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बात जेपी आंदोलन के समय की है। बिहार में आंदोलन चरम पर था। मैं जेपी के साथ बिहार घूम रहा था। आंदोलन के दौरान उनपर लाठी चार्ज हुआ था लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री ने इसका खंडन कर दिया। अगले ही दिन एक अखबार के पहले पन्ने पर लाठीचार्ज की तस्वीर देखकर गृहमंत्री को संसद में माफी मांगनी पड़ी। यह बातें समय को फ्रेम-दर-फ्रेम संजोने के लिए मशहूर रहे छायाकार रघु राय ने एक साक्षात्कार में साझा की थीं। 

भारत की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों को अपनी पारखी नजर से रघु राय ने अपने कैमरे में ऐसे पल संजोए जो इतिहास की दिशा तक बदल देने का माद्दा रखते थे। उन्हीं में से एक तस्वीर जयप्रकाश नारायण पर हुए लाठीचार्ज की थी, जो सिर्फ एक दृश्य नहीं, बल्कि सत्ता के दावों को चुनौती देने वाला दस्तावेज बन गई थी।  रघु राय उस घटनाक्रम के चश्मदीद गवाह थे। जेपी पर पटना की सड़कों पर जिस दिन लाठी  प्रहार हुआ, उस वक्त रघु राय उसी जीप में चालक के पास लटके हुए इस घटनाक्रम को कैमरे में कैद कर रहे थे।

संसद में बोला झूठ फिर तस्वीर पर घिरी सरकार 

संसद का सत्र चल रहा था। तस्वीर सामने आते ही हड़कंप मच गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस दृश्य से विचलित थे। तत्कालीन गृह मंत्री ब्रह्मानंद रेड्डी, जिन्होंने पहले लाठीचार्ज से इनकार किया था, उसी तस्वीर के सामने घिर गए। हालात ऐसे बने कि उन्हें संसद में माफी मांगनी पड़ी। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं थी, सच की वह गवाही थी, जिसने सत्ता के बयान को झुठला दिया। उस एक फ्रेम ने यह साबित कर दिया कि कैमरा जब ईमानदारी से देखता है, तो वह इतिहास लिखने की ताकत भी रखता है।

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