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-गैस सिलेंडर की किल्लत और महंगाई से श्रमिकों का तेजी से पलायन
-निर्माण परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित, बिल्डरों और कारोबारियों में बढ़ी बेचैनी
-व्यापारी एकता समिति संस्थान ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठाई

उदय भूमि संवाददाता
दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र इन दिनों एलपीजी गैस संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिसका असर अब आम जीवन से निकलकर सीधे रियल एस्टेट सेक्टर पर दिखाई देने लगा है। व्यापारी एकता समिति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि एलपीजी सिलेंडर की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण बड़ी संख्या में श्रमिक शहर छोड़कर अपने गृह राज्यों की ओर लौट रहे हैं, जिससे निर्माण उद्योग के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रदीप गुप्ता के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में चल रहे अधिकांश रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स इस समय श्रमिकों की कमी से जूझ रहे हैं। निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के पलायन का मुख्य कारण घरेलू गैस की अनुपलब्धता और कालाबाजारी बताया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मजदूरों को अपनी बुनियादी जरूरत यानी खाना बनाने के लिए गैस ही उपलब्ध नहीं हो पा रही, तो उनके लिए शहर में रहना आर्थिक रूप से संभव नहीं रह जाता।

उन्होंने बताया कि एलपीजी सिलिंडर सामान्य दरों पर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और कई स्थानों पर कालाबाजारी के चलते गैस महंगे दामों पर बेची जा रही है। इससे मजदूरों का दैनिक खर्च अचानक बढ़ गया है। कम आय वाले श्रमिकों के लिए यह स्थिति असहनीय बन गई है और वे मजबूर होकर काम छोड़कर अपने गांव लौट रहे हैं। इसका सीधा असर निर्माण गतिविधियों पर पड़ रहा है। प्रदीप गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर पहले ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था और अब एलपीजी संकट ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। श्रमिकों की कमी के कारण निर्माण कार्य धीमे पड़ गए हैं, जिससे परियोजनाओं की समय पर डिलीवरी प्रभावित होने लगी है। यदि यही स्थिति बनी रही तो कई परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा से पीछे जा सकती हैं, जिसका असर निवेशकों, खरीदारों और डेवलपर्स सभी पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (क्रेडाई) ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समस्या के समाधान की मांग की है।

उद्योग संगठनों का मानना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो निर्माण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं और रोजगार पर भी व्यापक असर पड़ेगा। व्यापारी एकता समिति संस्थान का कहना है कि एलपीजी संकट केवल घरेलू समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह अब औद्योगिक और आर्थिक संकट का रूप लेता जा रहा है। निर्माण क्षेत्र लाखों श्रमिकों और छोटे व्यापारियों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। श्रमिकों के पलायन से निर्माण सामग्री आपूर्ति, ठेकेदारों का कामकाज और संबंधित सहायक उद्योग भी प्रभावित हो रहे हैं। प्रदीप गुप्ता ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तत्काल प्रभाव से विशेष व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करने और श्रमिक क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर सिलिंडर उपलब्ध कराने की मांग की।

उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो रियल एस्टेट सेक्टर में आर्थिक नुकसान के साथ-साथ रोजगार संकट भी गहराने की आशंका है। उन्होंने कहा कि दिल्ली-एनसीआर देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां निर्माण कार्यों की गति धीमी पडऩा पूरे क्षेत्रीय विकास को प्रभावित कर सकता है। इसलिए प्रशासन, गैस एजेंसियों और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय बनाकर समस्या का स्थायी समाधान निकालना आवश्यक है। प्रदीप गुप्ता ने अंत में कहा कि श्रमिक किसी भी निर्माण उद्योग की रीढ़ होते हैं। यदि उनकी मूलभूत जरूरतें पूरी नहीं होंगी तो विकास कार्य प्रभावित होना स्वाभाविक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार शीघ्र प्रभावी कदम उठाकर गैस संकट को दूर करेगी ताकि श्रमिक वापस काम पर लौट सकें और रियल एस्टेट सेक्टर की रफ्तार फिर से सामान्य हो सके।

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