डी टावर की नौवीं मंजिल पर स्थित फ्लैट नंबर 943 कमल पालीवाल का बताया जा रहा है। निवासी बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों से यहां भव्य इंटीरियर का काम चल रहा था। गैलरी तक में कांच और लकड़ी का काम कराया जा रहा था। हालांकि, पूरी गैलरी कवर करने के प्रयास का पड़ोसियों ने विरोध किया था।
सोसायटी के लोगों के अनुसार, पालीवाल अक्सर कहते थे कि वह इस फ्लैट को रहने से ज्यादा देखने लायक बनवा रहे हैं। अंदर का इंटीरियर किसी राजमहल या प्राचीन मंदिर जैसा प्रतीत होता था। कई बार वहां पूजा-पाठ भी होता था।
महिलाओं ने बताया कि जिस कमरे में हवनकुंड बनाया गया था, वहां अजंता की गुफाओं जैसी लकड़ी की कलाकृतियां तैयार की गई थीं। जानकारी के मुताबिक, इंटीरियर का अधिकांश काम पूरा हो चुका था और इन दिनों सफाई का काम चल रहा था। इसी दौरान फ्लैट में पेंट, थिनर और पॉलिश बड़ी मात्रा में रखी हुई थी। हालांकि, आग लगने के सटीक कारणों की जांच अभी जारी है।
फ्लैट में पेंट, थिनर और पॉलिश बड़ी मात्रा में मौजूद थी। अंदर-बाहर लकड़ी का काम होने के कारण आग तेजी से फैली। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रशासनिक टीम शनिवार को मौके पर पहुंचकर सैंपल भी एकत्र करेगी।-राहुल पाल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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