ्योरी के साथ Sync करता है. अगर किसी स्कूल ने असामान्य रूप से बहुत ज्यादा इंटरनल मार्क्स दिए हैं तो सीबीएसई बोर्ड उसका रिकॉर्ड भी चेक करता है.

डिजिटल सिग्नेचर और डिजिलॉकर में स्टोरेज

जब सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट का सभी डेटा प्रोसेस हो जाता है तो मार्कशीट को डिजिटल रूप से तैयार किया जाता है. आजकल सीबीएसई की ओरिजनल मार्कशीट फिजिकल कॉपी से पहले DigiLocker पर उपलब्ध करा दी जाती है. इसमें क्यूआर कोड और डिजिटल सिग्नेचर होते हैं, जो इसे पूरी तरह सुरक्षित और मान्य बनाते हैं. इसके आधार पर आगे एडमिशन ले सकते हैं.

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Deepali PorwalSenior Sub EditorDeepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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