मशहूर कोरियोग्राफर ने दशकों तक भारतीय सिनेमा के डांस को एक नई भाषा दी. उन्होंने अपने करियर में 2000 से अधिक गानों को कोरियोग्राफ किया और तीन नेशनल अवॉर्ड्स अपने नाम किए. हालांकि, पर्दे के पीछे उनकी जिंदगी संघर्षों से भरी रही. सिर्फ 13 साल की उम्र में खुद से 30 साल बड़े डायरेक्टर से उनकी शादी हो गई. अपने बच्चों को पिता का नाम और बेहतर भविष्य देने के लिए उन्होंने धर्म तक बदल लिया.
नई दिल्ली. सरोज खान बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर थीं. उन्होंने एक दो तीन और डोला रे डोला जैसे गानों को कोरियोग्राफी की और इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई. उनका प्रोफेशनल सफर हर किसी के लिए मिसाल है, लेकिन उनकी निजी जिंदगी दुखों और संघर्षों से भरी रही. बहुत कम लोग जानते हैं कि सरोज खान का जन्म 1948 में मुंबई के एक साधारण परिवार में हुआ था और उनका असली नाम निर्मला नागपाल था. बचपन में ही उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट काम करना शुरू कर दिया था, और वही शुरुआती संघर्ष उनकी हिम्मत की वजह बना.
सरोज खान की शादी बेहद कम उम्र में डांस डायरेक्टर बी सोहनलाल से हो गई थी. कहा जाता है कि उस वक्त उनकी उम्र महज 13 साल थी. सोहनलाल ने उनके गले में एक काला धागा बांध दिया था, जिसे उन्होंने शादी मान लिया था. सोहनलाल उनसे करीब 30 साल बड़े थे, लेकिन सरोज उन्हें ही अपना पति मानती रहीं. शादी के बाद निर्मला ने इस्लाम कुबूल कर लिया और अपना नाम बदलकर सरोज खान रख लिया. उनका यह फैसला पूरी तरह सोहनलाल के साथ उनके रिश्ते से प्रभावित था.
सरोज खान महज 14 साल की थीं जब वह पहली बार मां बनने वाली थीं. इसी दौरान उनके सामने एक कड़वा सच आया कि सोहनलाल पहले से शादीशुदा थे और उनके चार बच्चे भी थे. इस खुलासे के बाद उनकी जिंदगी बिखर गई. इन तमाम मुश्किलों और अजीब हालातों के बावजूद वह सालों तक इस रिश्ते को निभाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन वक्त के साथ मानसिक तनाव और दूरियां बढ़ती गईं.
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हद तो तब हो गई जब सोहनलाल ने सरोज के बच्चों को अपना नाम देने से भी इनकार कर दिया. बीबीसी को दिए एक पुराने इंटरव्यू में अपनी शादी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, ‘उस वक्त मुझे शादी का मतलब तक नहीं पता था. बस एक दिन उन्होंने मेरे गले में काला धागा बांध दिया और मुझे लगा कि हमारी शादी हो गई है.’ आखिरकार दोनों के रास्ते अलग हो गए और सरोज खान ने अकेले दम पर अपने बच्चों की परवरिश करते हुए अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की.
साल 1975 में सरोज खान की जिंदगी में सरदार रोशन खान आए, जिन्होंने उनके सामने शादी का प्रस्ताव रखा. सरोज ने उनके सामने एक शर्त रखी कि उन्हें उनके बच्चों को अपना नाम देना होगा और उन्हें अपनाना होगा. सरदार रोशन खान तैयार हो गए और इसके बाद दोनों ने एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिताई.
अपने दूसरे पति सरदार रोशन खान के साथ सरोज की एक बेटी हुई, जिनका नाम सुकैना खान है. हालांकि, उनका निजी जीवन दुखों से अछूता नहीं रहा. उन्होंने अपनी एक बेटी को तब खो दिया जब वह बहुत छोटी थी. इसके अलावा, उनकी एक और बेटी कुकु का भी 39 साल की उम्र में निधन हो गया. इन तमाम पारिवारिक त्रासदियों ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी.
तमाम संघर्षों और दुखों के बावजूद सरोज खान ने हिंदी सिनेमा में डांस की परिभाषा बदल दी. उन्होंने क्लासिकल डांस और अपने हुनर के जरिए गानों में जान फूंक दी. ‘मिस्टर इंडिया’, ‘तेजाब’ और ‘देवदास’ जैसी फिल्मों में उनके काम ने दर्शकों को ‘एक दो तीन’ और ‘डोला रे डोला’ जैसे कभी न भूलने वाले गाने दिए. उनके काम की बारीकियों और इमोशन्स ने उन्हें बॉलीवुड की सबसे सफल कोरियोग्राफर बनाया.
संजय लीला भंसाली ने एक इंटरव्यू में उनके जुनून का जिक्र करते हुए बताया था कि ‘देवदास के दौरान वह काफी दर्द में थीं, फिर भी जमीन पर लेटकर कोरियोग्राफी करती रहीं. उन्होंने 15 दिनों तक शूटिंग की. फिल्म रिलीज के बाद जब वह अस्पताल में थीं, तो उनका पहला सवाल यही था क्या डोला रे डोला गाने पर दर्शकों ने सिक्के लुटाए?” काम के प्रति ऐसी दीवानगी ही थी जिसने उन्हें ‘मदर ऑफ कोरियोग्राफी’ का दर्जा दिलाया.
सरोज खान ने अपने दशकों लंबे करियर में 2000 से भी ज्यादा गानों को कोरियोग्राफ किया और भारतीय सिनेमा में एक ऐसी विरासत छोड़ी, जिसका कोई मुकाबला नहीं है. खास बात है कि सरोज खान आज के दौर के कोरियोग्राफर्स के लिए भी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बनी हुई है. उनका निधन साल 2020 में कार्डियक अरेस्ट की वजह से हुआ था.
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