Image Slider


भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच बीते कल दिल्ली में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में सेब बागवानों की चिंताएं बढ़ा दी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता एवं ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कहा कि इस एग्रीमेंट के बाद न्यूजीलैंड के सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 50 फीसदी से घटाकर 25 प्रतिशत रह जाएगी। राठौर ने कहा- बेशक पहले साल में यह कोटा 32,500 मीट्रिक टन (लगभग 20 kg के 16,25,000 बॉक्स) से शुरू होता है, लेकिन छठे साल तक यह बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (लगभग 22,50,000 बॉक्स) हो जाएगा। यह सेब अप्रैल से अगस्त दौरान भारत के बाजार में आएगा। इसकी मार पहले निचले क्षेत्रों के सेब बागवानों को पड़ेगी। सीजन की शुरुआत से पहले ही विदेशी सेब के आने से बाजार गिर जाएगा और इसका असर पूरे सीजन पर रहेगा। राठौर ने कहा- न्यूज़ीलैंड की सेब इंडस्ट्री में प्रोडक्टिविटी बहुत ज्यादा है, मॉडर्न बागों में प्रति हेक्टेयर 50-70 टन (लगभग 2,500 से 3,500 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) पैदावार होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में एवरेज प्रोडक्टिविटी मात्र 7-8 टन प्रति हेक्टेयर (लगभग 350 से 400 बॉक्स प्रति हेक्टेयर) है। इस वजह से हिमाचल में इनपुट कॉस्ट न्यूजीलैंड समेत दूसरे देशों से भी कहीं ज्यादा है। ऐसे में विदेशी सेब के भारतीय बाजार में आने से राज्य के बागवानों को उचित दाम नहीं मिलेगे। 2.5 लाख परिवार सेब पर डिपेंडेंट: राठौर कुलदीप राठौर ने कहा- भारत का सेब सेक्टर, जो हिमालयी बेल्ट में फैला हुआ है, बड़ी ग्रामीण इकॉनमी को सपोर्ट करता है। जम्मू और कश्मीर लगभग 76-77% प्रोडक्शन के साथ सबसे आगे है, उसके बाद हिमाचल प्रदेश लगभग 21-22% के साथ दूसरे नंबर पर है। अकेले हिमाचल में 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर से ज़्यादा ज़मीन पर सेब की खेती होती है और लगभग 2.5 लाख परिवार इस पर डिपेंडेंट हैं। केंद्र की किसान विरोधी नीतियों से किसान परेशान सेब राज्य की हॉर्टिकल्चर इनकम का लगभग 80% हिस्सा देते हैं। मगर केंद्र की किसान विरोधी नीतियों ने सेब उत्पादकों को चिंताएं बढ़ा दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने सेब पर इम्पोर्ट ड्यूटी 150 फीसदी करने का भरोसा हिमाचल के बागवानों को दिया था। पीएम ने अब तक इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा पूरा तो नहीं किया, लेकिन इसे कम जरूर किया है। CA स्टोर में रखे सेब पर भी मार पड़ेगी राठौर ने कहा कि न्यूजीलैंड के सेब की ज्यादा मार CA (वातानुकुलित) स्टोरेज से निकलने वाले सेब पर पड़ने वाली है। उन्होंने बताया कि यह एग्रीमेंट स्वदेसी सेब की इंडस्ट्री को तबाह करेगा। उन्होंने केंद्र सरकार से इम्पोर्ट कोटा और कीमतों की कड़ी निगरानी करने, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने, किसानों को मॉडर्न टेक्नोलॉजी मुहैया कराने और आगे कोई भी बदलाव करने से पहले किसानों से सलाह लेने की मांग की है।

———-

🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।

 

Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||