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Deepa Bhati UPPCS Success Story: 18 साल की गृहस्थी और 3 बच्चों की जिम्मेदारी भी दीपा भाटी के हौसलों को डिगा नहीं सकी. जब दुनिया ने कहा ‘अब उम्र निकल गई’, तब 40 साल की दीपा ने UPPCS में 166वीं रैंक लाकर सबको चौंका दिया. पढ़िए नोएडा की सुपरमॉम के अफसर बनने की पूरी कहानी.

शादी के 18 साल बाद शुरू की तैयारी, 40 की उम्र में UPPCS पास कर बनी अफसरZoom

Deepa Bhati UPPCS Success Story: दीपा भाटी और उनकी बेटी साथ में पढ़ाई करती थीं

नई दिल्ली (Deepa Bhati UPPCS Success Story). सपनों की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. उत्तर प्रदेश की दीपा भाटी ने इस बात को पूरी दुनिया के सामने सच कर दिखाया है. एक साधारण हाउसवाइफ, 3 बच्चों की मां और शादी के 18 साल बाद जब कोई महिला किताबें उठाती है तो समाज अक्सर हौसला बढ़ाने के बजाय सवाल खड़े करता है. लेकिन दीपा के इरादे उन तानों से कहीं ज्यादा मजबूत थे. 40 साल की उम्र में, जहां लोग करियर में ठहराव ढूंढते हैं, वहां दीपा ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPCS) जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक कर अपनी नई पहचान बनाई.

दीपा भाटी की सक्सेस स्टोरी सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी बनने की नहीं है, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं के संघर्ष की है जो चूल्हे-चौके और बच्चों की परवरिश के बीच अपने सपनों को कहीं पीछे छोड़ देती हैं. नोएडा के एक छोटे से गांव से निकलकर राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) की कुर्सी तक का यह सफर त्याग, धैर्य और अटूट आत्मविश्वास की दास्तां है. दीपा ने साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो उम्र का हर आंकड़ा महज संख्या बनकर रह जाता है. जानिए कैसे एक होममेकर ने 166वीं रैंक हासिल कर यूपी पीसीएस में सफलता का परचम लहराया.

दीपा भाटी: गृहस्थी के 18 साल और एक अधूरा सपना

गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) के कोंडली बांगर गांव की रहने वाली दीपा भाटी का जीवन कई सालों तक एक आम घरेलू महिला की तरह ही बीता. कम उम्र में शादी हो जाने और फिर 3 बच्चों की जिम्मेदारी के बीच उनकी पढ़ाई का सिलसिला थम सा गया था. उन्होंने केमिस्ट्री में ग्रेजुएशन और इतिहास में एमए किया था. लेकिन घर की व्यस्तताओं ने उन्हें किताबों से दूर कर दिया था. दीपा ने अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया, लेकिन सेहत से जुड़ी दिक्कतों के कारण उन्हें वह नौकरी भी छोड़नी पड़ी.

भाई का सुझाव और तानों की बौछार

जब दीपा भाटी अपनी जिंदगी के कठिन दौर से गुजर रही थीं, तब उनके भाई ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने की सलाह दी. 40 की उम्र में जब उन्होंने यूपी पीसीएस की तैयारी शुरू की तो आस-पास के लोगों ने कटाक्ष करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. लोग कहते थे, अब इस उम्र में साहेबीन बनोगी क्या? लेकिन दीपा ने इन नकारात्मक बातों को कान लगाने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया. उनकी बड़ी बेटी उस समय 12वीं कक्षा में थी और मां-बेटी अक्सर साथ बैठकर पढ़ाई किया करती थीं.

दिन में संभाला घर, रात में की पढ़ाई

तीन बच्चों की मां के लिए पढ़ाई का समय निकालना किसी चुनौती से कम नहीं था. दीपा भाटी सुबह जल्दी उठकर घर का सारा काम निपटाती थीं, बच्चों को स्कूल भेजना और परिवार की देखभाल करना उनकी प्राथमिकता थी. इसके बाद दोपहर में जब सब सो जाते या रात को जब घर शांत होता, तब दीपा अपनी किताबों की दुनिया में खो जाती थीं. उन्होंने किसी बड़े कोचिंग संस्थान का सहारा लेने के बजाय सेल्फ स्टडी पर भरोसा किया और अपनी मेहनत के दम पर 2021 की यूपी पीसीएस परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल की.

शादी के बाद भी रख सकते हैं करियर की नींव

दीपा भाटी सरकारी इंटर कॉलेज (GIC) में प्रधानाचार्य के पद पर तैनात हैं और यूपी पीसीएस अधिकारी के रूप में समाज की सेवा कर रही हैं. उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार का गौरव बढ़ाया, बल्कि उन सभी महिलाओं को नई दिशा दी है जो शादी के बाद अपने करियर को खत्म मान लेती हैं. दीपा भाटी अक्सर कहती हैं कि अगर आपके पास धैर्य है और आप मेहनत से पीछे नहीं हटते तो सफलता की राह में उम्र कभी बाधा नहीं बन सकती.

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Deepali PorwalWith more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academic sys…और पढ़ें

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