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  • आबकारी विभाग की सख्ती से भरा सरकारी खजाना, अवैध शराब कारोबार पर लगा ब्रेक
  • आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव की अगुवाई में आबकारी विभाग ने लिखी कामयाबी की नई कहानी
  • रणनीतिक प्लानिंग से बढ़ी वैध बिक्री, राजस्व में आया जबरदस्त उछाल
  • जनसहयोग और सतर्क निगरानी बना विभाग की सफलता का सबसे बड़ा आधार
  • मैदान में सक्रिय टीम, लगातार कार्रवाई से टूटा तस्करी का नेटवर्क

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। औद्योगिक विकास, आधुनिक बुनियादी ढांचे और निवेश के दम पर देशभर में पहचान बना चुका गौतमबुद्ध नगर अब उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े राजस्व जनरेट करने वाले जिलों में शुमार हो चुका है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की आर्थिक रफ्तार ने इस जिले को प्रदेश का  ‘कमाऊ पूत’ बना दिया है। खास बात यह है कि इस आर्थिक मजबूती में आबकारी विभाग की भूमिका बेहद अहम बनकर सामने आई है। जहां पहले राजस्व बढ़ाने के लिए नए संसाधन तलाशे जाते थे, वहीं अब गौतमबुद्ध नगर स्वयं सरकार के खजाने को भरने वाला प्रमुख जिला बन गया है। जिले के आबकारी विभाग ने न केवल शराब बिक्री से रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया है, बल्कि अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर प्रशासनिक कार्यशैली की नई मिसाल पेश की है। राजस्व बढ़ाना सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं होता, बल्कि इसके पीछे मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट रणनीति और जमीन पर सक्रिय टीमवर्क की जरूरत होती है। गौतमबुद्ध नगर में जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की कार्यशैली इसी का जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। सख्त प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और जनहित को प्राथमिकता देने वाली उनकी कार्यप्रणाली ने न केवल अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया, बल्कि आबकारी विभाग को प्रदेश में राजस्व वृद्धि का मॉडल भी बना दिया।

सीमित संसाधनों के बावजूद निरंतर फील्ड मॉनिटरिंग, टीम को प्रेरित रखने की क्षमता और परिणाम आधारित काम करने की सोच ने जिले के आबकारी विभाग को नई पहचान दिलाई है, जहां कानून का पालन भी मजबूत हुआ और सरकारी खजाना भी रिकॉर्ड स्तर तक भरता चला गया। गौतमबुद्ध नगर का आबकारी विभाग प्रदेश में अपनी अलग पहचान स्थापित कर चुका है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में विभाग लगातार नए राजस्व रिकॉर्ड बना रहा है। आज यह जिला साबित कर रहा है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति, टीमवर्क और जनविश्वास एक साथ काम करें तो सरकारी व्यवस्था न केवल मजबूत होती है, बल्कि विकास की गति भी कई गुना बढ़ जाती है।

गौतमबुद्ध नगर की यह सफलता आने वाले वर्षों में प्रदेश की राजस्व नीति और प्रशासनिक मॉडल को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। आबकारी विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती अवैध शराब तस्करी को रोकना होती है। बाहरी राज्यों से आने वाली सस्ती और अवैध शराब सरकारी राजस्व के लिए सबसे बड़ा नुकसान मानी जाती है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने कमान संभालते ही इस समस्या को प्राथमिकता में रखा। लगातार अभियान, खुफिया तंत्र की मजबूती, टीमवर्क और स्थानीय स्तर पर जनसहयोग के जरिए अवैध कारोबार पर शिकंजा कस दिया गया। यही कारण है कि आज जिले में अवैध शराब के नेटवर्क लगभग खत्म होते दिखाई दे रहे हैं। जब अवैध बिक्री रुकी तो लाइसेंसी दुकानों की बिक्री बढ़ी और राजस्व स्वत: बढ़ता चला गया। राजस्व बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका यही है-अवैध कारोबार समाप्त करना और वैध व्यवस्था को मजबूत बनाना।

राजस्व बढ़ाने की नई मिसाल बना आबकारी विभाग
वर्ष 2023-24 में विभाग को 1 अप्रैल से 31 मार्च तक 1734 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके बाद वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 1924 करोड़ रुपये पहुंच गया। शासन द्वारा वर्ष 2025-26 के लिए 3000 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य दिया गया था, जिसमें से विभाग ने 2418.5 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर मजबूत प्रदर्शन दर्ज कराया। वहीं वर्ष 2026-27 की शुरुआत भी बेहद शानदार रही है। अप्रैल माह के मात्र 21 दिनों में ही अभी तक करीब 130 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर विभाग ने संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में नए रिकॉर्ड बनना तय है।

छोटी टीम, बड़ा काम- सात इंस्पेक्टरों की ‘राजस्व सेना’
गौतमबुद्ध नगर जैसे विशाल और आर्थिक रूप से सक्रिय जिले में आबकारी विभाग के पास सीमित संसाधन हैं। विभाग में मात्र सात इंस्पेक्टर-आशीष पाण्डेय, सचिन त्रिपाठी, डॉ. शिखा ठाकुर, अखिलेश बिहारी वर्मा, अभिनव शाही, नामवर सिंह और संजय चन्द्र की टीम तैनात है। कम संख्या के बावजूद यह टीम लगातार फील्ड में सक्रिय रहती है। दिन-रात चलने वाली संयुक्त कार्रवाई, चेकिंग अभियान, गुप्त सूचना तंत्र और आधुनिक निगरानी पद्धति के कारण विभाग ने कानून व्यवस्था और राजस्व दोनों मोर्चों पर सफलता हासिल की है। टीम की कार्यशैली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सीमित स्टाफ के बावजूद जिले में बड़े स्तर पर अवैध शराब नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। अधिकारी और कर्मचारी केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं रहे, बल्कि लोगों में जागरूकता फैलाकर विश्वास भी जीता।

