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सनी देओल के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक ‘घायल’ को लेकर एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है. मौसमी चटर्जी ने फीस की वजह से इस फिल्म में काम करने से साफ इनकार कर दिया था. जब सनी देओल और मेकर्स की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं, तब खुद धर्मेंद्र को बीच में आना पड़ा. उन्होंने मौसमी के घर जाकर न केवल उन्हें मनाया, बल्कि उनकी शर्तों को भी सम्मान के साथ स्वीकार किया. धर्मेंद्र के इसी हस्तक्षेप ने फिल्म की कास्टिंग को मुमकिन बनाया.

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सनी देओल की फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने इस हीरोइन को मनाया था.

नई दिल्ली. मौसमी चटर्जी अपने दौर की टॉप हीरोइनों में से एक रही हैं. उन्होंने लगभग बड़े हीरो के साथ काम किया और बड़े पर्दे पर अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. मौसमी चटर्जी ‘अंगूर’, ‘अनुराग’ और ‘रोटी कपड़ा और मकान’ जैसी यादगार फिल्मों का हिस्सा रही हैं. 90 के दशक में आई सनी देओल की सुपरहिट फिल्म घायल में भी उनका अहम रोल था, लेकिन इस फिल्म से उनके जुड़ने का एक दिलचस्प किस्सा है.

‘घायल’ सनी देओल के करियर की सबसे बड़ी फिल्म साबित हुई, पर इसे बनाने की राह आसान नहीं थी. धर्मेंद्र ने खुद मोर्चा संभाला था ताकि फिल्म बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके. फिल्म की कास्टिंग के दौरान बात तब बिगड़ गई, जब मेकर्स ने मौसमी चटर्जी की फीस कम करने की कोशिश की. मौसमी को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई. खुद सनी देओल, प्रोड्यूसर पहलाज निहलानी और डायरेक्टर राजकुमार संतोषी ने उन्हें मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन मौसमी अपनी बात पर अड़ी रहीं और उन्होंने फिल्म करने से साफ मना कर दिया.

धर्मेंद्र ने मौसमी चटर्जी को मनाया था

जब बात हाथ से निकलती दिखी, तो खुद धर्मेंद्र ने मोर्चा संभालने का फैसला किया. मौसमी बताती हैं कि एक दिन अचानक धर्मेंद्र को अपने दरवाजे पर खड़ा देख वह दंग रह गई थीं. मौसमी का घर कभी फिल्मी अड्डा नहीं रहा था, इसलिए सुपरस्टार को यूं बिना बताए घर आया देख वह हैरान थीं. धर्मेंद्र अपने बेटों सनी और बॉबी के करियर को लेकर हमेशा बहुत फिक्रमंद रहते थे और उनका मानना था कि फिल्म की सफलता के लिए मौसमी का होना बेहद जरूरी है.

मौसमी चटर्जी ने फिल्म करने के लिए भर दी थी हामी

उस मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र ने मौसमी चटर्जी से एक बार भी बहस नहीं की. उन्होंने साफ शब्दों में भरोसा दिलाया कि उन्हें उनकी तय फीस का एक-एक पैसा मिलेगा, एक रुपया भी कम नहीं होगा. धर्मेंद्र के इसी बड़प्पन और भरोसे ने काम किया और मौसमी आखिरकार फिल्म घायलका हिस्सा बनने के लिए राजी हो गईं.

70-80 के दशक में मौसमी चटर्जी ने बनाई अपनी पहचान

मौसमी चटर्जी भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने 70 और 80 के दशक में अपनी अदाकारी से हिंदी और बंगाली फिल्मों में खास पहचान बनाई. कोलकाता में जन्मी मौसमी का असली नाम इंदिरा चट्टोपाध्याय है. वह अपने दौर की न केवल सबसे लोकप्रिय हीरोइनोंमें से एक थीं, बल्कि 70 के दशक में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली स्टार्स की लिस्ट में भी शुमार थीं.

बंगाली फिल्म से की थी करियर की शुरुआत

मौसमी के फिल्मी सफर की शुरुआत 1967 में बंगाली फिल्म बालिका वधू से हुई थी. इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड का रुख किया, जहां ‘अनुराग’, ‘रोटी कपड़ा और मकान’ और ‘अंगूर’ जैसी फिल्मों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. उनकी सबसे बड़ी खूबी उनका सहज अभिनय और भावुक कर देने वाली परफॉरमेंस रही है. फिल्मों के साथ-साथ मौसमी ने राजनीति में भी हाथ आजमाया. पहले कांग्रेस से जुड़ी रहने के बाद साल 2019 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया.

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Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें

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