Ajab Gajab Shadi Ritual: आज के दौर में जहां शादियां महंगी गाड़ियों और डीजे के शोर से पहचानी जाती हैं. वहीं पहले की शादियों में शहनाई और ढोल नगाड़ों से दूल्हे का स्वागत होता था. यूपी के एक शहर में तो बारात एक दो दिन नहीं बल्कि तीन दिन तक रुकती थी. आज भी बुजुर्ग उन दिनों को याद करते हैं. ऐसी ही परंपरा से एक बुजुर्ग ने लोकल18 को रू ब रू कराया.
टिक्की-चाउमीन नहीं बल्कि इससे होता था स्वागत
गांव के बुजुर्ग माता प्रसाद मिश्रा ने लोकल 18 को सुल्तानपुर की पुरानी परंपरा से रू-ब-रू कराया. उन्होंने बताया कि पुराने समय में बारातियों के स्वागत के लिए आज की तरह फास्ट फूड नहीं होता था बल्कि देशी चीजें परोसी जाती थीं. सुबह के नाश्ते में गुड़ और लाई दी जाती थी, जो उस समय सम्मान का प्रतीक माना जाता था. इसके अलावा चना, मठरी, दही और घर में बनी मिठाइयां भी खिलाई जाती थीं. खाना लकड़ी और उपले के चूल्हे पर बनाया जाता था. कई बार बाराती और घराती मिलकर खाना बनाते थे, जिससे रिश्तों में अपनापन बढ़ता था.
डीजे नहीं शहनाई बजती थी
आज के 30 साल पहले शादी में डीजे की जगह शहनाई, नगाड़ा और लोकगीतों की धुन सुनाई देती थी. महिलाएं रातभर गीत गाती थीं और पूरा माहौल पारंपरिक रंग में डूबा रहता था. उन्होंने कहा कि समय के साथ अब सुल्तानपुर में शादी-विवाह का स्वरूप ही बदल गया है, जहां पहले बारात तीन दिन रुकती थी, वहीं अब कुछ घंटों और एक रात में ही सारी रस्में पूरी हो जाती हैं.
उन्होंने आगे कहा कि पहले लोग रिश्तों और परंपराओं को महत्व देते थे, लेकिन अब शादी में दिखावा बढ़ गया है. कैटरिंग, डीजे, बैंक्वेट हॉल और आधुनिक सजावट ने पारंपरिक व्यवस्थाओं की जगह ले ली है. हालांकि सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन पुराने समय का सामूहिक प्रेम, लोकगीत और गांव की आत्मीयता कहीं न कहीं कम होती दिखाई देती है. यही वजह है कि अब शादियों में प्रदर्शन का भाव ज्यादा रहता है.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें
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