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लोकल18 ने देश की राजधानी दिल्ली के जाने-माने साइबर एक्सपर्ट और वरिष्ठ वकील राघवेंद्र प्रताप सिंह से बात की तो उन्होंने हैरान करने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया कि आखिर क्यों फिंगरप्रिंट लगने के बाद भी लाकर नहीं खुल सका.
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के कैलाश हिल्स (अमर कॉलोनी) में आईआरएस (IRS) अधिकारी की बेटी की हत्या के मामले में एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है. आरोपी राहुल मीणा ने कथित तौर पर पीड़िता के साथ दुष्कर्म और हत्या करने के बाद लूटपाट के इरादे से लॉकर खुलवाने की कोशिश की. इसके लिए वह पीड़िता को चौथी मंजिल से घसीटते हुए तीसरी मंजिल तक लेकर आया. हालांकि, पीड़िता के फिंगरप्रिंट लगाने के बावजूद लॉकर नहीं खुल सका. इसके बाद आरोपी ने लॉकर को तोड़कर लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया.
तकनीकी पहलू पर विस्तृत जानकारी
इस घटना के बाद यह सवाल उठने लगा कि जब लॉकर पर परिवार के सदस्यों के फिंगरप्रिंट दर्ज थे, तब पीड़िता के फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल करने पर भी वह क्यों नहीं खुला. इस संबंध में लोकल18 ने दिल्ली के जाने-माने साइबर एक्सपर्ट और वरिष्ठ वकील राघवेंद्र प्रताप सिंह से बातचीत की, जिन्होंने इस तकनीकी पहलू पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने इसे बेहद जघन्य अपराध बताते हुए कहा कि आरोपी पर दुष्कर्म, हत्या, लूटपाट और शव के साथ छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराएं लगना तय है.
इस वजह से नहीं खुला लॉकर
साइबर एक्सपर्ट राघवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके फिंगरप्रिंट कागज पर तो लिए जा सकते हैं, लेकिन डिजिटल या बायोमेट्रिक सिस्टम में उनका उपयोग कारगर नहीं होता. चाहे वह बैंक का लॉकर हो, घर का कैश लॉकर हो या मोबाइल का फिंगरप्रिंट लॉक मृत व्यक्ति के फिंगरप्रिंट से इन्हें खोलना संभव नहीं होता.
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण
राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है. मानव शरीर में एक प्रकार की जैव-विद्युत (बायो-इलेक्ट्रिक) सक्रियता होती है, जो जीवित अवस्था में ही कार्य करती है. मृत्यु के बाद यह सक्रियता समाप्त हो जाती है, जिससे बायोमेट्रिक सिस्टम फिंगरप्रिंट को पहचान नहीं पाते.
विशेषज्ञ के अनुसार, शरीर में रक्त संचार और हृदय की धड़कन के चलते एक जैव-विद्युत प्रणाली सक्रिय रहती है, जो फिंगरप्रिंट आधारित उपकरणों के सत्यापन में सहायक होती है. जैसे ही मृत्यु होती है और हृदय की धड़कन रुक जाती है, रक्त संचार बंद हो जाता है और यह जैव-विद्युत सक्रियता समाप्त हो जाती है. यही कारण है कि बायोमेट्रिक सिस्टम, डिजिटल लॉकर और मोबाइल अनलॉक जैसे फीचर मृत व्यक्ति के फिंगरप्रिंट को स्वीकार नहीं करते.
बताया जा रहा है कि आरोपी द्वारा पीड़िता को लॉकर तक घसीटकर लाने में कुछ समय लगा होगा और तब तक उसकी मृत्यु हो चुकी थी. इसी वजह से, फिंगरप्रिंट का उपयोग करने के बावजूद लॉकर नहीं खुल सका.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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