Last Updated:
Jalor Agriculture News: राजस्थान के जालोर जिले में भीषण लू और 45°C पार पारे के बावजूद खेती की चमक बरकरार है. यहाँ के किसानों ने कम पानी वाली फसलों को अपनाकर हीट वेव को चुनौती दी है. इस समय खेतों में जायद बाजरा, खजूर और अनार जैसी फसलें लहलहा रही हैं, जो कम नमी में भी बेहतर उत्पादन दे रही हैं. टपक सिंचाई और इजरायली तकनीक के इस्तेमाल से किसान भीषण गर्मी में भी अपनी उम्मीदों को हरा-भरा रखे हुए हैं. जालोर का यह कृषि मॉडल अब प्रदेश के अन्य सूखाग्रस्त इलाकों के लिए प्रेरणा बन गया है.
मूंगफली की खेती भी जालोर में तेजी से बढ़ रही है, क्योंकि यह फसल हल्की मिट्टी और गर्म मौसम में अच्छी पैदावार देती है. कम सिंचाई में भी यह फसल तैयार हो जाती है और बाजार में इसके दाम भी बेहतर मिलते हैं. तेल उत्पादन के साथ-साथ यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद करती है, जिससे अगली फसलों को फायदा मिलता है.
जायद सीजन में उगाया जाने वाला बाजरा जालोर की गर्म और शुष्क जलवायु के लिए बेहद उपयुक्त फसल है. यह कम पानी में भी आसानी से तैयार हो जाता है और तेज गर्मी व लू को सहन करने की क्षमता रखता है. कम लागत और कम समय में उत्पादन होने के कारण यह किसानों के लिए सुरक्षित विकल्प बन रहा है. साथ ही, इसका उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाता है, जिससे किसानों को दोहरा लाभ मिलता है.
अनार की खेती जालोर में बागवानी के क्षेत्र में नई पहचान बना रही है. यह फसल गर्म और सूखे वातावरण में भी अच्छी तरह फलती-फूलती है. ड्रिप सिंचाई के जरिए कम पानी में भी इसकी खेती संभव है. अनार का बाजार मूल्य ऊंचा होने के कारण यह किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
खजूर की खेती जालोर जैसे रेगिस्तानी इलाके के लिए बेहद उपयुक्त मानी जा रही है. यह फसल अत्यधिक गर्मी और कम पानी में भी आसानी से तैयार हो जाती है. आधुनिक तकनीकों और ड्रिप सिंचाई के उपयोग से किसान अच्छी गुणवत्ता के खजूर का उत्पादन कर रहे हैं. इसकी मांग देश और विदेश दोनों में होने के कारण यह भविष्य की लाभकारी फसल के रूप में उभर रही है.
ग्वार की फसल जालोर में नकदी फसल के रूप में उभर रही है. यह कम पानी में उगती है और गर्मी को आसानी से सहन कर लेती है. ग्वार से निकलने वाला गम औद्योगिक उपयोग में आता है, जिससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसकी मांग होने के कारण यह किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही है.
मोठ एक पारंपरिक दलहनी फसल है, जो रेगिस्तानी इलाकों में आसानी से उगाई जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत कम पानी में भी जीवित रह सकती है. भीषण गर्मी और सूखे में भी इसकी पैदावार बनी रहती है, जिससे किसानों को जोखिम कम रहता है. प्रोटीन से भरपूर होने के कारण बाजार में इसकी मांग भी अच्छी रहती है.
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



