Dollar vs Rupee : भारत के लिए 30 अप्रैल का दिन दोहरी चुनौती वाला रहा. एक तरफ तो भारतीय करेंसी डॉलर के मुकाबले 95 से भी नीचे चली गई और दूसरी ओर क्रूड 122 डॉलर के आसपास दिख रहा है. यह स्थिति अर्थव्यवस्था के लिए दोहरी चुनौती पैदा कर रहा है और महंगाई भी बढ़ा रहा है.
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट लगी है.
ग्लोबल मार्केट में आज ब्रेंट क्रूड का भाव 10 डॉलर से भी ज्यादा बढ़ गया है और 4 साल बाद पहली बार 122 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है. इधर, फॉरेक्स बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर 95.34 पर पहुंच गया है. हालांकि, दोपहर में यह 95.25 पर कारोबार कर रहा था. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, डॉलर के मुकाबले 95.01 पर खुला. फिर 46 पैसे टूटकर 95.34 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. दोपहर के सत्र में घरेलू मुद्रा 37 पैसे फिसलकर 95.25 पर कारोबार कर रही थी.
एक दिन पहले 95 से नीचे था रुपया
फॉरेक्स बाजार में रुपया बुधवार को 20 पैसे कमजोर होकर 94.88 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था. इस बीच, 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.03 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 98.79 पर रहा. इसका मतलब है कि डॉलर भले ही आज रुपये के मुकाबले मजबूत हुआ है, लेकिन अन्य ग्लोबल करेंसी के मुकाबले यह उतना मजबूत नहीं दिख रहा है.
कहां पहुंच गया ब्रेंट क्रूड
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव गुरुवार को 3.46 फीसदी बढ़त के साथ 122.11 डॉलर प्रति बैरल रहा. यह रूस और यू्क्रेन के बीच जारी युद्ध के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. क्रूड के दाम बढ़े तो डॉलर को भी मजबूती मिली, क्योंकि दुनिया में ज्यादातर क्रूड का लेनदेन डॉलर में ही होता है. अब डॉलर अगर मजबूत हो रहा है तो अन्य करेंसी कमजोर होंगी ही. इसका असर शेयर बाजार में भी दिखा है, जहां विदेशी निवेशकों ने 2,468 करोड़ रुपये निकाल लिए क्योंकि उन्हें यह रकम अमेरिकी बॉन्ड में डालनी हैं.
क्यों दोहरे चक्र में फंस गया भारत
भारत के लिए यह स्थिति दोहरे चक्र वाली है, क्योंकि एक तो हम अपनी जरूरत का 85 फीसदी क्रूड बाहर से खरीदते हैं और दूसरा कि इसे खरीदने के लिए पहले रुपये से डॉलर खरीदते हैं और फिर उस डॉलर से तेल. जाहिर है कि इस दोहरे चक्र का सारा बोझ हमारी अर्थव्यवस्था को उठाना पड़ता है. क्रूड 120 डॉलर तो सिर्फ दिखता है, हमें यह कीमत 150 डॉलर से भी ज्यादा चुकानी पड़ेगी. उसके लिए रुपया खर्च करना पड़ेगा, जो डॉलर के मुकाबले बेहद कमजोर हो गया है. इसमें कोई दो राय नहीं कि अगर यह स्थिति जल्द नहीं सुधरती है तो देश में महंगाई भी बढ़ सकती है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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