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Moradabad News: मुरादाबाद की रजनी ने आर्थिक तंगी को मात देकर ‘इमली टॉफी’ और ‘आंवला कैंडी’ के जरिए खुद को और दर्जनों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है. मां शारदा स्वयं सहायता समूह की ये महिलाएं बिना किसी हानिकारक केमिकल के शुद्ध और प्राकृतिक उत्पाद तैयार कर रही हैं. आज यह समूह न केवल स्थानीय बाजार और स्कूलों में अपनी पहचान बना चुका है, बल्कि हर सदस्य महिला को 10 से 15 हजार रुपये की मासिक आय भी सुनिश्चित कर रहा है.

Moradabad News: कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो बड़ी से बड़ी मुश्किल भी रास्ता छोड़ देती है. मुरादाबाद की रजनी ने इसे सच कर दिखाया है. एक समय था जब पति की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण परिवार पर संकट मंडरा रहा था, लेकिन रजनी ने हार मानने के बजाय ‘इमली टॉफी’ और ‘आंवला कैंडी’ बनाने का छोटा सा कदम उठाया. आज उनका यह छोटा सा प्रयास एक बड़े आंदोलन में बदल चुका है, जो न केवल उन्हें बल्कि उनके साथ जुड़ी दर्जनों महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बना रहा है.

तंगी से आत्मनिर्भरता का सफर
मुरादाबाद की रजनी के लिए शुरुआती सफर आसान नहीं था. घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने के जुनून ने उन्हें नए कार्य की ओर प्रेरित किया. उन्होंने समूह के माध्यम से इमली टॉफी और आंवला कैंडी बनाने का काम शुरू किया. आज स्थिति यह है कि उनके ‘मां शारदा स्वयं सहायता समूह’ से एक दर्जन से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं. यह समूह न केवल स्वरोजगार का जरिया बना है, बल्कि यहां काम करने वाली प्रत्येक महिला हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं.

ऐसे तैयार होते हैं सेहतमंद इमली के लड्डू
समूह की अध्यक्ष रजनी ने बताया कि वे बाजार से शुद्ध इमली खरीदकर लाती हैं. इसे अच्छी तरह साफ करने के बाद इसमें बूरा और अन्य प्राकृतिक चीजों का मिश्रण तैयार किया जाता है, जिससे स्वादिष्ट और शुद्ध इमली के लड्डू तैयार होते हैं. इन लड्डुओं की मांग न केवल स्थानीय बाजार में है, बल्कि स्कूल-कॉलेजों के बच्चे भी इन्हें खूब पसंद कर रहे हैं.

आंवला कैंडी: स्वाद के साथ सेहत का खजाना
समूह द्वारा तैयार की जा रही ‘आंवला कैंडी’ की खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया जाता. रजनी के अनुसार, आंवला को धोकर, सुखाकर और स्टीम करके पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से कैंडी बनाई जाती है.

  • जोड़ों के दर्द में फायदेमंद: यह कैंडी हड्डियों और जोड़ों के दर्द में राहत देती है.
  • आंखों की रोशनी: आंवले के गुणों के कारण यह आंखों के लिए बेहद लाभकारी है.
  • केमिकल मुक्त: बाजार में मिलने वाली टॉफियों के मुकाबले यह बच्चों की सेहत के लिए सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प है.

समूह की महिलाओं के चेहरों पर लौटी मुस्कान
आज इस समूह के माध्यम से 10 से 15 महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. काम का बंटवारा इस तरह किया गया है कि कुछ महिलाएं लड्डू बनाने की जिम्मेदारी संभालती हैं, तो कुछ आंवला कैंडी तैयार करती हैं. बिना किसी मिलावट और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण इन उत्पादों की डिमांड लगातार बढ़ रही है. रजनी का यह समूह अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है, जो घर बैठे स्वरोजगार की तलाश में हैं.

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