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कानपुर के दामोदर नगर के दिव्यांग जुड़वां भाई रोहित और राहुल गुप्ता ने मलेशिया में आयोजित इंटरनेशनल डार्ट्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल जीता. 12 देशों के 247 खिलाड़ियों के बीच अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने साबित किया कि मजबूत इरादों के आगे कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती.

कानपुर. अगर इरादे मजबूत हों, तो हालात कभी रास्ता नहीं रोक पाते. इस बात को सच कर दिखाया है कानपुर के दामोदर नगर में रहने वाले दिव्यांग जुड़वां भाई रोहित और राहुल गुप्ता ने. शारीरिक चुनौतियों के बावजूद इन दोनों ने मलेशिया में हुई इंटरनेशनल डार्ट्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए ब्रांज मेडल जीत लिया. 12 देशों से आए 247 खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाना और मेडल हासिल करना कोई आसान काम नहीं था, लेकिन इन भाइयों ने यह कर दिखाया. रोहित और राहुल बचपन से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, लेकिन उन्होंने कभी इसे अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया. दोनों का कहना है कि उन्होंने हमेशा खुद को सामान्य खिलाड़ियों की तरह ही तैयार किया और हर मुकाबले में पूरी ताकत झोंक दी. मलेशिया में भी उन्होंने लगातार अच्छा खेल दिखाते हुए नॉकआउट तक सफर तय किया और आखिरकार ब्रांज मेडल अपने नाम किया.

कानपुर से शुरू हुआ इंटरनेशनल सफर
दोनों भाइयों का यह सफर कानपुर में हुए नेशनल डार्ट्स मुकाबले से शुरू हुआ. 31 जनवरी और 1 फरवरी को हुए इस टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के बाद ही उन्हें इंटरनेशनल मंच पर खेलने का मौका मिला. राहुल बताते हैं, “जब हम मलेशिया पहुंचे, तो थोड़ा नर्वस थे, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़े, हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता गया. रोहित कहते हैं कि डार्ट्स एक ऐसा खेल है, जिसमें ज्यादा संसाधनों की जरूरत नहीं होती, लेकिन फोकस और प्रैक्टिस बेहद जरूरी होती है. यही वजह है कि उन्होंने लगातार अभ्यास कर अपनी पकड़ मजबूत की.

क्रिकेट और शूटिंग में भी आजमा रहे किस्मत
इन दोनों भाइयों की प्रतिभा सिर्फ डार्ट्स तक सीमित नहीं है. नवंबर 2025 में ये श्रीलंका जाकर पैरा क्रिकेट टूर्नामेंट में भी हिस्सा ले चुके हैं और वहां भी अच्छा प्रदर्शन किया. उनका कहना है कि वे हर खेल में खुद को आजमाना चाहते हैं और देश के लिए कुछ बड़ा करना चाहते हैं.

अब यूके फाइनल और 2028 ओलंपिक लक्ष्य
मलेशिया में ब्रांज जीतने के बाद अब इन दोनों की नजर अगस्त में यूके के मैनचेस्टर में होने वाले फाइनल मुकाबले पर है. इसके लिए दोनों ने अभी से कड़ी मेहनत शुरू कर दी है. साथ ही उनका बड़ा सपना 2028 में होने वाले ओलंपिक खेल हैं, जहां वे शूटिंग में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं. इसके लिए वे लगातार ट्रेनिंग कर रहे हैं और खुद को हर दिन बेहतर बनाने की कोशिश में जुटे हैं. रोहित और राहुल की कहानी यह बताती है कि अगर आपके अंदर जुनून और मेहनत करने का जज्बा है, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती. ये दोनों भाई आज उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो मुश्किल हालात में अपने सपनों को छोटा समझ लेते हैं.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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