रिकॉर्ड छापेमारी से तस्करों में खौफ
आबकारी विभाग की सक्रियता आंकड़ों में भी साफ दिखाई देती है। वर्ष 2024-25 में विभाग ने 14,674 छापेमारी अभियान चलाए। इन कार्रवाइयों में 44,854 बल्क लीटर देशी शराब सहित कुल 48,359 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई। 382 व्यक्तियों पर कार्रवाई करते हुए 374 तस्करों को जेल भेजा गया। इसके बाद वर्ष 2025-26 में कार्रवाई और तेज कर दी गई। कुल 15,109 छापेमारी की गईं, जिनमें 228 संदिग्ध स्थान शामिल रहे। इस दौरान 48,268 बल्क लीटर देशी शराब, 5,348 बोतल और 1707 कैन बीयर सहित कुल 70,623 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई। इसके साथ ही 353 लोगों पर कार्रवाई कर 342 तस्करों को जेल भेजा गया तथा शराब तस्करी में प्रयुक्त 19 वाहन-दोपहिया से लेकर लग्जरी कारों तक-जब्त किए गए। लगातार कार्रवाई के चलते तस्करों में भय का माहौल बना हुआ है, जिसका सीधा लाभ सरकारी राजस्व को मिला है।

बार लाइसेंस व्यवस्था और जनविश्वास से बढ़ा अतिरिक्त राजस्व
राजस्व वृद्धि केवल शराब बिक्री तक सीमित नहीं रही। वर्ष 2025-26 में जिले के रेस्टोरेंट, होटल और बार लाइसेंस से भी विभाग को करीब 50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ। हर माह लगभग 4 करोड़ 17 लाख रुपये की नियमित आय इस मद से हो रही है। यह सफलता पारदर्शी लाइसेंस प्रणाली, नियमों के सख्त पालन और विभागीय निगरानी का परिणाम मानी जा रही है। विशेष बात यह रही कि विभाग ने कारोबारियों को विरोधी नहीं बल्कि साझेदार की तरह जोड़ा। नियमों का पालन सुनिश्चित करते हुए व्यवसायिक वातावरण भी सुरक्षित रखा गया, जिससे वैध व्यापार को बढ़ावा मिला।

जनहित और प्रशासनिक दक्षता का संतुलन
6 जून 2023 को जिले की कमान संभालने वाले जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने अपने लगभग ढाई वर्ष के कार्यकाल में प्रशासनिक दक्षता का मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनकी कार्यशैली केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं रही बल्कि जनहित, सुरक्षा और पारदर्शिता को समान महत्व दिया गया। उन्होंने विभागीय टीम को लक्ष्य आधारित कार्यसंस्कृति दी, फील्ड मॉनिटरिंग मजबूत की और आम नागरिकों का विश्वास जीतने पर विशेष जोर दिया। यही कारण है कि अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को जनता का सहयोग भी मिला। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जनता की शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की प्रणाली ने विभाग की छवि को मजबूत किया है।

प्रदेश के लिए मॉडल बनता गौतमबुद्ध नगर
आज गौतमबुद्ध नगर का आबकारी विभाग उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए मॉडल बनकर उभर रहा है। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर नेतृत्व, मजबूत टीमवर्क और स्पष्ट रणनीति के जरिए कैसे राजस्व बढ़ाया जा सकता है-इसका उदाहरण यहां देखने को मिल रहा है। यदि अन्य जिलों में भी अवैध शराब पर इसी प्रकार नियंत्रण स्थापित किया जाए तो प्रदेश का राजस्व कई गुना बढ़ सकता है। गौतमबुद्ध नगर की आर्थिक पहचान अब केवल औद्योगिक विकास तक सीमित नहीं रही, बल्कि आबकारी विभाग भी सरकारी खजाने का मजबूत स्तंभ बन चुका है। अवैध शराब के खिलाफ सख्ती, लाइसेंस व्यवस्था की पारदर्शिता, टीम की सक्रियता और नेतृत्व की स्पष्ट सोच ने जिले को राजस्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है।

सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी

शासन की मंशा के अनुरूप राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाना विभाग की प्राथमिकता है। टीमवर्क, नियमित प्रवर्तन कार्रवाई और आमजन के सहयोग से जिले में अवैध शराब तस्करी पर काफी हद तक नियंत्रण स्थापित किया गया है। आबकारी विभाग का उद्देश्य केवल राजस्व संग्रह करना नहीं, बल्कि सुरक्षित एवं पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है। विभाग लगातार छापेमारी अभियान, सीमा क्षेत्रों पर निगरानी और लाइसेंसी दुकानों के निरीक्षण के माध्यम से नियमों का सख्ती से पालन करा रहा है। भविष्य में भी अवैध शराब के खिलाफ अभियान और तेज किया जाएगा तथा जनसहभागिता बढ़ाकर राजस्व लक्ष्य को प्राप्त करने के साथ-साथ आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी

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