वेब सीरीज ‘पंचायत 3’ के मशहूर एक्टर का जीवन स्ट्रगल और अभावों के बीच बीता. उन्होंने बेहद गरीबी में बचपन बिताया, जहां त्योहार खुशियों के बजाय आर्थिक तंगी के कारण आंसू लेकर आते थे. उन्होंने अपने परिवार की मदद के लिए लिफ्टमैन, ऑफिस बॉय और सिक्योरिटी गार्ड जैसी छोटी नौकरियां कीं. अभिनय की दुनिया में आने के बाद भी विनोद सूर्यवंशी की राह आसान नहीं थी. उन्हें अपने सांवले रंग के कारण रिजेक्शन झेलना पड़ा और जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर अपमानित होना पड़ा, यहां तक कि उनके हाथ से खाना तक छीन लिया गया. इन तमाम अपमानों और मुश्किलों के बावजूद अपनी कड़ी मेहनत के दम पर आज उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई है.
नई दिल्ली: ‘पंचायत’ फेम विनोद सूर्यवंशी की कहानी असल जिंदगी के किसी फिल्मी ड्रामा से कम नहीं है. उन्होंने हाल में अपने स्ट्रगल के उन दिनों को याद किया, जब पेट भरने से लेकर अपनी पहचान बनाने तक के लिए उन्हें हर कदम पर जद्दोजहद करनी पड़ी थी. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)
विनोद का बचपन गरीबी के साये में बीता. उनके लिए त्योहार खुशियां नहीं, बल्कि डर और आंसू लेकर आते थे. जब दुनिया दिवाली मनाती थी, तब उनका परिवार इस बात पर रोता था कि उनके पास दूसरों की तरह जश्न मनाने के पैसे नहीं हैं. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
घर के हालात भी कुछ खास अच्छे नहीं थे. मां दूसरों के घरों में काम करती थीं और पिता मजदूरी. उन्होंने सिद्धार्थ कन्नन को बताया कि काम न मिलने पर पिता अक्सर शराब पीकर घर आते और मां के साथ मारपीट करते थे, जिसे देखकर विनोद का दिल भर आता था. (फोटो साभार: Instagram@vinodsuryavanshi2011)
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विनोद ने पेट पालने के लिए बहुत छोटी उम्र में काम करना शुरू कर दिया था. उन्होंने सबसे पहले लिफ्टमैन की नौकरी पकड़ी, जहां महीने के सिर्फ 1600 रुपये मिलते थे. इसके बाद, उन्होंने ऑफिस बॉय और फिर सिक्योरिटी गार्ड के रूप में भी काम किया. (फोटो साभार: Instagram@vinodsuryavanshi2011)
गार्ड की नौकरी के दिन सबसे ज्यादा दर्दनाक थे. 12-12 घंटे लगातार खड़े रहना पड़ता था. बारिश में जब जूतों में पानी भर जाता, तो पैरों में छाले पड़ जाते थे. उस वक्त लोग उन्हें गालियां तक देते थे, जिससे उन्हें अहसास हुआ कि समाज में इज्जत सिर्फ रुतबे की होती है. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
एक्टिंग की दुनिया में कदम रखते ही चुनौतियां और बढ़ गईं. विनोद बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्हें उनके ‘डार्क कॉम्प्लेक्शन’ यानी सांवले रंग की वजह से कई बार रिजेक्शन झेलना पड़ा. लोग उन्हें उनके लुक की वजह से जज करते थे. (फोटो साभार: YouTube/videograb)
हद तो तब हो गई, जब एक सेट पर जूनियर आर्टिस्ट होने की वजह से विनोद के हाथ से खाना तक छीन लिया गया. फिल्म इंडस्ट्री के इस भेदभाव ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाने का फैसला किया. (फोटो साभार: Instagram@vinodsuryavanshi2011)
आज विनोद ‘पंचायत’ जैसे पॉपुलर शो का हिस्सा हैं और लोग उन्हें उनके काम से पहचानते हैं. उनकी यह कहानी सिखाती है कि अगर हौसला बुलंद हो, तो इंसान कुछ भी हासिल कर सकता है. (फोटो साभार: Instagram@vinodsuryavanshi2011)
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