Shekha Jheel Aligarh: अलीगढ़ के नाम अब एक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ गई है. जिले की मशहूर शेखा झील को आधिकारिक तौर पर रामसर साइट घोषित कर दिया गया है, जिससे अब इसे वैश्विक मानचित्र पर खास पहचान मिलेगी. 174 साल पुरानी यह झील न केवल अलीगढ़, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, जहां सर्दियों में सात समंदर पार से आए हजारों विदेशी परिंदों का मेला लगता है. अगर आप भी प्रकृति के करीब सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं और रंग-बिरंगे मेहमान पक्षियों का दीदार करना चाहते हैं, तो शेखा झील आपके लिए एकदम बढ़िया है. आइए जानते हैं आप कैसे यहां पहुंच सकते हैं और क्यों आपको यहां घूमने जाना चाहिए.
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बीते मंगलवार को अलीगढ़ की शेखा झील (Seekha Jheel) को ‘रामसर साइट’ घोषित किया है. इसके साथ ही यह भारत की 99वीं और उत्तर प्रदेश की 12वीं ऐसी साइट बन गई है जिसे ग्लोबल पहचान मिली है. अब इस झील के संरक्षण और यहां की सुविधाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों पर काम किया जाएगा, जिससे यहां पर्यटन की संभावनाएं और भी बढ़ जाएंगी.
अलीगढ़ मुख्यालय से करीब 17 किलोमीटर दूर पनैठी-जलाली मार्ग पर स्थित यह झील अपने आप में इतिहास समेटे हुए है. इसका अस्तित्व साल 1852 में तब आया जब अपर गंग नहर का निर्माण कार्य चल रहा था. वक्त के साथ यह झील प्राकृतिक रूप से इतनी समृद्ध हो गई कि साल 2016 में इसे ‘राष्ट्रीय पक्षी विहार’ घोषित कर दिया गया और अब यह दुनिया भर के पर्यावरण प्रेमियों की नजर में है.
शेखा झील की असली खूबसूरती सर्दियों के मौसम में निखरती है. अक्टूबर का महीना शुरू होते ही यहां सात समंदर पार से हजारों मील का सफर तय करके विदेशी परिंदे आने लगते हैं. करीब 40 हेक्टेयर में फैली यह झील मार्च तक इन मेहमानों से गुलजार रहती है. यहां 40 से 45 अलग-अलग प्रजातियों के विदेशी पक्षी एक साथ देखे जा सकते हैं, जो किसी अजूबे से कम नहीं है. आप गर्मियों में यहां घूमने आ सकते है यहां की हरियाली और सुकून भरे नजारे आपके दिन को खास बना देंगे.
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इस झील पर करीब 186 प्रजातियों के देशी और विदेशी पक्षियों का जमावड़ा लगता है. यहां आपको विदेशी सारस, सुर्खाव, पिनटेल, जल मुर्गा, ब्लैक आइविश और पेंटेड स्ट्रोक जैसे दुर्लभ पक्षी बहुत करीब से देखने को मिलेंगे. जैसे-जैसे कड़ाके की ठंड बढ़ती है, वैसे-वैसे यहां इन रंग-बिरंगे परिंदों की तादाद और भी बढ़ती जाती है, जिससे पूरा नजारा जादुई लगने लगता है.
अलीगढ़ अब तक अपने ताले और मशहूर तालीम (AMU) के लिए जाना जाता था, लेकिन शेखा झील ने इसे एक नई पहचान दी है. अगर आप शहर की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर शांति के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो यह झील आपके लिए जन्नत से कम नहीं है. सुबह के वक्त जब सूरज की पहली किरण झील के पानी पर पड़ती है और हजारों पक्षी एक साथ चहचहाते हैं, तो उस नजारे को शब्दों में बयां करना मुश्किल है.
यहां आने का सबसे शानदार समय नवंबर से फरवरी के बीच होता है. क्योंकि तब यहां आपको हजारों प्रवासी पक्षी देखने को मिलते है. लेकिन आप यहां कभी भी जा सकते हैं क्योंकि पक्षियों के अलावा भी आपको बहुत कुछ देखने को मिलेगा. पर्यटकों की सुविधा के लिए सर्दियों में यह सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक खुली रहती है, जबकि गर्मियों में सुबह 9 बजे से ही एंट्री शुरू हो जाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि भारतीय नागरिकों के लिए यहां टिकट मात्र 30 रुपये है, जो इसे एक बहुत ही किफायती पिकनिक स्पॉट बनाती है. जबकि विदेशी सैलानियों के लिए यह शुल्क 350 रुपये है.
अगर आप शेखा झील घूमने का मन बना रहे हैं, तो एक बात का खास ख्याल रखें कि यह पक्षी विहार हफ्ते में केवल 6 दिन ही खुलता है. हर सोमवार को इसे पर्यटकों के लिए बंद रखा जाता है ताकि यहां रहने वाले पक्षियों को भी थोड़ा एकांत मिल सके और झील के रखरखाव का काम किया जा सके. इसलिए अपनी यात्रा की योजना सोमवार को छोड़कर किसी भी दिन बनाएं.
जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर होने के कारण यहां पहुंचना बेहद आसान है. यहां की ताज़ा हवा और प्राकृतिक परिवेश फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी बहुत जबरदस्त है. यह स्थान अब धीरे-धीरे एक मॉडर्न पिकनिक स्पॉट के रूप में उभर रहा है, जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिता सकते हैं. इसलिए अगर आप इस गर्मी की छुट्टी फैमिली के साथ कही घूमने का प्लान बना रहे हैं तो ये आपके लिए एक परफेक्ट स्पॉट है.
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