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निजामाबाद में मिट्टी के बर्तनों का व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग करने वाले व्यापारी सुरेश गोंड़ बताते हैं कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही मिट्टी के बने हुए खड़े और बोतल की डिमांड बढ़ जाती है इस साल भी आजमगढ़ के साथ- साथ मऊ, गोरखपुर, बनारस, लखनऊ समेत दिल्ली के व्यापारियों के द्वारा बड़े पैमाने पर इसकी डिमांड की जा रही है जिसे पूरा करना कठिन हो जाता है.

Azamgarh Black Pottery: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की ‘ब्लैक पॉटरी’ (Black Pottery) ने आज न केवल देश में बल्कि सात समंदर पार भी अपनी एक विशेष पहचान बनाई है. निजामाबाद की मिट्टी का जादू कुछ ऐसा है कि यहां के शिल्पकारों के हाथों से बने बर्तन अब लग्जरी लाइफस्टाइल का हिस्सा बन रहे हैं. गर्मी की तपिश शुरू होते ही इन बर्तनों की मांग में जबरदस्त उछाल आया है. विशेष रूप से मिट्टी से बनी बोतलें लोगों की पहली पसंद बन रही हैं. यही वजह है कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के तहत आने वाला यह उद्योग आज सालाना 90 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है, जो स्थानीय अर्थव्यवस्था और शिल्पकारों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.

आजमगढ़ के मिट्टी के बर्तनों का पीएम के क्षेत्र में भी क्रेज
आजमगढ़ जनपद के निजामाबाद में तैयार होने वाले मिट्टी के बर्तन अपनी विशिष्ट निर्माण शैली और मजबूती के लिए जाने जाते हैं. सरकार द्वारा इसे ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना में शामिल करने के बाद से इसकी ब्रांडिंग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई है. वैसे तो यहां के बर्तनों की मांग साल भर बनी रहती है, लेकिन जैसे ही पारा चढ़ना शुरू होता है, मिट्टी के खास उत्पादों की मांग बढ़ जाती है. वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी समेत कई बड़े जनपदों में आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और टेराकोटा उत्पादों का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है.

दिल्ली, लखनऊ और गोरखपुर तक हो रही है सप्लाई
निजामाबाद के शिल्पकारों द्वारा इस समय बड़े पैमाने पर मिट्टी की बोतलों और मटकों की मैन्युफैक्चरिंग की जा रही है. दिलचस्प बात यह है कि इन उत्पादों की मांग केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है. आजमगढ़ से सटे मऊ, गोरखपुर, बनारस और राजधानी लखनऊ के साथ-साथ देश की राजधानी दिल्ली जैसे महानगरों में भी यहां के बर्तनों की भारी सप्लाई हो रही है. व्यापारियों का कहना है कि मांग इतनी अधिक है कि कभी-कभी इसकी पूर्ति करना भी मुश्किल हो जाता है. लोग फ्रिज के ठंडे पानी के बजाय मिट्टी की बोतलों के प्राकृतिक शीतल जल को प्राथमिकता दे रहे हैं.

90 करोड़ का सालाना व्यापार और रोजगार के अवसर
स्थानीय व्यापारी सुरेश गोंड़ के अनुसार, गर्मी के सीजन में रोजाना निजामाबाद से 2 से 3 लोरियां भरकर मिट्टी के बर्तन दूसरे शहरों और राज्यों में भेजे जा रहे हैं. गर्मियों में घड़े और बोतलों की सेल सबसे ज्यादा होती है, जबकि दीपावली के दौरान मिट्टी के दीयों और सजावटी बर्तनों की भारी मांग रहती है. कुल मिलाकर यह पूरा ब्लैक पॉटरी और टेराकोटा उद्योग सालाना तकरीबन 90 करोड़ रुपये का व्यवसाय कर रहा है. इससे न केवल व्यापार बढ़ा है, बल्कि हजारों कारीगरों को अपने ही घर में सम्मानजनक रोजगार भी मिल रहा है.

ओडीओपी ने बदली निजामाबाद की तस्वीर
शिल्पकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओडीओपी योजना ने इस पारंपरिक उद्योग में नई जान फूंक दी है. पहले जहां यह काम सिर्फ स्थानीय स्तर तक सिमटा था, वहीं अब निजामाबाद को ‘ब्लैक पॉटरी हब’ के रूप में पहचान मिली है. काले रंग की चमकदार पॉटरी पर होने वाली बारीक नक्काशी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है. आधुनिक डिजाइनों और सरकारी सहयोग के कारण व्यापारियों को अब मुनाफा भी अधिक हो रहा है और विदेशों से भी ऑर्डर मिल रहे हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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