-वर्दी सिर्फ अधिकार नहीं, समाज सेवा का संकल्प है: जे. रविंद्र गौड़
-582 प्रशिक्षु आरक्षियों के पासिंग आउट से पहले सामूहिक भोज का आयोजन
-वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भोजन परोसकर दिया सेवा और अनुशासन का संदेश
-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच पुलिस सेवा के मूल्यों से जुड़ते नजर आए प्रशिक्षु
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिस सेवा केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति समर्पण, अनुशासन और सेवा भावना का जीवंत उदाहरण भी है। इसी परम्परा को सशक्त रूप से आगे बढ़ाते हुए कमिश्नरेट गाजियाबाद के रिजर्व पुलिस लाइन्स परिसर में शुक्रवार को प्रशिक्षु आरक्षीगण के सम्मान में सामूहिक भोज कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन पुलिस सेवा की गौरवशाली परम्पराओं और वरिष्ठ-कनिष्ठ के बीच आपसी सम्मान एवं सहयोग की भावना को मजबूत करने का प्रतीक बना। कमिश्नरेट गाजियाबाद में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कुल 582 प्रशिक्षु आरक्षियों का नौ माह का आधारभूत प्रशिक्षण पूर्ण होने जा रहा है। प्रशिक्षण की समाप्ति के उपलक्ष्य में 26 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित पासिंग आउट परेड से पूर्व यह सामूहिक भोज कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रशिक्षुओं और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच आत्मीय संवाद का माहौल देखने को मिला।
इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मुख्यालय एवं अपराध केशव कुमार चौधरी
एडिशनल पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था एवं ट्रैफिक राज करन नैय्यर, डीसीपी सिटी धवल जायसवाल, डीसीपी देहात सुरेन्द्र नाथ तिवारी, डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन, एडीसीपी क्राइम पियूष कुमार सिंह, एसीपी कोतवाली उपासना पाण्डेय, एसीपी कविनगर भाष्कर वर्मा, एसीपी वेवसिटी प्रियाश्री पाल, एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा सहित कमिश्नरेट गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ स्वयं प्रशिक्षु आरक्षियों को भोजन परोसकर पुलिस विभाग की उस परंपरा को जीवित किया, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी अपने अधीनस्थ जवानों के साथ परिवार जैसा संबंध स्थापित करते हैं। अधिकारियों द्वारा भोजन परोसना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पुलिस बल में आपसी सम्मान, अनुशासन और सेवा भावना का जीवंत संदेश माना जाता है। कार्यक्रम में कमिश्नरेट गाजियाबाद तथा 41वीं वाहिनी पीएसी गाजियाबाद के अधिकारीगण विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त वेव सिटी श्रीमती प्रियाश्री पाल द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को गरिमामय और अनुशासित वातावरण में संपन्न कराया।
सामूहिक भोज कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आरक्षियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का भी शानदार प्रदर्शन किया। नृत्य, संगीत, नाटक, कवितापाठ और लोकगीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को उत्साहपूर्ण बना दिया। पारंपरिक लोकनृत्य और आधुनिक प्रस्तुतियों के जरिए प्रशिक्षुओं ने न केवल अपनी रचनात्मक क्षमता दिखाई, बल्कि पुलिस बल की नई पीढ़ी की ऊर्जा और सकारात्मक सोच को भी प्रदर्शित किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उपस्थित अधिकारियों और प्रशिक्षुओं के बीच आत्मीयता का वातावरण तैयार किया। पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ ने प्रशिक्षु आरक्षियों को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस सेवा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का पवित्र दायित्व है। उन्होंने कहा कि वर्दी पहनने के साथ ही पुलिसकर्मी पर जनता के विश्वास की रक्षा करने की जिम्मेदारी आ जाती है। अनुशासन, ईमानदारी और सेवा भावना ही पुलिस बल की वास्तविक पहचान है और इन्हीं मूल्यों के आधार पर एक आदर्श पुलिस व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान रहने, संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा कानून के साथ मानवीय दृष्टिकोण बनाए रखने का संदेश दिया। पुलिस कमिश्नर ने कहा कि जनता के साथ सकारात्मक संवाद और निष्पक्ष कार्यशैली ही पुलिस की साख को मजबूत बनाती है। सामूहिक भोज का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण पूर्ण होने की खुशी साझा करना नहीं था, बल्कि प्रशिक्षु आरक्षियों को पुलिस सेवा की परंपराओं, अनुशासन और टीम भावना से जोडऩा भी था। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक ही पंक्ति में बैठकर भोजन करने और संवाद स्थापित करने से प्रशिक्षुओं में आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना और अधिक मजबूत हुई। कार्यक्रम में प्रशिक्षु आरक्षियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कई प्रशिक्षुओं ने इसे अपने प्रशिक्षण काल का सबसे प्रेरणादायक और यादगार क्षण बताया। आयोजन ने न केवल पुलिस परिवार की एकजुटता को दर्शाया, बल्कि आने वाले समय में समाज सेवा के लिए तैयार हो रहे जवानों के मनोबल को भी नई ऊर्जा प्रदान की। पासिंग आउट परेड से पूर्व आयोजित यह सामूहिक भोज कार्यक्रम प्रशिक्षु आरक्षियों के लिए प्रेरणा, सम्मान और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि पुलिस बल की वास्तविक ताकत केवल कानून लागू करने में नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं, अनुशासन और सेवा भावना को आत्मसात करने में निहित है।
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