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Agriculture News: आम की बागवानी किसानों के लिए एक ऐसी खेती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी कमाई का जरिया बनती है. रामपुर के किसान पूरनलाल इसका जीता-जागता उदाहरण हैं, जिन्होंने 20 साल पहले दशहरी और लंगड़ा आम के जो पौधे लगाए थे, वे आज उन्हें हर सीजन लाखों का मुनाफा दे रहे हैं. आम का एक पेड़ 30 से 40 साल तक फल देता है और सही देखभाल मिले तो एक पेड़ से 5000 रुपये तक की बचत हो जाती है. पूरनलाल के 3 एकड़ के बाग में 100 से ज्यादा पेड़ हैं, जो उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना रहे हैं.
रामपुर: खेती-किसानी में कुछ फसलें ऐसी होती हैं जिनमें मेहनत एक बार लगती है लेकिन मुनाफा सालों-साल मिलता रहता है. आम की बागवानी भी कुछ ऐसी ही है. रामपुर के किसान पूरनलाल पिछले 20 सालों से आम के बाग से शानदार कमाई कर रहे हैं. उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर तकनीक और सोच समझ के साथ बाग तैयार किया जाए, तो यह किसी सरकारी नौकरी या बड़े बिजनेस से कम नहीं है.
पूरनलाल ने करीब दो दशक पहले अपने 3 एकड़ के खेत में आम के पौधे लगाए थे. आज उनके बाग में दशहरी और लंगड़ा आम के 100 से भी ज्यादा बड़े पेड़ हैं. पूरनलाल का कहना है कि आम का पेड़ एक ‘लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट’ की तरह है. शुरुआत के 4-5 साल अगर पेड़ों की अच्छे से देखभाल कर ली जाए, तो फिर अगले 30 से 40 सालों तक ये पेड़ फल देते रहते हैं.
एक पेड़ से 5000 तक की बचत
कमाई का पूरा फॉर्मूला समझाते हुए पूरनलाल बताते हैं कि एक विकसित पेड़ एक सीजन में करीब 1 से 2 क्विंटल फल देता है. बाजार में आम की मांग हमेशा रहती है और रेट भी 20 रुपये से लेकर 60 रुपये प्रति किलो तक मिल जाते हैं. अगर सिंचाई, खाद और मजदूरी का सारा खर्चा निकाल भी दिया जाए, तो एक पेड़ से किसान को आराम से 3000 से 5000 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है. इस हिसाब से 100 पेड़ों वाले बाग से हर साल लाखों की कमाई पक्की है.
पूरनलाल ने अपने बाग में दो अलग-अलग किस्में लगाई हैं, जिससे उनकी बिक्री लंबे समय तक चलती है. जून के शुरुआत में ‘दशहरी’ आम तैयार हो जाता है, जो अपनी मिठास के लिए मशहूर है. जैसे ही दशहरी का सीजन खत्म होने लगता है, ‘लंगड़ा’ आम बाजार में आ जाता है जो जुलाई के अंत तक चलता है. इस तरह किसान को डेढ़ से दो महीने तक लगातार आम बेचने का मौका मिलता है.
अच्छी क्वालिटी के आम की पहचान इतनी है कि पूरनलाल को फल बेचने के लिए मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ते. व्यापारी खुद उनके बाग तक पहुंचते हैं और पेड़ों पर लगे फल देखकर सीधे खरीदारी कर लेते हैं. उत्तर प्रदेश में इन दोनों किस्मों की भारी डिमांड रहती है, जिससे किसानों को दाम भी अच्छे मिलते हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
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