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China Import : भारत का कुछ सामान के लिए चीन पर हद से ज्‍यादा निर्भरता घातक हो सकती है. सरकार के थिंक टैंक जीटीआरआई ने बताया है कि फैक्‍ट्री उत्‍पादन से जुड़े सेक्‍टर के ज्‍यादातर कच्‍चे माल की आपूर्ति आज भी चीन से हो रही है. भारत को इसमें विविधता लाने की जरूरत है.

सरकार के थिंक टैंक की चेतावनी- चीन के साथ आफत मोल ले रहा भारतZoom

कच्‍चे माल के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बढ़ती जा रही है.

नई दिल्‍ली. एक तरफ तो भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी चल रही है तो दूसरी ओर चीन से सामान की सप्‍लाई भी बढ़ती जा रही है. ऐसे में भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने और दुनिया की दूसरी फैक्‍ट्री के तौर पर पेश करने के लक्ष्‍य पर संकट दिखने लगा है. यह चिंता सरकार के थिंक टैंक जीटीआरआई ने जताई है. शोध संस्‍थान ने मंगलवार को कहा कि भारत के कुल आयात में चीन की हिस्सेदारी लगभग 16 फीसदी है, लेकिन औद्योगिक वस्तुओं में उसका दबदबा काफी अधिक है. भारत के 30.8 फीसदी औद्योगिक माल की आपूर्ति चीन से होती है.

वित्तवर्ष 2025-26 में देश का आयात बढ़कर 774.98 अरब डॉलर हो गया. इसमें से 131.63 अरब डॉलर का आयात चीन से किया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि महत्वपूर्ण कच्चे माल के लिए एक ही आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता से दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्र किसी भी व्यवधान के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं. जीटीआरआई के विश्लेषण में कहा गया कि चीन से भारत के आयात का लगभग 66 फीसदी हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, कंप्यूटर और कार्बनिक रसायनों से संबंधित है. भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स आयात में चीन की हिस्सेदारी 43 फीसदी, मशीनरी और कंप्यूटर आयात में 40 फीसदी और कार्बनिक रसायनों में 44 फीसदी है.

कच्‍चे माल की निर्भरता चिंताजनक
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि ये कोई वैकल्पिक खरीदारी नहीं है, बल्कि मुख्य कच्चा माल है, जो सीधे भारत के विनिर्माण परिवेश को आगे बढ़ाता है. उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग इलेक्ट्रॉनिक्स कलपुर्जों, ईवी बैटरी, सोलर मॉड्यूल, एपीआई और विशेष रसायन जैसे कच्चे माल के लिए चीन पर बहुत अधिक निर्भर है.

निर्यात बढ़ने पर भी जोखिम
श्रीवास्तव ने कहा कि भले ही भारत निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसकी आपूर्ति श्रृंखला चीन से जुड़ी हुई है. यह स्पष्ट जोखिम पैदा करता है. जीटीआरआई ने सुझाव दिया कि भारत को प्रमुख क्षेत्रों में घरेलू क्षमता बनाने और अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता है. सिर्फ चीन से ही सारा सामान खरीदना उद्योग जगत के हित में नहीं है. भारत को अन्‍य देशों से भी कच्‍चे माल की आपूर्ति करनी होगी, ताकि चीन के साथ किसी आपात स्थिति में फैक्‍ट्री उत्‍पादन ज्‍यादा प्रभावित न हो.

चीन से कितना आयात
भारत ने पिछले वित्‍तवर्ष में चीन से करीब 131.63 अरब डॉलर यानी करीब 11 लाख करोड़ रुपये का आयात किया था. इसमें सबसे ज्‍यादा 50 अरब डॉलर का आयात इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स और मशनरी वाले सामान का था. इसके बाद 20 से 25 अरब डॉलर का आयात प्‍लास्टिक्‍स व कार्बनिक रसायनों का रहा. ईवी बैटरी, कंप्‍यूटर के पुर्जे, दूरसंचार उपकरणों आदि का आयात भी काफी ज्‍यादा रहा है. सोलर मॉड्यूल के लिए तो आज भी चीन पर ही हमारी निर्भरता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

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