यूपी के सुल्तानपुर जिले में एक गांव लक्ष्मणपुर है यहां पर जो बच्चा पैदा होता है उसके नाम के आगे आचार्य लगाया जाता है. इसके पीछे की वजह है कि बनारस में यहां के कुछ प्रकांड विद्वानों द्वारा शास्त्रार्थ किया गया. जिसमें वे लोग शास्त्रार्थ में विजय हुए इसके बाद इस गांव के लोगों के नाम के आगे आचार्य लगाने की पदवी महारानी विक्टोरिया ने दे दी और तभी से इस गांव में पैदा हुए बच्चों के नाम के आगे आचार्य लगाया जाता है.
सुल्तानपुरः संस्कृत भाषा का महत्व प्राचीन काल से ही रहा है क्योंकि संस्कृत में कई ऐसे ग्रंथ लिखे गए जो भारतीय साहित्य और संस्कृति का आधार रहे. ऐसे में संस्कृत और धर्म के प्रति ज्ञान रखने वाले लोगों को आचार्य की पढ़ाई करनी पड़ती है. इसके लिए देश के कई विश्वविद्यालय आचार्य की डिग्री भी प्रदान करते हैं लेकिन यूपी के सुल्तानपुर जिले में एक गांव लक्ष्मणपुर है यहां पर जो बच्चा पैदा होता है उसके नाम के आगे आचार्य लगाया जाता है.
इसके पीछे की वजह है कि बनारस में यहां के कुछ प्रकांड विद्वानों द्वारा शास्त्रार्थ किया गया. जिसमें वे लोग शास्त्रार्थ में विजय हुए इसके बाद इस गांव के लोगों के नाम के आगे आचार्य लगाने की पदवी महारानी विक्टोरिया ने दे दी और तभी से इस गांव में पैदा हुए बच्चों के नाम के आगे आचार्य लगाया जाता है.
वाराणसी में पंडित और विद्वानों का शास्त्रार्थ हुआ
इसी गांव के रहने वाले आचार्य संतोष कुमार त्रिपाठी लोकल 18 से बताते हैं कि 1853 ई के आसपास वाराणसी में पंडित और विद्वानों का शास्त्रार्थ हुआ. इसके साथ ही सुल्तानपुर के लक्ष्मणपुर गांव के एक विद्वान ने पूरे पंचांग को गलत सिद्ध कर दिया और तिथि क्रम को भी सही साबित किया जिसके बाद लक्ष्मणपुर के पंडितों को पूरे देश में ख्याति मिली यही बात महारानी विक्टोरिया तक पहुंची.
महारानी विक्टोरिया ने दी पदवी
महारानी विक्टोरिया ने इस प्रसिद्धि और उपलब्धि का सम्मान किया और लिखित रूप से उन्होंने यह पदवी देने का आदेश किया कि लक्ष्मणपुर गांव में पैदा होने वाले किसी भी बच्चों के नाम के पहले अब से आचार्य लिखा जाएगा और तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि यहां पर बच्चों के नाम के आगे आचार्य लिखा जाता है. वर्तमान में कुछ आचार्य के नाम है जो अपने नाम के आगे आचार्य लिखते हैं जैसे आचार्य संतोष त्रिपाठी, आचार्य गेहेन्द्र नारायण मणि, आचार्य स्वयं भू नारायण, आचार्य योगेन्द्र नारायण, आचार्य हरीन्द्र नारायण और आचार्य राकेश त्रिपाठी. इन लोगों को आचार्य लिखने के लिए किसी डिग्री की आवश्यकता नहीं है.
अगर आप भी इस गांव आना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर कादीपुर विधानसभा के अंतर्गत आने वाले गांव लक्ष्मणपुर आना होगा यहीं पर आपको आचार्य परिवार मिल जाएगा कुछ लोग अभी भी यहां पर ज्योतिष का काम करते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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