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नई दिल्ली. श्रीलंकाई स्पिन दिग्गज मुथैया मुरलीधरन का मानना है कि इंडियन प्रीमियर लीग में स्पिनर गेंद को टर्न करने की कोशिश नहीं कर रहे क्योंकि उन्होंने बचपन से ये कला नहीं सीखी और टूर्नामेंट के दौरान इसे सीखना आसान नहीं है. मुरलीधरन ने कहा कि आजकल स्पिनर गेंद को घुमाने और बल्लेबाज को सोचने पर मजबूर करने की कला नहीं सीखते, उनका ध्यान सिर्फ वेरिएशन से रन रोकने पर रहता है.

टेस्ट क्रिकेट में 800 विकेट लेने वाले मुरलीधरनने  कहा, ‘डोमेस्टिक क्रिकेट में भी स्पिनरों के लिए यही हाल है. जब हम क्रिकेट खेलते थे तो स्पिनर का पहला मकसद गेंद को टर्न करना होता था. आजकल ये जरूरी नहीं है क्योंकि सब टेस्ट क्रिकेट नहीं खेलना चाहते, सब वनडे या टी20 खेलना चाहते हैं.

आउट करने कम बचना चाहते हैं

मुरलीधरन ने बताया कि कम उम्र में ही स्पिनर तेज गेंदबाजी या वेरिएशन पर ध्यान देते हैं, टर्न करने की कोशिश नहीं करते. क्योंकि बचपन से ये आदत नहीं बनती, तो 18-19 साल की उम्र में आकर गेंद को टर्न करना मुश्किल हो जाता है. उन्होंने कहा, ‘जब आप 10-12 साल के होते हैं, तभी से स्पिन करना सीखना चाहिए. हम ऐसे ही सीखे थे.

आज के स्पिनर थ्रो डाउन कराने वाले जैसे 

मुरलीधरन ने कहा कि आईपीएल में स्पिनर के खिलाफ बल्लेबाजी करना थ्रोडाउन स्पेशलिस्ट के खिलाफ प्रैक्टिस जैसा है, बस लाइन में आकर हिट करना होता है. उन्होंने कहा, ‘अगर आप अच्छे स्पिनर हैं और गेंद को टर्न कर सकते हैं तो बल्लेबाज को हराने का मौका है. लेकिन अगर आप टर्न नहीं कर सकते तो बल्लेबाज वैसे ही छक्के मारेंगे जैसे प्रैक्टिस में थ्रोडाउन पर मारते हैं.

हम होते तो गेंद घुमाते भले ही मार पड़ती

मुरलीधरन ने कहा, ‘स्पिन बॉलिंग सिखाना बहुत मुश्किल है, ये खुद से आना चाहिए. लेकिन जब खिलाड़ी प्रोफेशनल लेवल पर आते हैं तो सुधारना मुश्किल हो जाता है.’ जब उनसे पूछा गया कि अगर वो और शेन वॉर्न आज के दौर में खेलते तो क्या करते, मुरलीधरन ने कहा, ‘हम गेंद को टर्न जरूर करते लेकिन ज्यादा फर्क नहीं पड़ता. एक-दो विकेट मिल जाते, लेकिन बल्लेबाज 40 रन आराम से बना लेते क्योंकि पिचें बहुत अच्छी हैं.उन्होंने कहा, ‘शेन वॉर्न भी कमाल के थे क्योंकि वो गेंद को घुमा सकते थे. लेकिन अब खेल बदल गया है, हम पुराने समय से तुलना नहीं कर सकते.

पिच पर सबके लिए मौका होना चाहिए

मुरलीधरन ने कहा कि बैट और बॉल के बीच मुकाबला बराबर करने के लिए सही पिचें बनाना जरूरी है. लेकिन अगर ऐसा हुआ तो दर्शक बोर हो जाएंगे क्योंकि आज के क्रिकेट फैंस सिर्फ चौके-छक्के देखना चाहते हैं. उन्होंने कहा, ‘ये सिर्फ एंटरटेनमेंट है, अभी क्रिकेटर बनाना मकसद नहीं है. ये बड़ा बिजनेस है, स्पॉन्सर वगैरह सब जुड़े हैं.’ मुरलीधरन ने उम्मीद जताई कि एक-दो सीजन में गेंदबाज भी वापसी कर लेंगे.

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