Hormuz Strait Sea Mines: पश्चिम एशिया में भड़की युद्ध की आग में एशिया से लेकर यूरोप तक के देश झुलसने लगे हैं. तमाम दावों के बावजूद एनर्जी कॉरिडोर के नाम से विख्यात होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस की आपूर्ति अभी तक सुचारू नहीं हो सकी है. ईरान की ओर से हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि होर्मुज जहाजों के लिए न खुले, ताकि उसकी मांग पर गंभीरता से विचार किया जा सके. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली दूसरे दौर की वार्ता भी अटक गई है.
होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की ओर से बिछाए गए सी-माइंस को हटाने में 6 महीने का समय लगने का अनुमान है. (फोटो: Reuters)
अमेरिका के रक्षा मुख्यालय पेंटागन में हाल ही में हुई एक गोपनीय ब्रीफिंग ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि ईरान के साथ जारी युद्ध के बाद Strait of Hormuz को पूरी तरह सुरक्षित और साफ करने में छह महीने तक का समय लग सकता है. यह आकलन खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसे अमेरिकी संसद की हाउस आर्म्ड सर्विसेज कमेट (House Armed Services Committee) के सदस्यों के साथ साझा किया गया. इस गोपनीय ब्रीफिंग के दौरान बताया गया कि ईरान ने इस रणनीतिक जलडमरूमध्य में बड़ी संख्या में समुद्री बारूदी सुरंगें (माइंस) बिछाई हो सकती हैं. अनुमान है कि इनकी संख्या 20 या उससे अधिक हो सकती है. इनमें से कुछ माइंस को GPS तकनीक के जरिए दूर से नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, जिससे उन्हें ढूंढना और निष्क्रिय करना और अधिक कठिन हो गया है. वहीं, कुछ माइंस को ईरानी नौकाओं के जरिए सीधे समुद्र में बिछाया गया.
होर्मुज स्ट्रेट के बाधित रहने से भारत पर भी असर पड़ने की आशंका है. (फाइल फोटो/Reuters)
तो क्या 6 महीने तक बंद रहेगा होर्मुज?
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इन रिपोर्टों को लेकर सतर्क प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि छह महीने तक होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद रहने का आकलन असंभव और अस्वीकार्य है. उन्होंने यह भी कहा कि किसी एक खुफिया आकलन को अंतिम सत्य मान लेना सही नहीं होगा और मीडिया द्वारा लीक जानकारी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है. यह मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल ट्रांसपोर्टिंग रूट्स में से एक है. वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस स्थिति में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं, जिसका असर अमेरिका के आगामी मध्यावधि चुनावों पर भी पड़ सकता है.
खतरनाक आर्थिक प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, इस तरह की सफाई और सुरक्षा अभियान तब तक शुरू नहीं किया जा सकता जब तक अमेरिका और इजराइल का ईरान के साथ चल रहा युद्ध समाप्त नहीं हो जाता. यानी संघर्ष की अवधि जितनी लंबी होगी, आर्थिक असर भी उतना ही गहरा होगा. वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध को लेकर स्पष्ट किया है कि इसके खत्म होने की कोई तय समयसीमा नहीं है. उन्होंने कहा कि हालात को देखते हुए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा. यदि ईरान इस रणनीतिक मार्ग को लंबे समय तक बाधित रखने में सफल रहता है, तो यह न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के लिए आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बन सकता है. हालांकि, पेंटागन और व्हाइट हाउस लगातार यह दावा कर रहे हैं कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं.
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बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
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