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-नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा से पहले ही सदन में गरमाया माहौल
-कोरम पूरा न होने से देर से शुरू हुई बैठक, तीखी नोकझोंक से बाधित रही कार्यवाही
– सत्ता-विपक्ष आमने-सामने, महिला आरक्षण कानून पर पक्ष-विपक्ष में जोरदार बहस

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम की सोमवार को आयोजित बोर्ड बैठक हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी राजनीतिक नोकझोंक के चलते जंग के अखाड़े में तब्दील हो गई। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए बुलाई गई बैठक उस समय विवादों में घिर गई, जब महापौर सुनीता दयाल की एक टिप्पणी पर भाजपा पार्षद राजीव शर्मा सदन के भीतर ही धरने पर बैठ गए। नगर निगम सभागार में सुबह 11 बजे बोर्ड बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन पार्षदों का कोरम पूरा न होने के कारण बैठक करीब आधा घंटा देरी से शुरू हो सकी। महापौर ने वंदे मातरम गान के साथ बैठक की औपचारिक शुरुआत कराई। बैठक में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक, अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर यादव, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, सहायक नगर आयुक्त पल्लवी सिंह, चीफ इंजीनियर एन.के. चौधरी, उद्यान प्रभारी डॉ अनुज कुमार सिंह सहित निगम के वरिष्ठ अधिकारी और 50 से अधिक पार्षद मौजूद रहे। बैठक की कार्यवाही शुरू होते ही माहौल गरमा गया। नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने नामित पार्षदों को सम्मान न मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि नामित पार्षदों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इस पर महापौर ने विषय को बाद में लेने की बात कही, जिस पर कई पार्षदों ने आपत्ति जताई और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया।

विवाद उस समय चरम पर पहुंच गया जब चर्चा के दौरान महापौर ने भाजपा पार्षद राजीव शर्मा को टोकते हुए “बकवास बंद करो” कह दिया। इस टिप्पणी से नाराज राजीव शर्मा तुरंत अपनी सीट से उठे और नगर निगम अधिनियम की पुस्तक हाथ में लेकर महापौर के सामने धरने पर बैठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर को इस तरह की भाषा इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं है और सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। पार्षद के धरने पर बैठते ही सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। कई पार्षद उनके समर्थन में खड़े हो गए, जबकि कुछ पार्षदों और अधिकारियों ने बीच-बचाव कर स्थिति संभालने की कोशिश की। काफी देर तक चली समझाइश के बाद पार्षद अपनी सीट पर लौटे, लेकिन तब तक सदन की कार्यवाही प्रभावित हो चुकी थी।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर भी सत्ता और विपक्ष आमने-सामने दिखाई दिए। कांग्रेस पार्षद अजय शर्मा ने अधिनियम और परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सरकार की मंशा पर टिप्पणी की और इसे राजनीतिक लाभ से जोड़कर देखा। वहीं भाजपा पार्षद शीतल देओल ने कानून का समर्थन करते हुए इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया और विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। बैठक के दौरान नामित पार्षदों ने भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य अनावश्यक राजनीतिक बहस नहीं बल्कि शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। हालांकि इस बयान पर भी सदन में बहस छिड़ गई और पार्षदों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। लगातार हंगामे और नोकझोंक के बीच निगम बोर्ड बैठक किसी तरह आगे बढ़ी, लेकिन पूरे समय राजनीतिक तनाव का माहौल बना रहा। सोमवार की यह बैठक नगर निगम की राजनीति में बढ़ती तल्खी और अंदरूनी खींचतान का खुला प्रदर्शन बनकर सामने आई।

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