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मानिकपुर-सतना मुख्य मार्ग पर स्थित छेरियां खुर्द गांव में बना सामुदायिक शौचालय, लोगों की सुविधा के बजाय एक बंद ढांचे में तब्दील हो चुका है. यह इस मार्ग से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं,ऐसे में अगर किसी यात्री या स्थानीय व्यक्ति को अचानक शौचालय की जरूरत पड़ जाए, तो उसके पास जंगल या आसपास के ढाबों का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है. गांव वालों के मुताबिक यह शौचालय बनने के बाद से कभी नियमित रूप से खुला ही नहीं है

चित्रकूटः जहां एक तरफ प्रदेश सरकार ने हर ग्राम पंचायत में स्वच्छता और सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए सामुदायिक शौचालय बनवाए है. वहीं चित्रकूट में इन योजनाओं की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. जिले के कई गांवों में बने सामुदायिक शौचालय आज भी ताले में बंद पड़े हैं, जिससे ग्रामीणों को मजबूरी में खुले में शौच जाना पड़ रहा है.

सामुदायिक शौचालय में लगा ताला

वही चित्रकूट लोकल 18 की टीम चित्रकूट के मानिकपुर पाठा क्षेत्र के छेरियां खुर्द गांव पहुंची, जहां की तस्वीर में इस समस्या को साफ तौर पर देखा जा सकता है. बता दे कि मानिकपुर-सतना मुख्य मार्ग पर स्थित छेरियां खुर्द गांव में बना सामुदायिक शौचालय, लोगों की सुविधा के बजाय एक बंद ढांचे में तब्दील हो चुका है.यह इस मार्ग से रोजाना हजारों वाहन गुजरते हैं,ऐसे में अगर किसी यात्री या स्थानीय व्यक्ति को अचानक शौचालय की जरूरत पड़ जाए,तो उसके पास जंगल या आसपास के ढाबों का सहारा लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है.गांव वालों के मुताबिक यह शौचालय बनने के बाद से कभी नियमित रूप से खुला ही नहीं है. कभी-कभार सफाई कर्मी आते हैं, सफाई करते हैं और फिर ताला लगाकर चाबी अपने साथ ले जाते हैं.अब यह सामुदायिक शौचालय आम जनता के लिए एक सफेद हाथी की तरह साबित हो रहा है.

खुले में शौच जाने को मजबूर

वही गांव के निवासी मुन्नी लाल यादव ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि आज से करीब 4 से 5 साल हो गए, लेकिन इस शौचालय का ताला कभी नहीं खुला है. बरसात हो या भीषण गर्मी, ठंडी लोगों को शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है. जब यह बन रहा था, तब कहा गया था कि गांव के सभी लोग इसका इस्तेमाल करेंगे, लेकिन अब यह सिर्फ दिखावे तक सीमित रह गया है.उनका कहना है कि बीच-बीच में सफाई जरूर होती है, लेकिन आम लोगों के लिए दरवाजे बंद ही रहते हैं. अब देखना है यह ही कि क्या जिला प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए इन बंद पड़े शौचालयों को आम जनता के लिए खुलवा पाएगा,या फिर छेरियां खुर्द जैसे गांवों के लोग यूं ही खुले में शौच जाने को मजबूर रहेंगे.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

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