UP Board Topper Story: आज यूपी बोर्ड रिजल्ट 2026 जारी होने वाला है. लेकिन उससे पहले यूपी बोर्ड की 2 टॉपर्स गजब चर्चा में हैं. सौम्या पटेल का 98.67% का रिकॉर्ड हो या प्राची निगम की बेमिसाल हिम्मत- यूपी बोर्ड की इन दो बेटियों ने वो कर दिखाया जो नामुमकिन लगता था. यूपी बोर्ड रिजल्ट 2026 से पहले जानिए इन दो लेजेंडरी टॉपर्स की कहानी, जिन्होंने अपनी मेहनत से उत्तर प्रदेश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया.
UP Board Topper Story: यूपी बोर्ड की इन 2 टॉपर्स की चर्चा सालों बाद भी होती है
यूपी बोर्ड की 2 बेटियों ने बनाए शानदार रिकॉर्ड, कोई नहीं है इनकी टक्कर में
यूपी बोर्ड रिजल्ट के साथ ही टॉपर लिस्ट भी जारी करता है. हर साल यूपी बोर्ड टॉपर स्टोरी वायरल होती है. कोई गरीबी या छोटे स्कूल से पढ़कर यूपी बोर्ड के नतीजों में टॉप पर रहता है तो कोई सफलता की अलग इबारत लिखता है. पढ़िए सौम्या पटेल और प्राची निगम की अनोखी कहानियां.
सौम्या पटेल: वो नाम जिसने 2016 में रचा ‘अजेय’ इतिहास
रायबरेली की सौम्या पटेल ने जब साल 2016 के हाईस्कूल नतीजों में 98.67% अंक हासिल किए तो मानों पूरे प्रदेश में शिक्षा जगत का गणित बदल गया. सौम्या की चर्चा आज एक दशक बाद भी इसलिए होती है क्योंकि उनका यह रिकॉर्ड यूपी बोर्ड के सबसे ऊंचे शिखर जैसा है. सौम्या एक साधारण परिवार से आती थीं, लेकिन उनकी एकाग्रता असाधारण थी. उन्होंने साबित किया कि अगर आप अपने विषयों पर पकड़ बना लें तो बोर्ड की कठिन परीक्षा में भी शत-प्रतिशत के करीब पहुंचा जा सकता है. आज भी जब नए टॉपर्स की तुलना होती है तो सौम्या पटेल का रिकॉर्ड सबसे बड़ा बेंचमार्क माना जाता है.
प्राची निगम: प्रतिभा जिसने ट्रोल्स की बोलती बंद कर दी
साल 2024 की यूपी बोर्ड 10वीं टॉपर प्राची निगम का नाम आज घर-घर में जाना जाता है. सीतापुर की इस बेटी ने हाईस्कूल में 98.50% अंक हासिल कर न केवल टॉप किया, बल्कि अपनी वैचारिक परिपक्वता से देश का दिल जीत लिया. यूपी बोर्ड रिजल्ट के बाद जब उनकी तस्वीर वायरल हुई तो कुछ लोगों ने उनके चेहरे पर बालों (hormonal changes) को लेकर भद्दे कमेंट्स किए. लेकिन प्राची निगम ने जिस शालीनता और आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, उसने उन्हें रातों-रात ‘नेशनल इंस्पिरेशन’ बना दिया. प्राची ने दो-टूक शब्दों में कहा कि उनकी पहचान उनकी काबिलियत है, न कि उनका चेहरा.
उत्तर प्रदेश की दोनों बेटियां क्यों खास हैं?
सौम्या पटेल और प्राची निगम में एक समानता है- दोनों ने अपनी सफलता के लिए किसी हाई-फाई कोचिंग का सहारा नहीं लिया, इन दोनों ने ग्रामीण और छोटे शहरों के सरकारी और निजी स्कूलों की साख बचाई. सौम्या ने जहां एकेडमिक एक्सीलेंस की नई परिभाषा लिखी, वहीं प्राची ने ‘मेंटल टफनेस’ का उदाहरण पेश किया. उत्तर प्रदेश की इन दोनों बेटियों ने साबित कर दिया कि यूपी बोर्ड के स्टूडेंट्स अब किसी भी मायने में सीबीएसई या आईसीएसई वालों से पीछे नहीं हैं.
क्या 2026 में टूटेगा इनका रिकॉर्ड?
आज जब यूपी बोर्ड 2026 के नतीजे आने वाले हैं तो सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कोई स्टूडेंट सौम्या पटेल के 98.67% के उस ‘विराट’ आंकड़े को छू पाएगा? या फिर क्या प्राची निगम जैसी कोई निडर प्रतिभा सामने आएगी जो समाज को नई दिशा दिखाए? इन दोनों बेटियों ने जो लकीर खींची है, वह बहुत बड़ी है और उसे पार करना आने वाले मेधावियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी.
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