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TN Election Results 2026: चेन्नई में आज सुबह जैसे ही मतगणना शुरू हुई, तमिलनाडु की सियासत में हलचल तेज हो गई. शुरुआती रुझानों ने राज्य के स्थापित राजनीतिक दलों के होश उड़ा दिए हैं. सुपरस्टार विजय की नई पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) ने धमाकेदार एंट्री की है. सुबह 10 बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, टीवीके ने 62 सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. वहीं, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की डीएमके महज 27 सीटों पर सिमटती दिख रही है. यह गिरावट इतनी बड़ी है कि डीएमके अब एडीएमके से भी नीचे तीसरे नंबर पर खिसक गई है. विजय की इस सफलता के पीछे उनके ’10 गारंटी’ वाले घोषणापत्र को सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है. विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं को ध्यान में रखकर किए गए वादों ने साइलेंट वोटर को विजय की ओर मोड़ दिया है.

क्या विजय के ‘सोने के वादे’ ने महिलाओं का दिल जीत लिया?

तमिलनाडु की राजनीति में फ्रीबीज (मुफ्त उपहार) हमेशा से अहम रहे हैं. लेकिन विजय ने इस बार ‘एक संप्रभु’ यानी 8 ग्राम सोने का दांव खेलकर सबको पीछे छोड़ दिया. उनके घोषणापत्र में वादा किया गया है कि 5 लाख से कम आय वाले परिवारों की हर दुल्हन को शादी के लिए 8 ग्राम सोना और एक सिल्क साड़ी मुफ्त दी जाएगी.

इसके साथ ही हर महिला मुखिया को 2,500 रुपये प्रति माह की सहायता राशि का वादा भी गेमचेंजर साबित हुआ है. 85.1 प्रतिशत के भारी मतदान और उसमें महिलाओं की 80 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी ने यह साफ कर दिया कि आधी आबादी ने विजय के इन वादों पर भरोसा जताया है.

फ्री गैस सिलेंडर और बिजली ने कैसे बिगाड़ा डीएमके का खेल?

सत्तारूढ़ डीएमके के खिलाफ एंटी-इंकंबेंसी का फायदा उठाने के लिए विजय ने मध्यम वर्ग की दुखती रग पर हाथ रखा. टीवीके ने हर घर को साल में 6 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त देने का वादा किया है. इसके अलावा, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े दावे किए गए हैं.

विजय ने कहा था कि वह स्टालिन की तरह लोगों को गुमराह नहीं करेंगे. उन्होंने डीएमके और एडीएमके दोनों को एक ही सिक्के के दो पहलू बताया. जनता के बीच यह संदेश गया कि विजय एक ईमानदार प्रशासन दे सकते हैं. यही वजह है कि शुरुआती रुझानों में चेन्नई से लेकर त्रिची तक टीवीके के समर्थकों में जबरदस्त उत्साह दिख रहा है.

तमिलनाडु में किंगमेकर नहीं, किंग बनने की तैयारी में विजय! (फाइल फोटो : पीटीआई)

युवाओं के लिए बेरोजगारी भत्ता और एआई पर फोकस का क्या रहा असर?

विजय ने केवल मुफ्त उपहारों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि युवाओं के लिए ठोस विजन भी पेश किया. स्नातक बेरोजगार युवाओं को 5,000 रुपये प्रति माह और आईटीआई या डिप्लोमा धारकों के लिए इंटर्नशिप की योजना ने युवा वोटर्स को आकर्षित किया.

इसके अलावा, भारत का पहला ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्रालय’ बनाने और तमिलनाडु को एआई कैपिटल बनाने के वादे ने पढ़े-लिखे युवाओं को एक नई उम्मीद दी है. बिना गारंटी के 20 लाख रुपये तक के एजुकेशन लोन के वादे ने उन छात्रों को टीवीके से जोड़ा जो उच्च शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहे थे.

क्या किसानों की कर्ज माफी ने ग्रामीण इलाकों में स्टालिन को पछाड़ा?

तमिलनाडु एक कृषि प्रधान राज्य है और यहां किसानों का वोट बैंक सत्ता की दिशा तय करता है. विजय ने 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के सहकारी बैंक ऋणों को पूरी तरह माफ करने का वादा किया है. इसके साथ ही धान और गन्ने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया गया.

धान के लिए 3,500 रुपये और गन्ने के लिए 4,500 रुपये प्रति क्विंटल का रेट देने के वादे ने ग्रामीण मतदाताओं को टीवीके की ओर खींचा है. शुरुआती रुझानों में ग्रामीण सीटों पर टीवीके की बढ़त यह बताती है कि किसान अब बदलाव के मूड में हैं.

क्या तमिलनाडु में अब द्रविड़ राजनीति का नया दौर शुरू होगा?

विजय ने खुद को एक गंभीर राजनेता के रूप में पेश करने के लिए पेरमबुर और तिरुचिरापल्ली ईस्ट जैसी सीटों से चुनाव लड़कर अपनी ताकत दिखाई है. उन्होंने अपने घोषणापत्र को ‘ईमानदारी का आश्वासन’ बताया है. राज्य में 1.25 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच हो रही यह मतगणना अब एक नए राजनीतिक युग की ओर इशारा कर रही है.

अगर ये रुझान नतीजों में बदलते हैं, तो विजय न केवल स्टालिन की सत्ता छीनेंगे, बल्कि तमिलनाडु में दशकों से चले आ रहे डीएमके-एडीएमके के वर्चस्व को भी खत्म कर देंगे. फिलहाल, टीवीके के खेमे में जश्न का माहौल है और आधव अर्जुन जैसे दिग्गज नेता जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं.

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