अगर आप जंगल सफारी, बाघों का दीदार और प्रकृति के बीच रोमांचक सफर का सपना देख रहे हैं, तो उत्तर प्रदेश का दुधवा नेशनल पार्क आपके लिए शानदार जगह हो सकता है. लखीमपुर खीरी जिले में स्थित यह टाइगर रिजर्व बाघ, हाथी, भालू, गैंडा और कई दुर्लभ वन्यजीवों के लिए जाना जाता है. खास बात यह है कि अब लखनऊ के कैसरबाग बस स्टैंड से सीधी बस सेवा के जरिए बेहद कम खर्च में यहां पहुंचा जा सकता है. नवंबर से 15 जून तक खुलने वाला यह पार्क हर साल देश-विदेश से हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में देश-विदेश से सैलानी वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं. यह नेशनल पार्क बाघ, तेंदुआ, गैंडा, हाथी, भालू और हिरण जैसे कई दुर्लभ वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध है. यहां आने वाले पर्यटक जंगल सफारी के दौरान इन जानवरों को करीब से देखने का रोमांचक अनुभव लेते हैं. सैलानियों के लिए दुधवा नेशनल पार्क नवंबर महीने में खोल दिया जाता है, जबकि 15 जून तक यहां घूमने और वन्यजीवों का दीदार करने का मौका मिलता है. हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक दुधवा टाइगर रिजर्व पहुंचते हैं और जंगल की प्राकृतिक सुंदरता के साथ वन्यजीवों का आनंद उठाते हैं.
दुधवा नेशनल पार्क में कई ऐसे जानवर पाए जाते हैं, जो बेहद दुर्लभ हैं और बहुत कम दिखाई देते हैं. यहां एशियन पाम सिवेट समेत बिलाव की तीन प्रजातियां पाई जाती हैं. यह एक ऐसा जीव है, जो आमतौर पर सैलानियों को नजर नहीं आता. यह बिलाव की एक प्रजाति है, जो पेड़ों पर रहना पसंद करती है. दिन के उजाले में बाहर निकलने से यह परहेज करता है, इसलिए इसे देख पाना काफी मुश्किल होता है. यह जीव अक्सर रात के समय ही सक्रिय नजर आता है.
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में इंडियन सिवेट, स्मॉल सिवेट और बिग सिवेट जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं. यह बिलाव दुधवा के जंगलों के अलावा नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के वन क्षेत्रों में भी मिलते हैं. ये घने जंगलों में पेड़ों पर रहना पसंद करते हैं. इस प्रजाति के बिलाव सूर्यास्त के बाद भोजन की तलाश में निकलते हैं. यह सर्वाहारी होते हैं और फल, छोटे जीव-जंतु व अन्य चीजें खाते हैं. वैसे तो इंसानों के लिए आमतौर पर खतरा नहीं होते, लेकिन उकसाने पर हमला भी कर सकते हैं.
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इंडियन सिवेट बिलाव दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में पाया जाता है. यह घने जंगलों, झाड़ियों और कभी-कभी रिहायशी इलाकों के आसपास भी नजर आता है. ये एकांतप्रिय स्वभाव के होते हैं और रात में शिकार करना पसंद करते हैं. इनका मुख्य भोजन चूहे, मेंढक, सांप, छोटे पक्षी, अंडे और फल होते हैं. स्मॉल इंडियन सिवेट को ‘लीस्ट कंसर्न’ यानी चिंता मुक्त श्रेणी में रखा गया है, जबकि मालाबार सिवेट बेहद दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों में गिना जाता है. भारतीय सिवेट का वजन लगभग 3.4 से 9.2 किलोग्राम तक होता है और इसकी लंबी पूंछ पर काले-सफेद छल्ले बने होते हैं.
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में स्मॉल सिवेट भी पाई जाती है. खास बात यह है कि स्मॉल सिवेट भारत के अलावा दक्षिण-पूर्व एशिया में भी मिलती है. यह एक दुर्लभ निशाचर स्तनधारी जीव है, जो रात के समय अधिक सक्रिय रहता है. यह 50 से 70 सेंटीमीटर लंबा (पूंछ के बिना) होता है. दिखने में बिल्ली जैसा लगता है, लेकिन उससे अलग प्रजाति का जीव है. यह मुख्य रूप से वनों, झाड़ियों और कभी-कभी रिहायशी इलाकों के पास पेड़ों पर या जमीन पर रहता है. इसका भोजन फल, कीड़े-मकोड़े, छोटे स्तनधारी और पक्षी होते हैं.
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में बिग सिवेट बिलाव भी पाया जाता है. यह आकार में काफी बड़ा होता है. इसकी पहचान शरीर पर मौजूद धब्बों और पूंछ पर काली-सफेद धारियों से होती है. यह आमतौर पर रात में सक्रिय रहने वाला जीव है और जमीन पर रहना पसंद करता है, हालांकि पेड़ों पर भी आसानी से चढ़ सकता है. यह सर्वाहारी होता है, जो छोटे स्तनधारियों, पक्षियों, अंडों, कीड़ों और फलों को खाता है. यह जीव नेपाल, भूटान, पूर्वोत्तर भारत की पूर्वी हिमालयी दक्षिणी ढलानों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्रों में पाया जाता है.
दुधवा नेशनल पार्क बाघों के लिए खास पहचान रखता है. यही वजह है कि देश-विदेश से सैलानी यहां वन्यजीवों का दीदार करने पहुंचते हैं. दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों के साथ-साथ किशनपुर सेंचुरी रेंज में भी बाघों के दर्शन होते हैं. यह ऐसा नेशनल पार्क है, जहां पर्यटकों को बाघ, भालू और हाथी जैसे वन्यजीव आसानी से देखने को मिल जाते हैं. हर साल बड़ी संख्या में देश-विदेश से सैलानी यहां पहुंचते हैं और जंगल सफारी का आनंद लेते हैं. अगर संख्या की बात करें, तो यहां बाघों की संख्या डेढ़ सौ से अधिक बताई जा रही है. लगातार बाघों की संख्या में इजाफा भी हो रहा है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है.
अगर आप भी दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में पहुंचकर वन्यजीवों का दीदार करना चाहते हैं, तो लखनऊ से रोडवेज बस के माध्यम से दुधवा नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं. कैसरबाग बस स्टैंड से दुधवा नेशनल पार्क के लिए सीधी बस सेवा शुरू की गई है. ऐसे में 487 रुपये में आप दुधवा पहुंच सकते हैं. दुधवा नेशनल पार्क पहुंचकर आप जंगल सफारी का आनंद ले सकते हैं और कई तरह के वन्यजीवों का दीदार कर सकते हैं.
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