दिल्ली सरकार ने गेहूं खरीद के नियमों में छूट देकर किसानों को राहत देने की घोषणा की है। लेकिन हकीकत यह है कि राजधानी में ज्यादातर गेहूं पहले ही बिक चुका है और एफसीआई के जरिये सरकार ने अब खरीद प्रक्रिया शुरू की है। ऐसे में ये फैसला किसानों के लिए कितना मददगार होगा, इस पर सवाल उठ रहे हैं।
दिल्ली सरकार ने खराब मौसम से प्रभावित गेहूं की खरीद के लिए गुणवत्ता मानकों में ढील दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि अब 70 फीसदी तक चमक की कमी (लस्टर लॉस) वाला गेहूं भी खरीदा जाएगा। साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है, ताकि ज्यादा किसानों की फसल खरीद के दायरे में आ सके। सरकार का कहना है कि इस फैसले से किसानों को मजबूरी में कम कीमत पर फसल बेचने से बचाया जा सकेगा और उन्हें उचित दाम मिलेगा। छूट के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग स्टॉक में रखा जाएगा, उसका अलग हिसाब रखा जाएगा और प्राथमिकता के आधार पर उसका इस्तेमाल किया जाएगा।
किसान बोले… 10 अप्रैल से खरीद शुरू, अब तक एक दाना भी नही खरीदा
किसानों का कहना है कि सरकार का ये फैसला बहुत देर से आया है। दिल्ली में इस साल गेहूं की बिक्री 10 अप्रैल से शुरू हो गई थी और सरकार ने अब तक एक दाना भी नहीं खरीदा। नरेला मंडी के कृष्ण प्रधान ने बताया कि खराब मौसम के डर से किसानों ने ज मिला, उसी पर अपनी फसल बेच दी। नरेला अनाज मंडी के आढ़ती करन सिंह के मुताबिक, इस बार गेहूं 2300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये था।
दिल्ली में गेहूं की पैदावार पहले से ही सीमित
शहरीकरण के कारण दिल्ली में खेती योग्य जमीन कम हो गई है और गेहूं का कुल उत्पादन करीब 20 से 30 हजार टन के बीच ही रहता है। ये फसल मुख्य रूप से नजफगढ़, बवाना और महरौली के बाहरी इलाकों में उगाई जाती है। हालांकि प्रति एकड़ उत्पादन अच्छा है और 20 से 25 क्विंटल तक गेहूं निकल जाता है। ऐसे में सरकार का ये कदम नीति के स्तर पर किसानों को राहत देने वाला जरूर है, लेकिन समय पर लागू न होने की वजह से इस बार इसका फायदा सीमित ही नजर आ रहा है।
किसानों को लाखों का नुकसान
नया बांस गांव के किसान पंकज मान ने बताया कि उन्होंने 6 क्विंटल गेहूं बेचा, लेकिन एमएसपी पर खरीद न होने से उन्हें कम दाम पर ही संतोष करना पड़ा। वहीं, खेड़ा खुर्द के किसान सुखदेव मान ने बताया कि उन्होंने 22 एकड़ में गेहूं बोया था, लेकिन 2350 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से बेचना पड़ा, जिससे उन्हें करीब 3 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
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