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Meen shani yog 2026: 29 मार्च 2026 से शुरू हुए रौद्र संवत्सर में इस बार 12 नहीं 13 माह रहेंगे। इस अतिरिक्त महीने को अधिक मास कहा जाता है। इसी दौरान शनि मीन योग और खप्पर योग के साथ ही कई अनिष्टकारी योग भी रहेंगे। 8 वर्षों के लिए बृहस्पति अतिचारी हैं और कालसर्पयोग के साथ ही विस्फोटक योग, यमा योग या अग्नि-मारुत योग भी बना है। इसी के चलते ही अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया और अब आगे क्या होगा?

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ज्येष्ठ माह 60 दिनों का 2026: 

13 माह के वर्ष में ज्येष्ठ माह 60 दिनों का रहेगा। 01 मई से 29 जून 2026 तक रहेगा ज्येष्ठ माह।  इसी में अधिकमास रहेगा। ऐसा योग संयोग बहुत वर्षों के बाद बना है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार 19 साल बाद बना है यह संयोग। इस संवत्सर के राजा गुरु और मंत्री मंगल होंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2026 परिवर्तन, उथल-पुथल और धार्मिक जागरण का मिश्रित वर्ष होगा। राजा और मंत्री दोनों ग्रहों की प्रवृत्ति एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न है गुरु शांत, सौम्य और विकासकारी, जबकि मंगल उग्र, साहसिक और संघर्षकारी। इसी बीच 13 माह में 13 पूर्णिमा रहेगी जो इस उथल-पुथल और भी ज्यादा बढ़ावा देगी।  


 

खप्पर योग 2026:

जब शनि, मंगल और राहु जैसे क्रूर ग्रह एक ही राशि (वर्तमान में मीन) में आकर नकारात्मक ऊर्जा पैदा करते हैं, जब एक ही महीने में 5 मंगलवार, शनिवार या रविवार पड़ें। मई-जून 2026 में यह दुर्लभ संयोग बन रहा है या अमावस्या पर संक्रांति हो तो खप्पर योग बनता है। 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या के साथ मिथुन संक्रांति रहेगी। 17 मई से 17 जुलाई के बीच में खप्पर योग रहेगा। यह स्थिति खतरनाक रहने वाली है।  पिछले साल यानी वर्ष 2025 में 15 मार्च से 11 जून और इसके बाद 11 जुलाई से लेकर 7 अक्टूबर तक खप्पर योग बना था। इसी दौरान इजराइल ईरान और फिर भारत पाकिस्तान युद्ध हुआ था।


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शनि गोचर और वैश्विक प्रभाव: 2020 से 2028 तक:

<strong>1. मकर एवं कुंभ शनि (2020-2024):</strong> मकर राशि में शनि के प्रवेश से कोरोना महामारी आई। कुंभ राशि में प्रवेश के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध, इज़राइल-हमास संघर्ष और भीषण प्राकृतिक आपदाओं का दौर शुरू हुआ।


 


<strong>2. मीन शनि (2025): </strong>मीन राशि में गोचर के दौरान भारत-पाक और ईरान-इज़राइल जैसे नए युद्ध भड़कने और विमान हादसों जैसी घटनाओं का योग बना। हालांकि, इसी दौरान ज्ञान-विज्ञान में प्रगति भी हुई।


 


<strong>3. मेष शनि और &#039;महादंगल&#039; (2026-2027):</strong>9 अगस्त 2027 को शनि मेष में गोचर करने लगेगा। वर्ष 2026 में गुरु के कमजोर होने और शनि की वक्री चाल के कारण दुनिया भीषण युद्ध और अराजकता की चपेट में आ सकती है। वर्तमान में मिडिल ईस्ट में युद्ध चल ही रहा है। भविष्यवाणियों के अनुसार, 2026 से 2027 के बीच भारत एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकता है, जिसमें भारत की सैन्य शक्ति अजेय रहेगी और उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ेगी।


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2020 से शुरू हुआ विनाश का यह चक्र 2028 तक चलेगा। शनि पुराने वैश्विक ढांचे, भूगोल और नक्शों को बदलकर एक नई विश्व व्यवस्था की नींव रखेगा। अतिचारी बृहस्पति के दौरान वर्ष 2026 में मंगल का शनि और राहु के साथ संयोग और शनि की वक्री एवं मार्गी चाल एक 'महादंगल' की ओर इशारा कर रही है।

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