{“_id”:”69e8d50c83f802213008a900″,”slug”:”yasin-malik-was-promoting-kashmiri-separatism-with-the-help-of-pakistani-pm-nia-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-133302-2026-04-22″,”type”:”story”,”status”:”publish”,”title_hn”:”पाकिस्तानी पीएम की मदद से कश्मीरी अलगाववाद को बढ़ावा दे रहा था यासीन मलिक : एनआईए”,”category”:{“title”:”City & states”,”title_hn”:”शहर और राज्य”,”slug”:”city-and-states”}}
एनआईए ने दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ा खुलासा किया है। एजेंसी का दावा है कि कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति सहित शीर्ष नेतृत्व से संपर्क बनाए रखा और इन संपर्कों का इस्तेमाल भारत से कश्मीर के अलगाव को बढ़ावा देने के लिए किया। एनआईए ने अपने हलफनामे में कहा कि आरोपी यासीन मलिक पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व, जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, पाकिस्तानी सीनेट के सीनेटर और सभी प्रांतों के मुख्यमंत्री शामिल हैं, के संपर्क में था। वह इन संपर्कों का उपयोग भारत के खिलाफ कहानियों को फैलाने और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा था।
जांच एजेंसी ने अदालत से यह भी कहा कि मलिक के इस दावे का, कि कई भारतीय प्रधानमंत्रियों ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए उनसे बातचीत की, आतंक मामले में कोई असर नहीं पड़ता है और यह उन्हें उनके अपराधों से मुक्त नहीं करता है। एनआईए के अनुसार, मलिक द्वारा वरिष्ठ भारतीय राजनेताओं, नौकरशाहों, मीडिया कर्मियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के करीब होने के दावे केवल लोकप्रियता हासिल करने और जनता की सहानुभूति जुटाने के लिए हैं।
आतंकियों से भी थे मलिक के संबंध : मलिक ने खुद स्वीकार किया है कि वह जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के कमांडर-इन-चीफ थे। एनआईए ने अदालत में दलील दी, सिर्फ वरिष्ठ राजनेताओं और नौकरशाहों के नाम लेने से इस तथ्य से इनकार नहीं होता कि मलिक के लश्कर-ए-तैयबा के हाफिज सईद और हिजबुल मुजाहिदीन के सैयद सलाहुद्दीन जैसे आतंकियों से संबंध थे। यह हलफनामा एनआईए द्वारा आतंक फंडिंग के मामले में मलिक को मौत की सजा दिए जाने की मांग वाली याचिका के जवाब में दायर किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने मलिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
मलिक का दावा छह भारतीय प्रधानमंत्रियों ने की थी बात : इससे पहले मलिक ने उच्च न्यायालय में दावा किया था कि 1990 में उसकी गिरफ्तारी के बाद वीपी सिंह से लेकर मनमोहन सिंह तक की लगातार छह सरकारों ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर बातचीत की थी। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंद्र डुडेजा की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
- व्हाट्स एप के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- टेलीग्राम के माध्यम से हमारी खबरें प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें।
- हमें फ़ेसबुक पर फॉलो करें।
- हमें ट्विटर पर फॉलो करें।
———-
🔸 स्थानीय सूचनाओं के लिए यहाँ क्लिक कर हमारा यह व्हाट्सएप चैनल जॉइन करें।
Disclaimer: This story is auto-aggregated by a computer program and has not been created or edited by Ghaziabad365 || मूल प्रकाशक ||



